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एक माफिया जिसके लिए लगा थाने में दरबार

Sun, 19 May 2013 04:32 PM IST
बीबीसी
बीबीसी Updated Sun, 19 May 2013 04:32 PM IST
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court in police station for a mafia

इटली में एक कुख्यात माफ़िया सरगना ने जब आत्मसमर्पण किया तो हिरासत में उनके चाहने वालों का दरबार लग गया। कुछ लोग उनकी तुलना ईसा मसीह से करने लगे। बीबीसी संवाददाता की आंखों-देखी।

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बुधवार की शाम स्थानीय समय के अनुसार करीब 4।15 बजे माफ़िया संगठन ड्रैंगगेटा के प्रमुख जूजे़प्पे “पेप्पे” पेस्के अपने मूल निवास स्थान के पुलिस थाने में कुछ इस क़दर सामान्य तरीक़े से टहलते हुए आए, मानों उन्हें पार्किंग टिकट का भुगतान करना हो।
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दाढ़ी-बाल बनाकर आए माफ़िया सरगना की मुस्कान बड़ी अटपटी सी थी। वह कलाब्रिया के मोस्ट वॉन्टेड अपराधियों में से एक माने जाते हैं। उन्होंने अपने आत्मसमर्पण के लिए जो वक्त तय किया था, उससे वह महज़ चंद मिनट ही देरी से पहुंचे।
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इटली का विशेष पारामिलिट्री बल जो उन्हें ढ़ूंढने के लिए तीन साल तक मशक्कत करता रहा था, वो इस माफ़िया सरगना के नाटकीय अंदाज में आत्मसमर्पण करने पर बेहद नाराज़ थे।

गंवाया मौका
वो इस बात पर खफा थे कि उन्होंने इस कुख़्यात अपराधी को पकड़ने का मौका गंवा दिया। अनोखे तरीके से आत्मसमर्पण करने के अलावा इनकी सार्वजनिक भाव-भंगिमा भी बेहद रहस्यमयी सी लग रही थीं।

माफ़िया सरगना आमतौर पर कभी आत्मसमर्पण नहीं करते हैं। विपरीत हालात में भी वह किसी प्रतिद्वंद्वी गुट के हाथों मारे जाते हैं या ज़्यादा बूढ़े होने या बीमार पड़ने पर कहीं छिपकर रहने की कोशिश करते हैं।

वे कई दफा पुलिस अधिकारियों के साथ कुछ गुप्त समझौते भी कर सकते हैं जिसके तहत पुलिस यह बहाना बनाती है कि उनकी इच्छा के ख़िलाफ उन्हें पकड़ा गया।

हालांकि 33 साल के पेप्पे पेस्के के साथ ऐसी कोई बात नहीं थी और वह पूरी तरह स्वस्थ थे। दिलचस्प बात यह थी कि वह ड्रैंगगेटा के निर्विवादित उत्तराधिकारी भी हैं जिसे ज्यादा लोग भले ही न जानते हों लेकिन ये एक ताक़तवर माफ़िया संगठन है।

पुलिस अधिकारियों को इस बात पर भरोसा नहीं हो रहा था कि पेस्के आएंगे, इसीलिए उन्होंने किसी पत्रकार को सूचना नहीं दी क्योंकि ख़बर लीक होने के अलावा यह आशंका भी थी कि पेस्के अपनी बात से मुकर सकते हैं। हालांकि पेस्के के वकीलों ने उन्हें यह इत्तिला दी थी कि वह ऐसा ज़रूर करेंगे।

मेरी किस्मत अच्छी थी। मैं ड्रैंगगेटा पर 'बीबीसी दिस वर्ल्ड डाक्यूमेंट्री' के लिए फॉलो अप दौरे पर था जिसे मैंने हाल में इतिहासकार जॉन डिकी के साथ बनाया था। इस डॉक्यूमेंट्री में पेस्के को प्रमुखता से दिखाया गया था। मुझे अंदाजा हो गया था कि कलाब्रिया के लिए यह एक अभूतपूर्व दिन साबित होने वाला है।

माफ़िया साम्राज्य
यह हथियार डालने वाला माफ़िया परिवार कतई नहीं था। पेस्के परिवार को आपराधिक गतिविधियों में लिप्त माना जाता है। पेप्पे पेस्के को इस आपराधिक संगठन की जिम्मेदारी विरासत में तब मिली जब इनके बड़े भाई फ्रांसेस्को “चिचियो” पेस्को को 2011 में भूमिगत बंकर से पकड़ लिया गया। चिचियो ने अपने पिता एंटोनियो से आपराधिक संगठन की कमान संभालने का गुर सीखा था।

इस परिवार ने करीब आधी सदी के दौरान पूरे यूरोप में ड्रग की तस्करी, जबरदस्ती वसूली, हिंसा और भ्रष्टाचार करके कम से कम 20 करोड़ पाउंड या 16।84 अरब रुपये का माफ़िया साम्राज्य कायम किया।

