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महाभियोग प्रस्तावः रिपब्लिकन पार्टी में नहीं मची भगदड़, ट्रंप का रसूख कायम

Thu, 14 Jan 2021 03:11 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 14 Jan 2021 03:11 PM IST
सार

सर्वे के दौरान यह पूछे जाने पर कि क्या छह जनवरी की घटना के मद्देनजर ट्रंप को तुरंत राष्ट्रपति पद से हटा दिया जाना चाहिए, रिपब्लिकन पार्टी के परंपरागत समर्थकों के बीच सिर्फ 24 फीसदी लोगों ने हां कहा...

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Donald trump has strong hold on republican party, no republicans quit the party during Impeachment proposal
us senate - फोटो : पीटीआई (फाइल)

विस्तार

अमेरिकी कांग्रेस (संसद) के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पारित किया, तो इस बात ने ध्यान खींचा कि सदन के सिर्फ दस रिपब्लिकन सदस्यों ने इस प्रस्ताव के पक्ष में वोट डाले। 197 रिपब्लिकन सदस्यों ने ट्रंप पर महाभियोग लगाने का विरोध किया। इस तरह प्रस्ताव 232-197 के अंतर से पास तो हो गया, लेकिन छह जनवरी की घटना के बाद बड़ी संख्या में रिपब्लिकन सदस्यों के ट्रंप का साथ छोड़ने के अमेरिकी मीडिया में लगाए जा रहे अनुमान गलत साबित हो गए। इससे इस प्रस्ताव का सीनेट में पास होना भी अनिश्चित हो गया है। वहां इसे पारित होने के लिए दो तिहाई यानी 67 सदस्यों के समर्थन की जरूरत होगी। लेकिन सदन में रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक-दोनों ही पार्टोयों के 50-50 सदस्य हैं। तो सवाल है कि क्या रिपब्लिकन पार्टी 17 सीनेटर टूटेंगे?

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रिपब्लिकन सांसदों के ट्रंप से अलग ना होने की खास वजह पार्टी के अंदर ट्रंप की जारी जबरदस्त लोकप्रियता है। पार्टी का समर्थन आधार मजबूती से ट्रंप के साथ खड़ा है। ये बात बुधवार को जारी हुए जनमत सर्वे के नतीजों से भी जाहिर हो गई। विश्लेषकों का मानना है कि इस सर्वे के बाद रिपब्लिकन सीनेटरों के ट्रंप का साथ छोड़ने की संभावना और कम हो गई है। ये सर्वे वेबसाइट एक्सियोस.कॉम के लिए इप्सोस एजेंसी ने किया।
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इस सर्वे के मुताबिक रिपब्लिकन समर्थकों के बहुमत की राय में छह जनवरी कैपिटल हिल (संसद भवन) पर हुए ट्रंप समर्थकों के हमले के लिए ट्रंप जिम्मेदार नहीं हैं। साथ ही ज्यादातर रिपब्लिकन समर्थक मानते हैं कि पिछले राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे को चुनौती देकर ट्रंप ने सही काम किया है। साथ ही उनकी राय है कि ट्रंप को फिर से 2024 में राष्ट्रपति चुनाव लड़ना चाहिए। सर्वे के दौरान यह पूछे जाने पर कि क्या छह जनवरी की घटना के मद्देनजर ट्रंप को तुरंत राष्ट्रपति पद से हटा दिया जाना चाहिए, रिपब्लिकन पार्टी के परंपरागत समर्थकों के बीच सिर्फ 24 फीसदी लोगों ने हां कहा। यानी 76 फीसदी पारंपरिक रिपब्लिकन सदस्यों ने अमेरिकी संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत ट्रंप को तुरंत हटाने या उन पर महाभियोग चलाने का विरोध किया।
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इसका अर्थ यह हुआ कि अगर महाभियोग प्रस्ताव पास नहीं हुआ और किसी अदालती मामले में ट्रंप को सजा नहीं हुई, तो वे 2024 में फिर से राष्ट्रपति चुनाव लड़ सकेंगे। साथ ही इस सर्वे नतीजे का यह भी मतलब है कि अब परंपरागत रिपब्लिकन नेताओं का समर्थन आधार बहुत घट चुका है और ट्रंप ही रिपब्लिकन पार्टी की मुख्यधारा हैं। रिपब्लिकन समर्थकों की इस भावना को देखते हुए इसमें हैरत की कोई बात नहीं बचती कि हाउस में सिर्फ 10 रिपब्लिकन सदस्यों ने महाभियोग प्रस्ताव का समर्थन किया।

सर्वे के दौरान एक सवाल पर 36 फीसदी रिपब्लिकन समर्थकों ने खुद को “ट्रंप रिपब्लिकन” बताया। खुद को “पारंपरिक रिपब्लिकन” मानने वालों की संख्या 56 फीसदी रही। लेकिन पारंपरिक रिपब्लिकंस में भी बड़ी संख्या ऐसी है, जो ट्रंप और राष्ट्रपति चुनाव संबंधी उनके रुख का समर्थन करते हैँ। क्या ट्रंप के कारण पार्टी का भला हुआ है, इस सवाल पर खुद को ट्रंप रिपब्लिकन मानने वाले 96 फीसदी लोगों ने हां कहा। लेकिन 'पारंपरिक रिपब्लिकंस' में 'ट्रंप रिपब्लिकंस' की तुलना में ऐसे लोगों की संख्या पांच गुना ज्यादा थी, जो ट्रंप के व्यवहार से नाखुश हैं।


वेबसाइट एक्सियोस ने अपने विश्लेषण में कहा है कि इस सर्वे नतीजे का साफ मतलब है कि पार्टी उम्मीदवार चुनने की अगली प्रक्रियाओं में ट्रंप समर्थक प्रभावशाली बने रहेंगे। साथ ही अगर ट्रंप को पार्टी से निकाला गया या उन्होंने पार्टी छोड़ी, तो रिपब्लिकन पार्टी के समर्थकों का बहुत बड़ा हिस्सा उनके साथ चला जाएगा। उस स्थिति में रिपब्लिकन पार्टी कमजोर हो जाएगी, जिसका फौरी फायदा डेमोक्रेटिक पार्टी को मिल सकता है। इप्सोस सर्वे एजेंसी के पब्लिक अफेयर्स मामलों के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट क्रिस जैकसन ने लिखा है कि पिछले चार वर्षों में रिपब्लिकन पार्टी का समर्थन आधार काफी बंट गया है। एक बड़ी संख्या में समर्थक यह नहीं सोचते कि उनका भविष्य ट्रंप के साथ जुड़ा है। लेकिन ट्रंप के समर्थक कट्टर हैं। अब देखने की बात यह है कि क्या ये कट्टर और एकजुट लोग कम प्रतिबद्ध लेकिन अधिक संख्या वाले समर्थकों की तुलना में अधिक निर्णायक साबित होते हैं।

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