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Digital Advertising : अमेरिका बना रहा नया कानून, गूगल-फेसबुक के डिजिटल विज्ञापन कारोबार को बांटने की कोशिश
Tue, 24 May 2022 04:53 AM IST
योगेश साहू
अमर उजाला रिसर्च डेस्क, नई दिल्ली।
अमर उजाला रिसर्च डेस्क, नई दिल्ली।
Published by: योगेश साहू
Updated Tue, 24 May 2022 04:53 AM IST
सार
गूगल के उदाहरण से समझें, वह चीजों की ऑनलाइन कीमतें तय करवाता है, उनकी नीलामी करता है, इसका विज्ञापन भी दिखाता है। साथ ही विभिन्न कंपनियों के उत्पादन बिकवाता है और विज्ञापन खरीदने व बेचने में दूसरी कंपनियों को मदद भी करता है। अगर नया कानून बना तो उसे यह सारे काम अलग अलग कंपनियों में बांटने होंगे।
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गूगल फेसबुक
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
गूगल, फेसबुक सहित बड़ी टेक कंपनियों के विज्ञापन कारोबार को तोड़ने के लिए अमेरिकी सांसदों ने सीनेट में नया विधेयक रखा है। यह कानून बना तो कई प्रकार के डिजिटल विज्ञापन देने के लिए ‘एक्सचेंज’ चला रहीं और सालाना 2,000 करोड़ डॉलर यानी करीब 1.55 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा कमाई कर रहीं टेक कंपनी को अपना कारोबार कई कंपनियों में तोड़ना पड़ सकता है।
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गूगल और फेसबुक सहित बड़ी टेक व सोशल मीडिया कंपनियों की 80 से 90 प्रतिशत कमाई डिजिटल विज्ञापनों से होती है। अकेले गूगल ने वित्त वर्ष 2021 में 20,949 करोड़ डॉलर कमाए थे। ‘डिजिटल विज्ञापन में पारदर्शिता और प्रतियोगिता’ नाम से लाए गए इस विधेयक को डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकन दोनों सांसदों ने समर्थन दिया है। अमेरिका के 16 राज्यों से इसे समर्थन मिल रहा है। दूसरी ओर गूगल का दावा है कि यह कानून बना तो न केवल यूजर्स, कंपनियों और कंटेंट बनाने वालों को नुकसान होगा, बल्कि निजता पर भी संकट आ सकता है।
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ऐसा कानून क्यों?
गूगल और फेसबुक पर आरोप लगे हैं कि वे कई सालों से कारोबारी गतिविधियों में अपने एकाधिकार का दुरुपयोग कर रहे हैं। डिजिटल विज्ञापनों में गलत नीतियों से प्रतिस्पर्धा को नुकसान कर रहे हैं।
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कानून बना तो यह होगा
गूगल के उदाहरण से समझें, वह चीजों की ऑनलाइन कीमतें तय करवाता है, उनकी नीलामी करता है, इसका विज्ञापन भी दिखाता है। साथ ही विभिन्न कंपनियों के उत्पादन बिकवाता है और विज्ञापन खरीदने व बेचने में दूसरी कंपनियों को मदद भी करता है। अगर नया कानून बना तो उसे यह सारे काम अलग अलग कंपनियों में बांटने होंगे। फेसबुक और कई अन्य कंपनियों पर भी इसका असर होगा।