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ग्रीनलैंड पर ट्रंप की बुरी नजर: मंशा देख सचेत हुआ डेनमार्क, मार्को रुबियो से की बैठक की मांग; क्या है रणनीति?

Thu, 08 Jan 2026 01:56 AM IST
शुभम कुमार वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोपेनहेगन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोपेनहेगन Published by: शुभम कुमार Updated Thu, 08 Jan 2026 01:56 AM IST
सार

अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप की ग्रीनलैंड को खरीदने की पुरानी योजना ने यूरोप में नई चिंता पैदा कर दी है। डेनमार्क और ग्रीनलैंड ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से बैठक मांगी है। ट्रंप का कहना है कि चीन और रूस की बढ़ती धमकियों के बीच अमेरिका को इस रणनीतिक द्वीप पर नियंत्रण चाहिए, जबकि यूरोपीय नेता इसे नाटो और संप्रभुता के लिए खतरा मान रहे हैं।

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Denmark Greenland seek talks with Marco Rubio over US interest in taking island News In Hindi
अमेरिका-ग्रीनलैंड - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

डेनमार्क का स्वशासित क्षेत्र और रणनीतिक रूप से आर्कटिक में स्थित ग्रीनलैंड को अपनाने की मंशा अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की आज की नहीं है। दूसरी ओर वेनेजुएला पर कार्रवाई और फिर वहां के अपदस्थ राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद ट्रंप की ये मंशा और ज्यादा तेज हो गई है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए अब डेनमार्क और ग्रीनलैंड ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से बैठक की मांग की है। इसका बड़ा कारण यह है कि ट्रंप प्रशासन ने हाल के दिनों में कई बार ग्रीनलैंड पर कब्जा करने के अपने इरादे को बार-बार दोहराया है। 

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राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि अमेरिका को दुनिया के सबसे बड़े इस द्वीप पर नियंत्रण रखना चाहिए ताकि चीन और रूस जैसी ताकतों की बढ़ती धमकियों से निपटा जा सके। वहीं मार्को रुबियो ने सांसदों से कहा कि प्रशासन का इरादा अंततः ग्रीनलैंड को अपनाने का है, न कि सैन्य बल के इस्तेमाल का।

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ट्रंप की ग्रीनलैंड को खरीदने की मंशा पुरानी
बता दें कि ट्रंप ने ग्रीनलैंड को खरीदने की बात अपने पहले कार्यकाल से की है। इस योजना से नाटो और यूरोपीय देशों के बीच तनाव बढ़ गया है। डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेत्ते फ्रेडरिकसन ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की कोशिश की, तो यह नाटो के अंत जैसा होगा। वहीं फ्रांस, जर्मनी, इटली, पोलैंड, स्पेन और यूके ने भी बयान जारी कर कहा कि ग्रीनलैंड उसके लोगों का है।

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ट्रंप की मंशा वैश्विक नियमों को कर सकता है कानून
दूसरी ओर विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका का अधिग्रहण ग्रीनलैंड या डेनमार्क के लोगों को नुकसान पहुंचाने जैसा नहीं होगा, लेकिन यह वैश्विक नियमों और कानूनों के प्रति विश्वास को कमजोर कर सकता है।डेनमार्क के संसद ने पिछले साल अमेरिकी सैन्य अड्डों की अनुमति दी थी और यह समझौता 2023 में बाइडन प्रशासन के साथ हुआ था। हालांकि, अगर अमेरिका ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की कोशिश करता है, तो डेनमार्क इसे रद्द कर सकता है।


ग्रीनलैंड पर वेनेजुएला जैसी कार्रवाई करेगा अमेरिका?
फ्रांस के विदेश मंत्री जां-नोएल बारोट ने कहा कि रुबियो ने उन्हें बताया कि अमेरिका ग्रीनलैंड में वेनेजुएला जैसी सैन्य कार्रवाई नहीं करेगा। गौरतलब है कि अधिकांश रिपब्लिकन ट्रंप के बयान का समर्थन कर रहे हैं, लेकिन कुछ दोनों दलों के अमेरिकी सांसदों ने इसे आलोचना की। उन्होंने कहा कि ग्रीनलैंड बेचने के लिए नहीं है और अमेरिका को डेनमार्क की संप्रभुता का सम्मान करना चाहिए।

ये भी पढ़ें:- Jaishankar: 'भारत और यूरोप वैश्विक राजनीति-अर्थव्यवस्था में स्थिरता ला सकते हैं', फ्रांस में बोले विदेश मंत्री

वैश्विक नियम और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर पड़ सकता है असर
वहीं विश्लेषकों का कहना है कि ट्रंप की योजना केवल राजनीतिक और रणनीतिक संदेश देती है, लेकिन इसके कारण वैश्विक नियम और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर असर पड़ सकता है। इस पूरे मामले ने यूरोप और अमेरिका के बीच भरोसे और गठबंधन में नई चुनौतियां पैदा कर दी हैं।

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