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Earthquake-Tsunami: UNESCO ने 9 माह पहले ही दी भूकंप-सुनामी की चेतावनी, भारत जैसे देश के लिए इसके मायने समझें
Thu, 31 Jul 2025 08:23 AM IST
ज्योति भास्कर
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली / वाशिंगटन।
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली / वाशिंगटन।
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Thu, 31 Jul 2025 08:23 AM IST
सार
संयुक्त राष्ट्र की संस्था- यूनेस्को 9 महीने पहले ही वैश्विक चेतावनी जारी कर दी थी कि अगले कुछ वर्षों में समुद्री-तटीय आबादी पर सुनामी का खतरा अप्रत्याशित रूप से बढ़ सकता है। फिलहाल 70 करोड़ लोग ऐसे तटीय क्षेत्रों में रहते हैं, जो सुनामी की चपेट में आ सकते हैं।
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भूकंप (सांकेतिक)
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
रूस के सुदूर पूर्व में स्थित कामचटका प्रायद्वीप में आए 8.8 तीव्रता के भूकंप और उसके बाद आई सुनामी ने नौ माह पहले की उस अपील की याद ताजा कर दी, जब संयुक्त राष्ट्र के शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) ने दुनिया भर की सरकारों और नीति निर्माताओं से सुनामी से बचाव की तैयारियों में निवेश बढ़ाने का आग्रह किया था। यूनेस्को ने यह भी कहा था, आने वाले महीना में भूकंप और सुनामी से पेसिफिक रिंग ऑफ फायर को बड़ा खतरा हो सकता है।
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द गार्जियन के अनुसार यूनेस्को 9 महीने पहले ही वैश्विक चेतावनी जारी कर दी थी कि अगले कुछ वर्षों में समुद्री-तटीय आबादी पर सुनामी का खतरा अप्रत्याशित रूप से बढ़ सकता है। फिलहाल 70 करोड़ लोग ऐसे तटीय क्षेत्रों में रहते हैं, जो सुनामी की चपेट में आ सकते हैं।
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कामचटका का महत्व और जोखिम
कामचटका प्रायद्वीप रूस के सबसे अधिक भूकंप-संवेदनशील क्षेत्रों में से एक है।यह नॉर्थ अमेरिकन प्लेट और पेसिफिक प्लेट के मिलन बिंदु पर स्थित है। यहां 160 से अधिक ज्वालामुखी हैं, जिनमें से कई सक्रिय हैं। यहां 1952 में भी 9.0 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसके बाद सुनामी आई थी।
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इस बार के भूकंप का असर
क्योंकि इस बार के भूकंप की गहराई सिर्फ 25 किलोमीटर थी, यानी यह उथला भूकंप था जिससे पूरे रिंग ऑफ फायर की जमीन पर झटके और नुकसान की आशंका कई गुना बढ़ गई। इसके बाद लगातार 6.2 से 7.1 तीव्रता तक के 15 से अधिक आफ्टरशॉक्स आ चुके हैं। रूस ने पूर्वी सुदूर क्षेत्र में आपात स्थिति घोषित कर दी है, वहीं जापान और अमेरिका के पश्चिमी तटीय इलाकों में सूनामी चेतावनी जारी की गई है।
भारत और अन्य देशों के लिए इसके मायने
भारत भले ही 'रिंग ऑफ फायर' में नहीं आता, लेकिन इस भूकंपीय गतिविधि से वैश्विक स्तर पर भूगर्भीय असंतुलन का जोखिम बढ़ता है। भारतीय सागर क्षेत्र में भी टेक्टोनिक दबाव बढ़ सकता है। चक्रवातीय और जलवायु असामान्यताएं आने वाले हफ्तों में देखी जा सकती हैं। भूकंपीय अनुसंधान केंद्रों ने भी भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों और हिमालयी बेल्ट पर नजर रखने की सिफारिश की है।
हर दो साल में एक खतरनाक सुनामी की आशंका
क्षेत्र में हर 1-2 साल में एक विनाशकारी स्थानीय सुनामी आती है, जबकि भूमध्यसागर में अगले 30 वर्षों में सुनामी की संभावना लगभग 100 प्रतिशत है। यह वैश्विक जोखिम अब और अधिक निकट और वास्तविक प्रतीत हो रहा है।