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रूस में फिर छिड़ा एक मूर्ति पर विवाद, बेरिया को देशद्रोही मानने वालों ने उठाए सवाल

Thu, 21 Jan 2021 04:05 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मास्को
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मास्को Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 21 Jan 2021 04:05 PM IST
सार

  • स्टालिन के जमाने में परमाणु हथियार कार्यक्रम में बेरिया की भूमिका अहम थी
  • ख्रुशचेव ने बेरिया पर चलाया था देशद्रोह का मुकदमा, दी गई थी फांसी
  • रूस की परमाणु एजेंसी लगवा रही है बेरिया की दो मूर्तियां

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Dispute over a statue of Beria in Russia, questions raised by parties those consider Beria as traitor
Beria with Stalin daughter Svetlana - फोटो : pinterest

विस्तार

रूस में पूर्व सोवियत नेता जोसेफ स्टालिन के युग की एक प्रमुख हस्ती की मूर्ति लगाने के सवाल पर विवाद खड़ा हो गया है। वालरेनतीय बेरिया उस दौर में सोवियत संघ की खुफिया पुलिस एनकेवीडी के प्रमुख थे। उन पर आरोप है कि उनकी देखरेख में सैकड़ों लोगों को मौत की सजा दी गई और हजारों लोगों को श्रम शिविरों में भेजा गया। मंगलवार को रूसी मीडिया में ये खबर चर्चित हुई कि रूस की सरकारी परमाणु विनियामक एजेंसी ने बेरिया की दो मूर्तियां लगवाने का फैसला किया है। बताया गया कि ऐसा सोवियत संघ के परमाणु हथियार कार्यक्रम में उनके महत्वपूर्ण योगदान के प्रति श्रद्धांजलि देने के लिए किया जाएगा।

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खबरों के मुताबिक परमाणु एजेंसी के अधिकारियों ने मूर्ति बनाने का ऑर्डर दे दिया है। इन मूर्तियों को रूस के परमाणु हथियार भंडार के पास लगाया जाएगा। मीडिया में मशहूर भौतिक-शास्त्री इगोर कुरचेतोव का यह बयान छपा कि अगर बेरिया नहीं होते, तो सोवियत संघ के पास परमाणु बम नहीं होता। सोवियत संघ की परमाणु परियोजना की कहानी बिना बेरिया का जिक्र किए नहीं बताई जा सकती।
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विवाद बढ़ने पर रूस सरकार की सार्वजनिक खरीदारी से संबंधित विभाग रोसातोम के संचार निदेशक आंद्रे चेरेमिसिनोव खंडन किया कि बेरिया को खास तौर पर याद किया जा रहा है। लेकिन उन्होंने कहा कि मोम की कई मूर्तियां लगाई जाएंगी, जिनमें एक बेरिया की भी होगी। इससे इस बात की पुष्टि हो गई कि बेरिया को भी सम्मान से याद किया जाने वाला है। जबकि रूस में एक बड़े तबके की राय है कि बेरिया का नाम यातना और हत्याओं से जुड़ा हुआ है, इसलिए उन्हें सम्मान नहीं दिया जाना चाहिए।
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बेरिया अपने दौर के प्रमुख कम्युनिस्ट नेता थे। उन्हें जोसेफ स्टालिन का करीबी माना जाता था। उन्हें जेलों के प्रबंधन की जिम्मेदारी दी गई थी। आरोप है कि अपनी इस भूमिका में उन्होंने लोगों की यातना दिलवाई। उन पर निजी रूप से यातना में शामिल होने का आरोप है। लेकिन साथ ही उन्हें सोवियत संघ के परमाणु कार्यक्रम का इंचार्ज भी बनाया गया था। उनकी ही देखरेख में सिर्फ पांच साल के अंदर सोवियत संघ ने परमाणु बम बना लिया। इस उपलब्धि के कारण एक दौर में बेरिया को देश में नायक जैसा दर्जा मिला था।

सोवियत नेता जोसेफ स्टालिन की 1953 में मृत्यु हुई। उसके बाद बेरिया की हैसियत घट गई। निकिता ख्रुश्चेव सोवियत नेता बने तो बेरिया पर राजद्रोह का मुकदमा चलाया गया और एक साल बाद उन्हें फांसी दे दी गई। तब से बरिया की छवि सोवियत क्रांति के अमानवीय चेहरे के रूप में रही है।


लेकिन मूर्ति लगाने के समर्थकों का कहना है कि लंदन के मैडम तुसाद म्यूजियम में हिटलर तक की मूर्ति लगी हुई है। उनका तर्क है कि मूर्तियां इतिहास के किसी खास दौर को दर्शाती हैं। इसका सीधा मतलब संबंधित व्यक्ति का सम्मान करना नहीं है। इस विवाद पर राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन ने प्रवक्ता बुधवार को सिर्फ इतना कहा कि ‘मेरी राय में इस मूर्ति में बहुत से लोगों की दिलचस्पी होगी।’ यानी उन्होंने यह साफ नहीं किया कि राष्ट्रपति पुतिन बेरिया की मूर्ति लगाए जाने के पक्ष में हैं या नहीं।

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