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ट्रंप ने बिडेन के खिलाफ खेला आखिरी दांव, बेटे हंटर बिडेन के खिलाफ बैठाई जांच
Wed, 21 Oct 2020 04:31 PM IST
मुकेश कुमार झा
अमर उजाला, वॉशिंगटन
अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: मुकेश कुमार झा
Updated Wed, 21 Oct 2020 04:31 PM IST
सार
- रूसी अखबार की रिपोर्ट के आधार पर हंटर के खिलाफ अटॉर्नी जनरल करेंगे जांच
- मतदान से पहले रिपोर्ट जारी करने का दबाव, बिडेन को भ्रष्टाचार में फंसाने की कोशिश
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डोनाल्ड ट्रंप
- फोटो : PTI
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विस्तार
खुद अपनी सरकार की एजेंसियों और देश के 50 से ज्यादा पूर्व खुफिया अफसरों की राय को नजरअंदाज करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने अटॉर्नी जनरल से डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार जो बिडेन के बेटे हंटर बिडेन के खिलाफ जांच करने को कह दिया है। ट्रंप ने अटार्नी जनरल विलियम बार से कहा है कि वे जांच तेजी से करें और मतदान (यानी 3 नवंबर) से पहले रिपोर्ट जारी कर दें। मंशा साफ है। ट्रंप ऐसी रिपोर्ट चाहते हैं, जिससे हंटर बिडेन भ्रष्टाचार में फंसे दिखें और ट्रंप को उसका फायदा चुनाव में मिले।
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गौरतलब है कि पिछले साल इसी आरोप में ट्रंप पर महाभियोग चला था कि उन्होंने यूक्रेन के राष्ट्रपति पर हंटर बिडेन को फंसाने के लिए दबाव डाला। हंटर बिडेन का यूक्रेन में कारोबार है। न्यूयॉर्क पोस्ट नाम के एक अखबार में छपी रिपोर्ट्स के बाद हंटर का मामला मौजूदा चुनावी महौल के बीच फिर से गरमा गया है। इन रिपोर्टों में दावा किया गया कि हंटर बिडेन के कंप्यूटर से भेजे गए ई-मेल ट्रंप के सलाहकार रूडी जुइलियानी के हाथ लग गए। उनसे जाहिर हुआ कि जो बिडेन ने उप राष्ट्रपति रहते हुए यूक्रेन के एक अभियोजक को बर्खास्त करने के लिए दबाव डाला था, ताकि बरिस्मा नामक ऊर्जा कंपनी की मदद हो सके। इस कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में हंटर बिडेन भी शामिल थे।
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मगर ये रिपोर्ट छपने के बाद अमेरिका के 50 से ज्यादा पूर्व खुफिया अधिकारियों ने आरोप लगाया कि जिन ई-मेल्स को आधार बनाया गया है, वे रूसी दुष्प्रचार का हिस्सा लगते हैं। इन रिपोर्टों को रूसी टीवी चैनल रशिया टुडे ने काफी प्रमुखता से दिखाया। पूर्व खुफिया अधिकारियों ने कहा कि उन्हें अपने पूर्व अनुभवों के आधार ये शक हुआ है कि इस पूरे मामले में रूस सरकार ने अहम भूमिका निभाई है। 2016 के अमेरिकी चुनाव में रूसी हस्तक्षेप की बात अब बहुचर्चित है। पिछले चार साल से अमेरिका में ये बात सियासी चर्चाओं का हिस्सा रही है कि कैसे रूस ने सुनियोजित ढंग से चुनाव नतीजों को डॉनल्ड ट्रंप के पक्ष में झुकाने के लिए काम किया। ऐसी चर्चाएं इस चुनाव में भी हैं कि रूस अपने खुफिया और दुष्प्रचार तंत्र से ट्रंप की मदद कर रहा है।
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पिछले महीने अमेरिका के ट्रेजरी (खजाना) डिपार्टमेंट ने राष्ट्रपति चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश के आरोप में चार लोगों पर प्रतिबंध लगाने का एलान किया था। उनमें यूक्रेन के सांसद एंद्रिय डेरकाख भी हैं, जिनके रूडी जुइलियानी से पुराने संबंध रहे हैं। ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने कहा था कि डेरकाख सक्रिय रूसी एजेंट हैं, जिनके रूसी खुफिया एजेंसियों से नजदीकी रिश्ते हैं। डिपार्टमेंट ने कहा कि डेरकाख ने गुपचुप तरीके से अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के सिलसिले में 'झूठे और निराधार' कहानियां (नैरेटिव) तैयार करने की कोशिश की है। उन्होंने संपादित ऑडियो टेप और बिना सबूत की दूसरी सूचनाएं पश्चिमी मीडिया में जारी की हैं।
मशहूर अखबार वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक पिछले अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने व्हाइट हाउस को आगाह किया था कि जुइलियानी अमेरिकी राजनीति को प्रभावित करने की रूसी कार्रवाई का लक्ष्य रहे हैं। यानी रूस उन्हें अपना एजेंट बनाने के प्रयास में रहा है। अमेरिकी सीनेट की विदेश संबंध समिति के सदस्य क्रिस मरफी ने इस अखबार से कहा था कि जुइलियानी जो भी सूचना दें, उसके दुर्भावना से प्रेरित होने का अंदेशा रहेगा।
अब उन्हीं जुइलियानी से मिली सूचना के आधार पर हाल में एक कम चर्चित अखबार ने रिपोर्ट श्रृंखला छापी। राष्ट्रपति ट्रंप ने उसे आधार बनाकर अपने अटार्नी से इस तरह जांच करने को कहा है कि रिपोर्ट मतदान के पहले जारी हो जाए। रिपोर्ट की ऐसी समय सीमा तय करना अपने आप में विवादास्पद है। लेकिन डोनाल्ड ट्रंप के कार्यशैली से अब दुनिया परिचित हो चुकी है। इसलिए इस पर किसी हैरत नहीं हुई है। बस, इससे ये साफ हुआ है कि संभवतः ‘रूसी हाथ’ इस बार भी अमेरिकी चुनाव में सक्रिय हैं। रूस के कूटनीतिक जानकारों की राय रही है कि डोनल्ड ट्रंप जैसा अस्थिर दिमाग का व्यक्ति रणनीतिक रूप से अमेरिका के लिए हानिकारक है, इसलिए उसका सत्ता में रहना रूस के लिए फायदेमंद है।