अमेरिका: फंस गया जो बाइडन का एजेंडा, चौड़ी हुई डेमोक्रेटिक पार्टी में फूट
फिलिबस्टर नियम के लागू होने पर किसी प्रस्ताव को सीनेट में पारित कराने के लिए 60 वोट अनिवार्य हो जाते हैं। कोई भी सदस्य किसी प्रस्ताव पर फिलबस्टर नियम लागू करने का नोटिस दे सकता है। रिपब्लिकन पार्टी जो बाइडन के 2.3 ट्रिलियन डॉलर के इन्फ्रास्ट्रक्चर पैकेज का भी विरोध कर रही है...
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डेमोक्रेटिक पार्टी के सीनेटर जो मेंचिन के खुल कर अपनी पार्टी की तरफ से पेश- फॉर द पीपुल एक्ट का समर्थन करने से इनकार कर देने से सत्ताधारी की फूट और चौड़ी हो गई है। फॉर द पीपुल एक्ट का विधेयक अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव में पास हो चुका है। इसका मकसद रिपब्लिकन पार्टी के बहुमत वाले राज्यों में पिछले नंवबर के बाद से बनाए गए मतदान संबंधी कानूनों को बेअसर करना है। रिपब्लिकन पार्टी कई राज्यों में ऐसे कानून बना चुकी है, जिससे वहां अल्पसंख्यक और कमजोर तबके के मतदाताओं के लिए वोट डालना पहले की तुलना में मुश्किल हो जाएगा। ये तबके आम तौर पर डेमोक्रेटिक पार्टी के समर्थक समझे जाते हैं।
मेंचिन पहले भी राष्ट्रपति जो बाइडन के आर्थिक कार्यक्रम के कुछ पहलुओं का विरोध कर चुके हैं। संसद के ऊपरी सदन 100 सीनेट में डेमोक्रेटिक पार्टी के पास 50 सदस्य ही हैं। उप राष्ट्रपति के अतिरिक्त वोट से वह विधेयकों को पारित कराने की स्थिति में है, लेकिन अगर पार्टी का एक भी सदस्य पार्टी लाइन से अलग हो जाए, तो वह कोई बिल पास नहीं करा सकती। जो मेंचिन ने रविवार को एक अखबार में लेख लिख कर कहा कि फॉर द पीपुल एक्ट एक दलगत विधेयक है। उन्होंने लिखा- ‘अगर सच कहूं, तो मेरी दलील यह होगी कि मतदान और चुनाव सुधार अगर दलगत आधार पर किए गए, तो उससे देश में दलगत विभाजन कायम रहेगा।’ इसी लेख में मेंचिन ने ये भी दोहराया कि वे ऐसे किसी प्रस्ताव को पक्ष में वोट नहीं डालेंगे, जिसका मकसद सीनेट के फिलबस्टर नियम को खत्म करना हो।
फिलिबस्टर नियम के लागू होने पर किसी प्रस्ताव को सीनेट में पारित कराने के लिए 60 वोट अनिवार्य हो जाते हैं। कोई भी सदस्य किसी प्रस्ताव पर फिलबस्टर नियम लागू करने का नोटिस दे सकता है। रिपब्लिकन पार्टी जो बाइडन के 2.3 ट्रिलियन डॉलर के इन्फ्रास्ट्रक्चर पैकेज का भी विरोध कर रही है। उसने इससे संबंधित प्रस्ताव पर फिलिबस्टर लागू करने का एलान किया है। इसे देखते हुए डेमोक्रेटिक पार्टी का एक धड़ा ये मांग कर रहा है कि राष्ट्रपति अपने विशेष अधिकार के तहत इस नियम को खत्म करने की पहल करे और सदन साधारण बहुमत से उसे मंजूरी दे दे।
मेंचिन का ये लेख छपने के बाद डेमोक्रेटिक पार्टी के अंदर और प्रोग्रेसिव दायरे में उनके प्रति गुस्सा भड़क उठा है। कुछ कार्यकर्ताओं ने उन्हें ‘गद्दार’ तक कहा है। उदारवादी कार्यकर्ता जॉर्ज तकेई ने एक ट्विट में कहा कि मेंचिन ने प्रो पीपुल एक्ट में पलीता लगा दिया है। सोशलिस्ट नेता बर्नी सैंडर्स ने एक ट्विट में कहा कि जब रिपब्लिकन पार्टी ने डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में धनी लोगों के लिए एक ट्रिलियन डॉलर की टैक्स छूट देने का प्रस्ताव पारित किया था, तब एक भी डेमोक्रेट सदस्य ने उसका समर्थन नहीं किया था। लेकिन तब किसी ने ये नहीं कहा कि ऐसे कदम द्विपक्षीय सहमति से उठाए जाने चाहिए। उन्होंने सवाल कि जिन तरीकों से रिपब्लिकन पार्टी ने वो काम किया, उनके ही जरिए कामकाजी तबकों के हित में कदम क्यों नहीं उठाए जा सकते? उधर 100 से ज्यादा प्रगतिशील संगठनों ने एक बयान जारी कर राष्ट्रपति बाइडन से फिलिबस्टर नियम को खत्म करने की मांग की है।
लेकिन विश्लेषकों ने ध्यान दिलाया है कि अगर फिलबस्टर नियम खत्म हो भी जाए, लेकिन डेमोक्रेटिक पार्टी के सीनेटर एकजुट नहीं रहे, तो जो बाइडन के लिए अपना कोई भी एजेंडा पूरा करना लगभग असंभव हो जाएगा। सीनेट में जो मेंचिन के अलावा एक अन्य डेमोक्रेटिक सीनेटर क्रिस्टेन साइनेमा बाइडन के प्रगतिशील आर्थिक एजेंडे का विरोध करती रही हैं। विश्लेषकों ने ध्यान दिलाया है कि मौजूदा स्थिति में जो बाइडन के तमाम विधायी एजेंडे गतिरोध का शिकार होते दिख रहे हैं।