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ट्रंप का चीन पर वार, तिब्बतियों को दिया अगला दलाई लामा चुनने का आधिकार, कानून पर किए हस्ताक्षर
Mon, 28 Dec 2020 03:30 PM IST
Sneha Baluni
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
Published by: Sneha Baluni
Updated Mon, 28 Dec 2020 03:30 PM IST
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डोनाल्ड ट्रंप-शी जिनपिंग (फाइल फोटो)
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चीन और अमेरिका के रिश्तों में पिछले काफी समय से तनातनी जारी है। इसी बीच चीन की तरफ से मिल रही चेतावनियों को दरकिनार करते हुए अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने उस कानून पर हस्ताक्षर कर दिए हैं जो तिब्बतियों को उनके धर्म गुरु दलाई लामा के अगले उत्तराधिकारी को चुनने का हक देता है।
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‘तिब्बती नीति एवं समर्थन कानून 2020’ में तिब्बत संबंधी विभिन्न कार्यक्रमों एवं प्रावधानों में संशोधन किया गया है। ट्रंप ने रविवार को कोरोना वायरस से निपटने के लिए राहत देने और संघीय सरकार को धन मुहैया कराने के लिए 2300 अरब डॉलर के पैकेज के तहत रविवार को इस विधेयक को मंजूरी दी।
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चीन के विरोध के बावजूद अमेरिकी सीनेट ने पिछले सप्ताह इसे सर्वसम्मति से पारित किया था, जिसमें तिब्बतियों को उनके आध्यात्मिक नेता का उत्तराधिकारी चुनने के अधिकार को रेखांकित किया गया है और तिब्बत के मुद्दों पर एक विशेष राजनयिक की भूमिका का विस्तार किया गया है।
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विधेयक के तहत तिब्बत संबंधी मामलों पर अमेरिका के विशेष राजनयिक को यह अधिकार दिया गया है कि वह यह सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन कर सकता है कि अगले दलाई लामा का चयन सिर्फ तिब्बती बौद्ध समुदाय करे।
इसमें तिब्बत में तिब्बती समुदाय के समर्थन में गैर-सरकारी संगठनों को सहायता का प्रस्ताव है। इसमें अमेरिका में नए चीनी वाणिज्य दूतावासों पर तब तक पाबंदी की बात है जब तक तिब्बत के ल्हासा में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास की स्थापना नहीं की जाती।
चीन ने अमेरिका को दी थी चेतावनी
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने पिछले हफ्ते इस विधेयक के पारित होने के बाद कहा था, 'हम अमेरिका से आग्रह करते हैं कि वह चीन के अंदरूनी मामलों में दखल न दें और इन नाकारात्मक कानूनों पर हस्ताक्षर करने से बचे। ऐसा न हो कि यह भविष्य में द्विपक्षीय संबंधों को नुकसान पहुंचाए।' वहीं कानून बनने पर चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि बीजिंग अमेरिका के इस कानून को स्वीकार नहीं करता और तिब्बत से जुड़े मुद्दे हमारे घरेलू मामले हैं।