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2040 तक 1.3 अरब टन हो जाएगा प्लास्टिक का बोझ, शोधकर्ताओं ने लगाया व्यापक आकलन

Mon, 27 Jul 2020 03:38 PM IST
Tanuja Yadav वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन Published by: Tanuja Yadav Updated Mon, 27 Jul 2020 03:38 PM IST
सार

पहली बार प्लास्टिक को लेकर व्यापक आकलन 
20 साल में 1.3 अरब टन प्लास्टिक के बोझ से दब जाएगी दुनिया\
2040 तक ब्रिटेन के क्षेत्रफल का डेढ़ गुना हिस्सा प्लास्टिक से ढका का होगा 
 

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England university of leeds warned about plastic usage in 2040 world will face severe problems
plastic - फोटो : UNEP

विस्तार

प्लास्टिक से दुनिया को कितना नुकसान हो रहा है, ये इस बात से पता लगाया जा सकता है कि अगले 20 सालों में दुनिया में 1.3 अरब टन की प्लास्टिक धरती पर मौजूद हो सकती है। इंग्लैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ लीड्स के वैज्ञानिकों ने इस अनुमान का आकलन किया है। 
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यह रिपोर्ट जनरल साइंस में छपी है और इसके मुताबिक अगले 20 सालों में दुनिया के सामने प्लास्टिक की गंभीर समस्या सामने आने वाली है। रिपोर्ट के अनुसार अगर अभी जरूरी कदम नहीं उठा पाए तो 2040 तक धरती पर 1.3 अरब टन प्लास्टिक होगा और ये बहुत ज्यादा है। 
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यूनिवर्सिटी ऑफ लीड्स के डॉ कोस्टाम वेलिस का कहना है कि ये आंकड़ा डराने वाला जरूर है लेकिन इस समय हमारे पास इससे निपटने का मौका भी है और तकनीकी भी। डॉ वेलिस कहते हैं कि अगले 20 साल में प्लास्टिक से दुनिया की तस्वीर कैसे होगी इसका आकलन हमारे सामने है। 
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ये इतनी प्लास्टिक है कि अगर आप इसे पूरी तरह समतल कर बिछाएंगे तो ये ब्रिटेन के क्षेत्रफल के 1.5 गुना तक के हिस्से को ढक लेगा। प्लास्टिक से पैदा होने वाली समस्या का पता लगाने के लिए शोधकर्ताओं ने पूरी दुनिया में प्लास्टिक के उत्पादन, इस्तेमाल का पता लगाया।


इसके बाद एक मॉडल तैयार किया गया, रिसर्च के लिए फंड कर रही अमेरिकी फ्यूचर टेबल ट्रस्टस की विनी लाउ का कहना है कि अगर इसके उपायों पर अमल किया जाएगा तो निश्चित तौर पर 2040 तक समुद्र में जाने वाली प्लास्टिक को 80 फीसदी तक घटा सकते हैं।

संकट से निपटने शोधाकर्ताओं ने सुझाए छह उपाय
  • प्लास्टिक के उत्पादन और खपत में बढ़ोतरी को कम किया जाए 
  • कागज, जूट और दूसरे गलकर खत्म हो जाने वाले मैटेरियल्स के इस्तेमाल को बढ़ावा मिले
  • रि-साइक्लिंग के लिए उत्पादों और पैकेजिंग मैटेरियल्स डिजाइन किए जाए 
  • मध्य और कम आय वाले देशों में कचरा एकत्र करने की दर बढ़ाई जाए, असंगठित सेक्टर को बढ़ावा मिले
  • बिल्डिंग फैसिलिटीज रिसाइकल न हो पाने वाले वाली 23 फीसदी प्लास्टिक का निपटान खुद करें। 
  • प्लास्टिक कचरे के निर्यात में कमी लाई जाए।
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