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Sri Lanka Crisis: रानिल विक्रमसिंघे नियुक्त करेंगे प्रधानमंत्री, दिनेश गुनावर्धने होंगे श्रीलंका के नए पीएम
Thu, 21 Jul 2022 07:03 PM IST
Amit Mandal
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
Published by: Amit Mandal
Updated Thu, 21 Jul 2022 07:03 PM IST
सार
नवनियुक्त राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे दिनेश गुनावर्धने को अगला प्रधानमंत्री नियुक्त करने जा रहे हैं। भारी विरोध के बाद महिंदा राजपक्षे पीएम पद से इस्तीफा दे चुके हैं।
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Ranil Wickramasinghe
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
दिनेश गुनावर्धने संकटग्रस्त श्रीलंका के नए प्रधानमंत्री होंगे। समाचार एजेंसी रायटर्स के मुताबित, नवनियुक्त राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे दिनेश गुनावर्धने को अगला प्रधानमंत्री नियुक्त करने जा रहे हैं। इससे पहले महिंदा राजपक्षे देश के प्रधानमंत्री थे लेकिन श्रीलंका में भारी जनविरोध के बाद उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था। फिलहाल वह किसी अज्ञात स्थान पर रह रहे हैं।
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विक्रमसिंघे चुने गए राष्ट्रपति
गोतबाया राजपक्षे के देश छोड़कर भागने और फिर इस्तीफा देने के बाद विक्रमसिंघे को कार्यवाहक राष्ट्रपति बनाया गया था। बाद में वह संसद द्वारा राष्ट्रपति चुने गए। देश के संविधान के अनुसार संसद द्वारा चुने जाने वाले वे पहले श्रीलंकाई राष्ट्रपति हैं। उनसे पहले स्वर्गीय डी बी विजेतुंगा मई 1993 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रेमदासा के निधन के बाद निर्विरोध निर्वाचित हुए थे।
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225 सदस्यीय श्रीलंका की संसद ने 20 जुलाई को विक्रमसिंघे को नया राष्ट्रपति चुना था। उन्हें 134 वोट मिले, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी और असंतुष्ट सत्तारूढ़ दल के नेता दुल्लास अल्हाप्परुमा को 82 वोट मिले। त्रिकोणीय मुकाबले में वामपंथी जनता विमुक्ति पेरामुना के नेता अनुरा कुमारा दिसानायके को सिर्फ तीन वोट मिले थे।
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जल्द बनाएंगे मंत्रिमंडल
विक्रमसिंघे के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती श्रीलंका को उसके आर्थिक संकट से बाहर निकालने और महीनों के बड़े विरोध के बाद कानून व्यवस्था बहाल करने की है। डेली मिरर अखबार के अनुसार राष्ट्रपति विक्रमसिंघे अगले कुछ दिनों में 20-25 सदस्यों का एक मंत्रिमंडल बनाएंगे।
विक्रमसिंघे छह बार देश के प्रधानमंत्री रह चुके हैं। लेकिन राष्ट्रपति पद पर वे पहली बार आए हैं। पिछले आम चुनाव में उनकी पार्टी को संसद में सिर्फ एक सीट मिली थी। इसके बावजूद सरकार विरोधी आंदोलन से बढ़ते दबाव के बीच गोतबाया राजपक्षे ने पिछले छह मई को उन्हें प्रधानमंत्री नियुक्त किया। आम धारणा रही है कि प्रधानमंत्री के रूप में विक्रमसिंघे आर्थिक संकट हल करने की दिशा में एक भी ठोस पहल नहीं कर सके।