माफ़िया बिरादरी के लिहाज से मेरी यह सोच थी कि पेस्के के इस फ़ैसले से वह ख़ुद और उनके परिवार के लोग बेहद शर्मिंदा होंगे। लेकिन मैं ग़लत था, पेप्पे पेस्के के आत्मसमर्पण की ख़बर रोजार्नो में फैलते ही वह पुलिस थाना एक धार्मिक स्थल में तब्दील हो गया और वहां एक दरबार सा लग गया।

लगा दरबार
पुलिस स्टेशन में कई छोटे-बड़े समूहों का तांता लग गया। उनके दर्जनों रिश्तेदार और शुभचिंतक वहां पहुंचे थे। इनमें छह महीने से लेकर 90 साल के लोग शामिल थे। कोई छड़ी के सहारे तो कोई व्हील चेयर पर बैठकर आए थे। सभी लोग इस माफ़िया सरगना के लिए अपना सम्मान व्यक्त कर रहे थे।

पुलिस अधिकारियों के लिए भी वहां बड़ी अजीब स्थिति पैदा हो गई। वे यह समझ नहीं पा रहे थे कि वे एक ऐसे शख़्स के लिए उदारता जताएं जिसने अपने परिवार को तीन सालों से नहीं देखा है या फिर वे कड़ा रुख़ अख़्तियार करें।

उनकी दादी सबसे पहले उस कमरे में गईं जहां उनका पोता बैठा हुआ था। उन्होंने रोते हुए पूछा, “तुम कहां जा रहे हो?” उन्होंने कहा, “बेशक जेल, दादी मां।” उनकी दादी ने कहा, “मैं तुम्हें फिर कभी नहीं देख पाउंगी।” उन्होंने हंसते हुए कहा, “आप चिंता न करें, मैं जल्दी ही वापस आउंगा। मैंने कुछ ग़लत नहीं किया है, मैं बकरी के कारोबार से जुड़ा हूं।”

एक अन्य उम्रदराज रिश्तेदार ने कहा, “तुम निर्दोष साबित होगे जैसे कि यीशू को पुनर्जीवन मिला था, वैसा ही तुम्हारे साथ भी होगा।” फिर एक के बाद एक उनकी चाची, भाई-बहन, उनके ससुराल के लोग उनसे गले मिलने लगे। कुछ उन्हें चूम रहे थे, कुछ रो रहे थे, कुछ खु़श थे, कुछ को जल्दी थी तो कुछ सम्मान भाव के साथ खड़े थे।

पेप्पे कुर्सी पर आराम की मुद्रा में बैठे हुए थे और यह सारा नज़ारा कुछ ऐसे दिख रहा था मानों वहां कोई प्रमुख वक्ता दरबार लगा कर दर्शकों को संदेश दे रहा हो।

चौकस पुलिस
लेकिन पुलिस ने अपनी निगाहें चौकस कर रखी थीं। सादा कपड़ो में पारामिलिट्री बल के जवानों ने पेस्के से मिलने आने वाले सभी लोगों पर निगाह रखी थी। अचानक ही उनकी उदारता का राज़ सार्थक लगने लगा।

उनसे मुलाक़ात करने वालों में महिलाओं की तादाद ज़्यादा थी। पेस्के परिवार के अब ज़्यादातर लोग जेल में हैं।

दो हफ़्ते पहले ड्रैंगगेटा के ख़िलाफ़ हुए मुक़दमे में पेस्के ख़ानदान के 42 सदस्यों को कुल 500 सालों की सज़ा सुनाई गई थी। पेप्पे पेस्के को माफ़िया गतिविधियों से जुड़े रहने के लिए 16 साल की सज़ा दी गई है और अब उन्हें अति सुरक्षित जेल में रखा जाएगा। धीरे-धीरे उनके कई सहयोगी पकड़े गए हैं। दो हफ्ते पहले ही उनकी पत्नी को भी गिरफ़्तार किया गया जो सात महीने से गर्भवती थीं।

मामले की जांच से जुड़े अधिकारी का कहना है, “यह पुलिस महकमे की बड़ी सफलता है लेकिन बेवकूफ बनने की जरूरत नहीं है। यह किसी का निजी फैसला नहीं है। आमतौर पर यह ऐसे माफिया परिवारों की रणनीति होती है। वे किसी एक का बलिदान देकर पूरे संगठन पर पड़ रहे दबाव को कम करना चाहते हैं। लेकिन उनकी यह रणनीति कारगर नहीं होगी।”


पेप्पे पेस्के कार से जेल ले जाए गए और सड़कों के किनारे लोगों की कतार दिख रही थी। वह मुस्कराते और हाथ हिलाते हुए दिख रहे थे जब उनके परिवार के लोग, दोस्त ताली बजा रहे थे।

ड्रैंगगेटा प्रमुख को जब गिरफ़्तार कर ले जाया जा रहा था तब उनकी एक चाची चिल्लाईं, “तुम खाना ठीक से खाना।”

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