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इको फ्रेंडली समिट में पर्यावरण बचाने जर्मनी पहुंची ‘मां काली’

Thu, 16 Nov 2017 12:41 PM IST
दयाशंकर शुक्ल सागर/ अमर उजाला, नई दिल्ली
दयाशंकर शुक्ल सागर/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 16 Nov 2017 12:41 PM IST
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against pollution people protest with kali maa statue in germany at Eco friendly summit

जलवायु परिर्वतन सम्मेलन के लिए जुटे तमाम देश यहां अपने ढंग से पर्यावरण बचाने की मुहिम में लगे हैं। वे तमाम संकेतों, बिम्बों और प्रदर्शनियों के जरिए इको फ्रेंडली होने का संदेश दे रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र दफ्तर के सामने सड़क पर बुधवार को दुनिया भर के पर्यावरणविद प्रदर्शन का एक दिलचस्प नजारा देखकर ठहर गए। सड़क पर प्रतीक के रूप में मां काली को देवी और पर्यावरण विरोधी ऊर्जा को राक्षस के रूप में दर्शाया गया। ये प्रदर्शन बांग्लादेश के नेतृत्व में एशियन देशों के एक्टिविस्टों ने किया था।

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पर्यावरण बचाने के लिए छोटे-छोटे कदमों से चल कर भी हम मंजिल तक पहुंच सकते हैं। बॉन का जलवायु परिर्वतन सम्मेलन यही संदेश दे रहा है। पूरे सम्मेलन को इको फ्रेंडली करने की कोशिश है। सम्मेलन स्थल तक पहुंचाने के लिए सारे वाहन बैटरी संचालित हैं। सम्मेलन में शामिल होने आए हजारों प्रतिनिधियों को पानी पीने की एक बोतल दी गई है, ताकि कागज और प्लास्टिक के गिलासों का इस्तेमाल न हो। चाय काफी को छोड़ खाने-पीने के लिए भी कागज के बर्तनों का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा सम्मेलन स्थल के प्रवेश द्वार पर ही बनी कॉफी शॉप आप का ध्यान आकर्षित करती है।
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ये दुकान जूट के बोरे से सजाई गई है, जिस पर इंडिया कॉफी लिखा है। इसे रूस की एक्टिविस्ट चलाती हैं। एक्टिविस्ट लीना कहती है- ये कान्सेप्ट अनोखा है। प्रतिनिधि हमारे शॉप की तरफ आकर्षित हो रहे हैं। हमारी शॉप पर हर वस्तु इको फ्रेंडली है। एकडों में फैला ये पूरा आयोजन दो हिस्सों में बंटा है। एक हिस्से में सेमिनार और संवाद चल रहे हैं दूसरे में अलग-अलग देशों पवेलियन बने हैं। सबसे ज्यादा आकर्षण का केन्द्र भारत का पवेलियन है जहां गायत्री मंत्र के साथ शाम 5 से 6 बजे तक योग साधना भी कराई जाती है।

यहां सूर्य के प्रतीक रूप में एक गोलाकार स्क्रीन में पर्यावरण के विभिन्न आयामों को दर्शाया गया है। सम्मेलन के आयोजक देश फीजी ने घासफूस के बने आधुनिक मकानों की परिकल्पना को पेश किया है। कहीं हरियाली से हरा भरा संवाद मंडप सजा है। इसी तरह इंडोनेशिया, चीन, जापान, ब्राजील सब अपने अपने ढंग से इको-फ्रेंडली होने का संदेश दे रहे हैं।

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