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ट्रंप ने लिया अफगानिस्तान से बड़ी संख्या में अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाने का फैसला

Sat, 22 Dec 2018 01:01 AM IST
गौरव द्विवेदी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: गौरव द्विवेदी Updated Sat, 22 Dec 2018 01:01 AM IST
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Donald Trump made a decision to call back a large number of US troops from Afghanistan

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अफगानिस्तान से बड़ी संख्या में अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाने का फैसला किया है। सीरिया से अमेरिकी सैनिकों की वापसी के फैसले के तुरंत बाद यह घोषणा भारतीय दृष्टिकोण से सही नहीं है। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, इससे वहां भारतीय उपस्थिति को खतरा बढ़ जाएगा। अमेरिकी सैनिकों के न रहने से तालिबान सक्रिय होगा और पाकिस्तान भी आतंकवाद का सहारा लेकर अफगानिस्तान को निशाना बनाएगा। 

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इस दौरान पाकिस्तानी इशारों से आतंकी भारतीय लोगों, कंपनियों और ऐसी परियोजनाओं को खास तौर से निशाना बनाएंगे जहां भारत ने निवेश किया है।  भारत के लिए यह इसलिए भी चिंता की बात है क्योंकि अफगानिस्तान में बिना अपनी सेना के भारत बुनियादी ढांचों और संस्थानों का निर्माण कर रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि  सीरिया और अफगानिस्तान के बारे में ट्रंप के फैसले से पश्चिम एशिया और अफगानिस्तान में अप्रत्याशित घटनाएं हो सकती हैं।
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इससे पहले  एक अमेरिकी अधिकारी ने गोपनीयता की शर्त पर बताया, फैसला लिया गया है कि बड़ी संख्या यानी करीब-करीब 50 फीसदी सैनिकों को वहां (अफगानिस्तान) से वापस बुलाया जाएगा। सैनिकों की यह वापसी अगले कुछ महीने में होगी। सैनिकों को वापस बुलाने का फैसला तालिबान के साथ शांति समझौते को लेकर अमेरिका के दबाव बनाने के बीच आया है। बता दें कि अफगानिस्तान में इस वक्त करीब 14 हजार अमेरिकी सैनिक तैनात हैं।
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पानी में भी चाहिए खून की गंध

अमेरिका की रक्षा मामलों पर समाचार देने वाली वेबसाइट लॉन्ग वार जर्नल ने ट्रंप के इस फैसले पर चिंता जताई है। वेबसाइट ने तालिबान के साथ बातचीत करने के हालिया अमेरिकी प्रयासों का जिक्र करते हुए प्रश्न किए हैं कि आप कैसे सोच सकते हैं कि सीरिया जैसा फैसला अफगानिस्तान के लिए भी लिया जा सकता है, जबकि वहां तालिबान अभी भी सक्रिय है। जर्नल के लेखक बिल रोगियो ने लिखा है, तालिबान को पानी में भी खून की गंध चाहिए। ऐसे में अमेरिका यह फैसला कैसे ले सकता है। इसे चतुर रणनीति नहीं कहा जा सकता।


अफगानिस्तान की सुरक्षा के लिए हम प्रतिबद्ध: नाटो

अमेरिका द्वारा सैनिकों की वापसी की घोषणा के बावजूद शुक्रवार को नाटो गठबंधन ने अफगानिस्तान में अपने मिशन की प्रतिबद्धता पर बल दिया। नाटो की प्रवक्ता ओना लुंगसेकू ने कहा, गठबंधन के विदेश मंत्रियों ने हाल में एक बैठक की थी, जिसमें उन्होंने अफगानिस्तान में सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करने के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता व्यक्त की थी। यह सुनिश्चित करने के लिए हमारी भागीदारी महत्वपूर्ण है कि अफगानिस्तान कभी भी अंतरराष्ट्रीय आतंकियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह नहीं बन पाए। हालांकि इस दौरान उन्होंने अमेरिका के इस फैसले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

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