फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Discussion began in the European Union on how to compensate the debts of billions of euros given to member countries

अब लौटाना होगा महामारी में यूरोपियन यूनियन से मिला पैसा, लग सकता है नया टैक्स

Fri, 30 Apr 2021 05:13 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ब्रसेल्स
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ब्रसेल्स Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 30 Apr 2021 05:13 PM IST
सार

ईयू ने महामारी और लॉकडाउन के बीच 800 अरब यूरो के ईयू रिकवरी पैकेज को मंजूरी दी थी। इसके तहत सदस्य देशों को कर्ज दिए गए। जानकारों का कहना है कि अब उनकी भरपाई के लिए टैक्स के जिस ढांचे को यूरोपीय आयोग ने मंजूरी दी है...

विज्ञापन
Discussion began in the European Union on how to compensate the debts of billions of euros given to member countries
यूरोपीय संघ - फोटो : pixabay

विस्तार

कोरोना महामारी के दौरान राहत देने में यूरोपियन यूनियन (ईयू) ने जो उदारता दिखाई, अब उसकी कीमत आखिरकार उसके सदस्य देशों के नागरिकों को ही चुकानी पड़ सकती है। ईयू में अब इस बात पर चर्चा शुरू हो गई है कि पिछले जुलाई के बाद अरबों यूरो के जो कर्ज सदस्य देशों को दिए गए, उसकी भरपाई कैसे हो। उस कर्ज की रकम को सदस्य देश कैसे खर्च कर रहे हैं, उसका ब्योरा देने की समयसीमा शुक्रवार को पूरी हो रही है। इसके साथ ही कर्ज वापसी के तरीकों पर चर्चा शुरू हो गई है। खबरों के मुताबिक इस मकसद से यूरोपीय आयोग ने कई तरह के शुल्क लगाने का एक प्रस्ताव तैयार किया है।

विज्ञापन


ईयू ने महामारी और लॉकडाउन के बीच 800 अरब यूरो के ईयू रिकवरी पैकेज को मंजूरी दी थी। इसके तहत सदस्य देशों को कर्ज दिए गए। जानकारों का कहना है कि अब उनकी भरपाई के लिए टैक्स के जिस ढांचे को यूरोपीय आयोग ने मंजूरी दी है, उसे लागू करना आसान नहीं होगा। ईयू के बजट कमिशनर जोहानेस हान ने वेबसाइट पॉलिटिको.ईयू से कहा- ‘सभी सदस्य देशों के अलग-अलग विचार हैं। इसलिए टैक्स प्रस्तावों को संतुलित रखना होगा, ताकि वह सभी देशों को मंजूर हो सके।’
विज्ञापन


अगर कुछ देश अपने नागरिकों पर नए टैक्स लगाने के लिए तैयार नहीं हुए, तो यूरोपीय आयोग ईयू से मिलने वाले उनके बजट में कटौती का प्रस्ताव रख सकता है। लेकिन जानकारों के मुताबिक इस पर सहमति बनाना भी आसान नहीं होगा। गौरतलब है कि ईयू देशों के नेताओं ने अपनी पिछली बैठक में यूरोपीय आयोग से कर्ज चुकाने के लिए राजस्व के नए स्रोतों का प्रस्ताव करने को कहा था।
विज्ञापन
विज्ञापन


लेकिन यूरोपीय आयोग की राय है कि रिकवरी पैकेज के तहत दिए गए 400 अरब डॉलर के कर्ज को चुकाने का सबसे आसान रास्ता यही है कि आयोग को पूरे ईयू क्षेत्र पर एक जैसा टैक्स लगाने का अधिकार दिया जाए। बाकी रकम अलग-अलग देश अपने खजाने से चुका सकते हैं। आयोग के कमिशनर हान ने कहा है कि इस साल से ही 15 अरब डॉलर के कर्ज की वापसी हो, तभी 2058 तक सारी रकम को ईयू देश चुका पाएंगे। खबरों के मुताबिक आयोग तीन प्रकार के टैक्स लगाने का प्रस्ताव रखने वाला है, जिसका पूरा ब्योरा जून में ईयू देशों को सौंप दिया जाएगा।

ईयू इस बात पर अड़ा हुआ है कि नए टैक्स से जो आमदनी होगी, वह सीधे ईयू के खजाने में जानी चाहिए। लेकिन इस बात पर बहुत से सदस्य देश सहमत नहीं हैँ। उनकी दलील है कि ईयू को सीधे टैक्स वसूलने की इजाजत देने का मतलब उसके अधिकार में ऐसी बढ़ोतरी होगा, जिससे वह एक पूर्ण सरकार के रूप में काम करने लगेगा। इसका मतलब वित्तीय मामलों में ईयू के सदस्य देशों के अधिकारों में और कटौती होगा।


अब ईयू का बजट सदस्य देशों के बीच आम सहमति से तय होता है। उसकी आमदनी का सबसे बड़ा हिस्सा सदस्य देशों के अनुदान से आता है। इसके अलावा कस्टम और वैट से ईयू को आमदनी होती है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed