फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Europe ›   british asian possessed by jinn

ब्रिटेन में लोगों पर 'जिन्न का साया'

Tue, 27 Nov 2012 02:00 PM IST
बीबीसी हिंदी
बीबीसी हिंदी Updated Tue, 27 Nov 2012 02:00 PM IST
विज्ञापन
british asian possessed by jinn

ब्रिटेन में रहने वाले एशियाई समुदाय में ऐसे लोगों की संख्या बढ़ रही है जो मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के लिए भूत-प्रेत और जिन्न को जिम्मेदार मानकर झाड़-फूंक करने वालों की शरण में जा रहे हैं।

विज्ञापन


मुदस्सर खान की उम्र 41 वर्ष है और वो मानते हैं कि कई वर्षों से एक जिन्न का उन पर साया है, जिसने उनके शरीर को काबू में कर रखा और वो उनकी तबीयत खराब कर देता है तथा सोने भी नहीं देता है।
विज्ञापन


अबू मोहम्मद राक़ी पूर्वी लंदन में रहते हैं और मुदस्सर जैसे लोग इलाज के लिए नंबर लगाकर उनके पास आते हैं। मुदस्सर कहते हैं कि जिन्न उन पर दवाओं का असर नहीं होने देता और राहत के लिए वह अबू के पास जाते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


वे पांच साल से अबू के पास जा रहे हैं जिनका दावा है कि वो मुदस्सर के भीतर घुसे जिन्न को तलब करते हैं और फिर ये जिन्न मुदस्सर के मुंह से ही बात करता है, इससे मुदस्सर को राहत मिलती है।

विवादित उपचार
अबू मोहम्मद जानते हैं कि उनके झाड़-फूंक को विवादित माना जाता है। उनका मानना है कि कुछ मर्ज ऐसे होते हैं जिनकी दवा डॉक्टरों के पास नहीं होती। अबू कहते हैं कि जिन्न तो डॉक्टरों को भी मूर्ख बना देता है।

वे कहते हैं, ''मैं कुरान की मदद से ऐसे लोगों को ठीक करता हूं। आपको इस पर विश्वास होना चाहिए, ये तभी काम करता है। यकीन कीजिए परेशानी, निराशा, दिल की बीमारी और भी बहुत कुछ इससे ठीक हो जाता है।''

अपने इस दावे के बावजूद अबू मोहम्मद स्वीकार करते हैं कि उनके पास आने वाले लोगों में कुछ ऐसे भी लोग हैं जिन्हें फौरन दवाओं की जरूरत है, जो मानसिक रूप से अस्वस्थ हैं।

मुदस्सर की तरह और भी लोग हैं जो जिन्न और भूत-प्रेत को अपनी परेशानी की जड़ मानते हैं और बेहतरी की आस में अबू मोहम्मद जैसे लोगों के पास जाते हैं।

नदीम (बदला हुआ नाम) के साथ भी ऐसा ही हुआ और वो झांड़-फूंक के चक्कर में पड़े रहे। बाद में पता चला कि उन्हें मानसिक बीमारी सिज़ोफ्रेनिया है। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराने की नौबत आ गई थी।

चिंता का विषय
मानसिक स्वास्थ्य के पेशे से जुड़े लोग भी नदीम और इस तरह के दूसरे मामलों को चिंता का विषय मानते हैं।

वारविक मेडिकल स्कूल में प्रोफेसर स्वर्ण सिंह बताते हैं कि मनोवैज्ञानिक समस्याएं तब अपने चरम पर पहुंच जाती हैं जब पीड़ित लोगों को किसी की आवाज सुनाई देने का भ्रम पैदा हो जाता है।

वे कहते हैं, ''एशियाई समूह, खासतौर पर ब्रितानी पाकिस्तानी इसे मज़हब से जोड़कर देखने लगते हैं और फिर मस्जिदों में इमामों के चक्कर में पड़ जाते हैं।''

ब्रितानी एशियाई लोगों में ये धारणा आम है कि नजर लगती है और काला जादू होता है। ये लोग कुरान में जिन्न के अस्तित्व के बारे में पढ़कर बड़े होते हैं।

चरम परिणति
इसी साल सितंबर में एक ही परिवार को चार सदस्यों को 21 वर्षीय नाइला मुमताज़ की हत्या का दोषी पाया गया। ये बर्मिंघम का मामला है।

घर वालों ने नाइला की हत्या ये सोचकर कर दी थी कि उस पर किसी बुरी शक्ति का असर है। मुकदमे की सुनवाई के दौरान सुबूतों में कहा गया था कि परिवार के लोग नाइला के शरीर से जिन्न को निकाल बाहर करना चाहते थे।

प्रोफेसर स्वर्ण सिंह कहते हैं कि मज़हब के आधार पर देखभाल से मरीज को बड़ी राहत मिल सकती है, लेकिन दिक्कत तब पैदा हो जाती है जब इसे एकमात्र समाधान समझ लिया जाता है।


वे एक उदाहरण बताते हुए कहते हैं, ''एक सिख युवक 18 वर्ष की उम्र में बीमार हुआ, परिवार अपने ही समुदाय के भीतर इसका इलाज तलाशता रहा और 13 वर्षों तक पता नहीं चला कि युवक को समस्या क्या है, जब तक बात समझ में आई, इलाज के हिसाब से बहुत देर हो चुकी थी।''

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news, Crime all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed