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‘कंफर्ट वूमेन’ के सवाल पर जापान और दक्षिण कोरिया में तनाव, 100 साल पुराना है विवाद
Sat, 23 Jan 2021 03:17 PM IST
Harendra Chaudhary
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, टोक्यो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, टोक्यो
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Sat, 23 Jan 2021 03:17 PM IST
सार
जापान ने दक्षिण कोरिया को 1910 से उपनिवेश बना रखा था। उस पूरे दौर में जापानी सैनिक दक्षिण कोरियाई महिलाओं का यौन शोषण करते रहे...
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comfort women statues
- फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
‘कम्फर्ट वूमेन’ के मुद्दे पर जापान और दक्षिण कोरिया में फिर विवाद छिड़ गया है। वैसे ये विवाद पुराना है, लेकिन इस बार दक्षिण कोरिया की एक अदालत के फैसले से ये फिर से उठ खड़ा हुआ है। कोर्ट ने जापान सरकार को आदेश दिया है कि वह दक्षिण कोरिया की पूर्व ‘कम्फर्ट वूमेन’ को मुआवजा दे। इस पर जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोटेगी ने कड़ी प्रतिक्रिया जताई है। उन्होंने दक्षिण कोरिया की सरकार से इस मामले में तुरंत कदम उठाने और कोर्ट के फैसले को निरस्त कराने को कहा है।
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मोतेगी ने कहा कि कोर्ट का ये फैसला अंतरराष्ट्रीय कानून और जापान-दक्षिण कोरिया की सरकारों के बीच हुए समझौते के खिलाफ है। उन्होंने कहा- “यह बेहद अफसोसनाक और पूरी तरह अस्वीकार्य है।” कोर्ट ने ये फैसला पिछली आठ जनवरी को दिया था। लेकिन उसके साथ ही जापान सरकार को अपील करने के लिए 23 जनवरी तक का वक्त दिया गया था। जापान ने अपील नहीं की। इससे शनिवार से ये फैसला अंतिम हो गया। ये समयसीमा गुजरने के बाद जापानी विदेश मंत्री ने बयान जारी किया है।
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मोतेगी ने कहा- “जापान एक बार फिर दक्षिण कोरिया से पुरजोर अनुरोध करता है कि वह इस फैसले से पैदा हुई स्थिति को सुधारने के लिए तुरंत जरूरी कदम उठाए।” उन्होंने कहा कि एक जिम्मेदार देश होने के नाते यह दक्षिण कोरिया की जिम्मेदारी है कि वह अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ आए फैसले को सुधारे। जापानी विदेश मंत्री ने कहा कि इस फैसले अंतरराष्ट्रीय कानून में मौजूद सॉवरेन इम्युनिटी के प्रावधान के मुताबिक ठुकरा दिया जाना चाहिए। ये प्रावधान यह है कि हर देश की सरकार दूसरे देश के न्यायिक क्षेत्राधिकार से बाहर होती है।
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दक्षिण कोरिया की अदालत ने ये फैसला एक “कम्फर्ट वूमन” की याचिका पर दिया। “कम्फर्ट वूमेन” उन महिलाओं को कहा जाता है, जिनका दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जापान फौज ने यौन शोषण के लिए इस्तेमाल किया। उस समय दक्षिण कोरिया पर जापान का कब्जा था। वैसे जापान ने दक्षिण कोरिया को 1910 से उपनिवेश बना रखा था। उस पूरे दौर में जापानी सैनिक दक्षिण कोरियाई महिलाओं का यौन शोषण करते रहे। जापानी सेना के इस व्यवहार को मानव इतिहास में दर्ज सबसे घोर और जघन्य कृत्यों में गिना जाता है।
जापान का कहना है कि 1965 में जापान और दक्षिण कोरिया के बीच हुए एक समझौते के तहत “कम्फर्ट वूमन” से संबंधित सभी दावों को निपटा दिया गया था। 2015 में भी दोनों देशों ने यह कहा था कि इस मुद्दे का निपटारा हो चुका है।
लेकिन जापान के इन दावों से दक्षिण कोरिया की सरकार सहमत नहीं है। जापानी सेना ने दक्षिण कोरिया पर कब्जे के दौरान दक्षिण कोरियाई लोगों से जबरन श्रम भी कराया था। उससे संबंधित विवाद भी इस समय चल रहा है, जिससे दोनों देशों के संबंध तनावपूर्ण हैं। बीते सोमवार को दक्षिण कोरिया के प्रधानमंत्री मून जाए-इन ने कहा था कि इस विवाद का हल करने के लिए जापान से बातचीत करना चाहते हैं। अब इसी बीच “कम्फर्ट वूमन” का मुद्दा भी फिर से उठ खड़ा हुआ है, जिसे चलते तनाव और बढ़ने का अंदेशा है।