फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Europe ›   bacteria that will reduce the weight

मोटापा 'कम करने वाला बैक्टीरिया' मिला

Fri, 17 May 2013 12:51 PM IST
BBC
BBC Updated Fri, 17 May 2013 12:51 PM IST
विज्ञापन
bacteria that will reduce the weight

वैज्ञानिकों ने पेट में रहने वाले एक क्लिक करें जीवाणु का इस्तेमाल जानवरों में क्लिक करें मोटापे को कम करने तथा टाइप-टू क्लिक करें मधुमेह को नियंत्रित करने के लिए किया है।

विज्ञापन


'प्रोसीडिंग्स ऑफ़ नेशनल एकेडमी ऑफ़ साइंसेज' में प्रकाशित शोध के मुताबिक जीवाणु की एक प्रजाति से युक्त शोरबा पीने से मोटे चूहों के स्वास्थ्य में नाटकीय बदलाव देखा गया।
विज्ञापन


माना जा रहा है कि ये जीवाणु पेट की भीतरी झिल्ली में बदलाव करता है और भोजन के पचने के तरीके को भी बदल देता है।

अब मनुष्यों में भी ऐसे परीक्षण किए जाने की जरूरत है ताकि इस बात का पता लगाया जा सके कि ये जीवाणु उनका मोटापा कम कर सकता है या नहीं।

मानव शरीर में अनगिनत जीवाणु रहते हैं और इनकी संख्या शरीर की कुल कोशिकाओं से दस गुना ज्यादा है।

प्रभाव

शोधों से ये बात साबित हो रही है कि ये जीवाणु मनुष्य के स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं।

अध्ययनों से ये बात भी पता चली है कि मोटे और पतले लोगों के पेट में रहने वाले जीवाणुओं की किस्म और संख्या अलग-अलग होती है।

गैस्ट्रिक बाइपास क्लिक करें सर्जरी यानी मोटापा कम करने के लिए किए जाने वाले ऑपरेशनों से भी इस बात का पता चला है कि इससे पेट में जीवाणुओं के संतुलन में बदलाव आता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


बेल्जियम में कैथोलिक यूनिवर्सिटी ऑफ़ लूवैन के शोधकर्ताओं ने जीवाणु की एक प्रजाति एकरमेंसिया म्यूसिनिफिला पर काम किया। पेट में रहने वाले जीवाणुओं में इस प्रजाति की संख्या तीन से पाँच प्रतिशत तक होती है लेकिन मोटे लोगों में इसकी संख्या घट जाती है।

प्रयोग
चूहों को उच्च वसा युक्त भोजन कराया गया जिससे वे सामान्य चूहों से दो-तीन गुना मोटे हो गए। इन मोटे चूहों को फिर जीवाणु युक्त शोरबा पिलाया गया और इस दौरान उनके आहार में कोई दूसरा बदलाव नहीं किया गया।

शोरबा पीने के बाद इन चूहों के आकार में तो कोई बदलाव नहीं हुआ, लेकिन उनका क्लिक करें वज़न आधा रह गया। साथ ही उनमें इंसुलिन प्रतिरोध का स्तर भी कम पाया गया जो कि टाइप-2 मधुमेह का एक प्रमुख लक्षण है।

कैथोलिक यूनिवर्सिटी ऑफ़ लूवैन के प्रोफेसर पैट्रिस कानी ने बीबीसी से कहा, “हम पूरी तरह मोटापे को खत्म नहीं कर पाए लेकिन इसे बहुत हद तक नियंत्रित करने में सफल रहे। पहली बार ये बात सिद्ध हुई है कि जीवाणु की एक खास प्रजाति और मोटापा कम करने में सीधा संबंध है।”

ये जीवाणु पेट की आंतरिक झिल्ली में श्लेष्मा के स्तर बढ़ा देता है जो एक अवरोधक की तरह काम करता है और कुछ पदार्थों को पेट से खून में जाने से रोकता है। साथ ही ये पाचन तंत्र से आ रहे रासायनिक संकेतों को भी बदल देता है जिससे शरीर में अन्यत्र वसा बनने की प्रक्रिया में बदलाव आता है।

भोजन में एक खास प्रकार के फाइबर के इस्तेमाल से भी ऐसे ही परिणाम देखने को मिले क्योंकि इससे पेट में एकरमेंसिया म्यूसिनिफिला का स्तर बढ़ गया।

इलाज
प्रोफेसर कानी ने इस बात पर आश्चर्य जताया कि पेट में रहने वाले हजारों किस्म के जीवाणुओं में से केवल एक प्रजाति का ऐसा असर हो सकता है।

उन्होंने कहा कि मोटोपे को रोकने या उसके इलाज और टाइप-2 मधुमेह को रोकने के लिए जीवाणु के इस्तेमाल की तरफ ये पहला कदम है और निकट भविष्य में जीवाणु आधारित इलाज संभव हो सकेगा।

यूनिवर्सिटी कॉलेज कॉर्क में जीवाणु विज्ञानी प्रोफेसर कॉलिन हिल ने कहा, “ये बेहद उत्साहित करने वाला अध्ययन है। जीवाणुओं और मोटापे के बीच संबध के बारे में हमने कई बार सुना था लेकिन पहली बार ये बात साबित हुई है।”


उन्होंने कहा, “मुझे ये व्यावहारिक नहीं लगता कि दिनभर आप क्रीम केक, चिप्स और सॉसेज खाइए और फिर उनके प्रभाव को कम करने के लिए जीवाणु खाइए।”

प्रोफेसर हिल ने कहा कि संभव है कि इस शोध से ये समझने में मदद मिले कि असल में पेट में होता क्या है जिससे मोटे लोगों को अपना वजन घटाने के लिए सही सलाह दी जा सके।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news, Crime all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed