फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Europe ›   cigarette smoking in car is dangerous

कार में सिगरेट का कश होता है 'ख़तरनाक'

Sat, 27 Oct 2012 03:56 PM IST
बीबीसी हिन्दी
बीबीसी हिन्दी Updated Sat, 27 Oct 2012 03:56 PM IST
विज्ञापन
cigarette smoking in car is dangerous
क्या आप उन लोगों में से हैं जो अपनी कार में बैठे हुए सिगरेट का कश लगाना पसंद करते हैं? वैज्ञानिकों की मानें तो कार में बैठकर धूम्रपान करने से जो धुँआ होता है वो सुरक्षित सीमा से कहीं ज़्यादा होता है- फिर चाहे आपने कार की खिड़की खोल कर रखें या फिर एयर कंडिशनिंग चल रही हो।
विज्ञापन


ब्रिटिश मेडिकल एसोसिएशन का मानना है कि कार में बैठकर धूम्रपान करने पर पाबंदी होनी चाहिए। कार की पिछली सीट पर बैठे हुए बच्चे या आगे की सीट पर बैठे किसी व्यक्ति की सेहत के लिए ये धुँआ अच्छा नहीं है।
विज्ञापन


टोबैको कंट्रोल पत्रिका के मुताबिक स्कॉटलैंड की एक टीम ने 85 बार कारों में सफर के दौरान प्रदूषण का स्तर जाँचा और पाया कि ये स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन के तय स्तर से तीन गुना से भी ज़्यादा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


शोधकर्ताओं ने कार की पिछली सीट पर एक उपकरण लगाया, स्तर मापा और कार के सड़क सफर के दौरान हवा की गुणवत्ता का विश्लेषण किया।

85 में से 49 मामलों में ड्राइवरों ने चार तक सिगरेट पी। जहाँ ड्राइवर ने सिर्फ़ एक ही सिगरेट पी और कार की खिड़की खुली रखी, वहाँ भी पार्टिकूलेट मैटर का स्तर सुरक्षित सीमा से कहीं ज़्यादा था।

पाबंदी कितनी सही?
ब्रिटिश मेडिकल एसोसिएशन कार में बैठकर धूम्रपान करने पर पाबंदी लगाने के पक्ष में है। यूनिवर्सिटी ऑफ एबरडीन के डॉक्टर शॉन कहते हैं, “धूम्रपान का बच्चों पर सबसे ज़्यादा असर पड़ता है क्योंकि बच्चों की साँस लेने की गति ज़्यादा होती है और वे आमतौर पर धूम्रपान वाली जगह से खुद से हटने में सक्षम नहीं होते।”

शोधकर्ताओं का कहना है कि कार में धूम्रपान पर रोक लगाने पर विचार होना चाहिए। लेकिन सब लोग इससे सहमत नहीं है। धूम्रपान करने वालों के एक गुट के निदेशक साइमन क्लार्क कहते हैं, “हम नहीं चाहते कि लोग कार में धूम्रपान करें जब बच्चे बैठे हों लेकिन इस पर पाबंदी लगाना गलत है। माँ-बाप को ऐसे मामलों में अपना विवेक इस्तेमाल करना चाहिए।”


वहीं ब्रिटेन के प्रोफेसर जॉन ब्रिटन का तर्क है कि बच्चों को बचाने के लिए ये प्रतिबंध ज़रूरी है। वे कहते हैं, “हर साल पैसिव स्मोकिंग के कारण बच्चों में संक्रमण के हज़ारों मामले सामने आते हैं, कई बच्चों की मौत हो जाती है और मेननजाइटिस भी होता है।”

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news, Crime all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed