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तालिबान का उप प्रधानमंत्री: पाकिस्तान की जेल में कभी आठ साल बंद रहा था मुल्ला गनी बरादर, अब अफगान सरकार में नंबर-2
Tue, 07 Sep 2021 09:33 PM IST
सुरेंद्र जोशी
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Tue, 07 Sep 2021 09:33 PM IST
सार
अफगानिस्तान की नई तालिबान सरकार में उप प्रधानमंत्री बना मुल्ला गनी बरादर को 2010 में पाकिस्तान में गिरफ्तार किया गया था। वह आठ साल जेल में बंद रहा था।
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मुल्ला याकूब, सिराजुद्दीन हक्कानी, हेबतुल्लाह अखुंदजादा और मुल्ला बरादर।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
अफगानिस्तान का उप प्रधानमंत्री बनाया गया मुल्ला अब्दुल्ल गनी बरादर तालिबान के शीर्ष कमांडर रहे मुल्ला उमर का करीबी है। अमेरिकी सेना की वापसी के समझौते पर उसी ने दस्तखत किए थे।
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मुल्ला बरादर का पूरा नाम मुल्ला अब्दुल गनी बरादर है। उसका बचपन भी तालिबान की जन्मस्थली कंधार में बीता है। कंधार ही वह जगह है, जहां तालिबान जैसे संगठन की नींव पड़ी। 1970 के दशक में जब सोवियत सेना ने मुल्क पर कब्जा किया, तब से ही वो किसी न किसी रूप में सक्रिय है। बरादर तालिबान के पूर्व शीर्ष कमांडर मुल्ला उमर का करीबी रह चुका है। 2010 में उसे पाकिस्तान में गिरफ्तार भी किया गया था। बरादर तालिबान के राजनीतिक और लोकतांत्रिक मामले देखता है।
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तालिबान का दूसरे नंबर का नेता है बरादर
मुल्ला अब्दुल गनी बरादर तालिबान का दूसरे नंबर का नेता है। 1994 में तालिबान के गठन में वह भी शामिल था। उसने 1996 से 2001 तक जब तालिबान ने अफगानिस्तान पर राज किया, तब मुल्ला बरादर की अहम भूमिका थी, लेकिन 2001 में अमेरिका ने जब अफगानिस्तान पर हमला किया तब वह अफगानिस्तान छोड़कर पाकिस्तान भाग गया था।
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दोहा में तालिबान का दफ्तर संभाला
मुल्ला बरादर को 2010 में कराची से गिरफ्तार किया गया था। वह बिना पाकिस्तान को विश्वास में लिए अफगानिस्तान की सरकार से बात करने की कोशिश में था। जब 2018 में अमेरिका ने तालिबान के साथ बातचीत की कोशिशें तेज की, तब मुल्ला बरादर को छोड़ा गया। उसके बाद से मुल्ला बरादर ने कतर के दोहा में तालिबान के राजनीतिक दफ्तर की कमान संभाली। उसने कतर में अमेरिका के साथ बातचीत में अहम भूमिका निभाई थी। मुल्ला बरादर पिछले माह तालिबान के अफगानिस्तान पर कब्जे के बाद ही काबुल लौटा।