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उम्मीद: एआई रोबोटिक सर्जरी से हकीकत बन सकता है सिर प्रत्यारोपण का सपना, ब्रेनब्रिज ने पेश की अवधारणा

Fri, 24 May 2024 06:22 AM IST
निर्मल कांत अमर उजाला नेटवर्क, न्यूयॉर्क।
अमर उजाला नेटवर्क, न्यूयॉर्क। Published by: निर्मल कांत Updated Fri, 24 May 2024 06:22 AM IST
सार

Head Transplant: अगर इंसानी शरीर चलता रहे, तो दिमाग सैकड़ों वर्ष तक काम कर सकता है। ब्रेन ब्रिज की अवधारणा साकार हो पाई, तो इंसान कई बड़ी चुनौतियों पर विजय पा सकता है। गहरे अंतरिक्ष अन्वेषण कार्यक्रमों से लेकर चिकित्सकीय चुनौतियों के लिहाज से यह क्रांतिकारी बदलाव होगा।

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Dream of head transplant can become reality through AI robotic surgery, Brainbridge introduced the concept
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : फ्रीपिक

विस्तार

अमेरिकी स्टार्टअप ब्रेनब्रिज ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित रोबोटिक सर्जरी से सिर प्रत्यारोपण की अवधारणा पेश कर उम्मीदों के नए द्वार खोल दिए हैं। एडवांस न्यूरोसाइंस और बायोमेडिकल इंजीनियरिंग क्षेत्र में काम कर रहे ब्रेनब्रिज ने इस तकनीक से जुड़ा वीडियो भी जारी किया है। इसमें दिखाया गया है कि ब्रेनब्रिज सिस्टम एक युवा और पूरी तरह से स्वस्थ शरीर वाले ब्रेन डेड व्यक्ति में बीमार वृद्ध व्यक्ति का सिर प्रत्यारोपित करता है।

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करीब आठ मिनट के इस वीडियो को हशिम अल गायली नाम के यूट्यूब चैनल पर पोस्ट किया गया है। यह चैनल विज्ञान और वैज्ञानिक अवधारणाओं के बारे में वीडियो पोस्ट करता है। इसके विवरण में कहा गया है कि ब्रेनब्रिज दुनिया की पहली सिर प्रत्यारोपण प्रणाली अवधारणा है, जो संपूर्ण सिर और चेहरे को एडवांस रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से प्रत्यारोपित करता है। स्टार्टअप का दावा है कि अगर वे इस संकल्पना को मूर्त रूप दे पाए तो इस अत्याधुनिक प्रणाली से स्टेज-4 कैंसर, लकवा, अल्जाइमर और पार्किंसंस जैसी न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों से पीड़ित रोगियों को जिंदगी की नई उम्मीद मिल जाएगी। व्यक्ति का सिए नए धड़ पर लगाए जाने के कुछ ही सप्ताह के भीतर व्यक्ति सामान्य जीवन जी पाएगा। व्यक्ति के पास अपनी पुरानी यादें, आदतें और हर तरह के दिमागी कौशल ज्यों के त्यों रहेंगे। साथ ही उसे एक नया रोग मुक्त शरीर मिल जाएगा।
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यह होगी सर्जरी की प्रक्रिया
सर्जरी की शुरुआत डोनर और रिसीवर दोनों को जनरल एनस्थीसिया देकर की जाएगी। इसके बाद दोनों शरीरों को ट्रेकियोटॉमी के जरिये यांत्रिक श्वसन की सुविधा दी जाएगी, ताकि सभी अंग सुचारू रहें। दोनों शरीरों में एक आर्टिफिशियल प्लाज्मा सोल्युशन डाला जाता है, ताकि रक्त के थक्के न जमें और पर्याप्त ऑक्सीजन मिलती रहे। सर्जिकल आर्म के जरिये रिसीवर के सिर को डोनर की रीढ़ की हड्डी, अन्नप्रणाली, श्वासनली, तंत्रिकाओं, रक्त वाहिकाओं और ऊतको से जोड़ दिया जाएगा। कटे हुए न्यूरॉन्स को दोबारा जोड़ने के लिए सभी जोड़ों पर पॉलीथीन ग्लाइकोल सॉल्युशन लगाया जाएगा। इसके अलावा रीढ़ की हड्डी पर एक एपिड्यूरल इम्प्लांट लगाया जाएगा, जो प्रत्यारोपण के दौरान क्षतिग्रस्त न्यूरॉन्स की मरम्मत में मदद करेगा और मस्तिष्क व शरीर के समायोजन को बढ़ाएगा। सर्जरी के बाद करीब 4 सप्ताह तक शरीर को कोमा में रखा जाता है, ताकि सिर और शरीर आपस में जुड़ पाएं।
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सैकड़ों वर्ष काम कर सकता है दिमाग
अगर इंसानी शरीर चलता रहे, तो दिमाग सैकड़ों वर्ष तक काम कर सकता है। ब्रेन ब्रिज की अवधारणा साकार हो पाई, तो इंसान कई बड़ी चुनौतियों पर विजय पा सकता है। गहरे अंतरिक्ष अन्वेषण कार्यक्रमों से लेकर चिकित्सकीय चुनौतियों के लिहाज से यह क्रांतिकारी बदलाव होगा। इसे इंसान के अमर होने के सपन से भी जोड़कर देखा जा सकता है। हालांकि, सोशल मीडिया पर इस वीडियो को देखकर हर कोई हैरान है। कुछ लोग इसे फंडिंग के लिए किया गया मजाक करार दे रहे हैं, तो कुछ कह रहे हैं कि यह इंसानों को भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार करने वाली अवधारणा है।

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