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Democracy Summit: डेमोक्रेसी समिट पर तेवर दिखाने के बाद अब सफाई देते थक नहीं रहा है पाकिस्तान
Thu, 16 Dec 2021 02:01 PM IST
अजय सिंह
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद।
Published by: अजय सिंह
Updated Thu, 16 Dec 2021 02:01 PM IST
सार
पाकिस्तान के अखबार एक्सप्रेस ट्रिब्यून में छपी रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने अमेरिका की उप विदेश मंत्री वेंडी शरमन को फोन कर इस बारे में अपने देश की सफाई पेश की है।
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इमरान खान (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन का डेमोक्रेसी समिट का न्योता ठुकराने के बाद पाकिस्तान में पैदा हुई बेचैनी थमने का नाम नहीं ले रही है। पाकिस्तान सरकार ने अब इस मामले में सीधे अमेरिका से बात कर अपनी सफाई पेश की है। जो बाइडन ने पिछले 9 और 10 दिसंबर को लोकतांत्रिक देशों के शिखर सम्मेलन (समिट ऑफ डेमोक्रेसीज) का आयोजन किया था। इसके लिए जिन 100 से ज्यादा देशों को आमंत्रित किया गया, उनमें पाकिस्तान भी था। लेकिन पाकिस्तान की इमरान खान सरकार ने तब अमेरिकी आमंत्रण को ठुकरा दिया था।
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अब अपने ताजा स्पष्टीकरण में पाकिस्तान ने कहा है कि डेमोक्रेसी समिट से बाहर रहने का यह मतलब नहीं है कि वह किसी दूसरे गुट में शामिल हो गया है। इसका यह मतलब भी नहीं है कि अमेरिका के साथ द्विपक्षीय संबंधों में पाकिस्तान की कोई रुचि नहीं है। पाकिस्तान के अखबार एक्सप्रेस ट्रिब्यून में छपी रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने अमेरिका की उप विदेश मंत्री वेंडी शरमन को फोन कर इस बारे में अपने देश की सफाई पेश की है।
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जब पाकिस्तान ने डेमोक्रेसी समिट में शामिल ना होने का एलान किया, तब आम समझ यही बनी कि ऐसा इमरान खान सरकार ने चीन के दबाव में आकर किया है। अमेरिका ने चीन को इस सम्मेलन में आमंत्रित नहीं किया था। इसके बदले बाइडन प्रशासन ने इसमें ताइवान को आमंत्रित किया, जिससे चीन भड़क उठा था। अमेरिकी आमंत्रण को लेकर पाकिस्तान में असमंजस कई दिनों तक चला। आखिरकार जब पाकिस्तान सरकार ने उसे ठुकराने का फैसला किया, तो चीन ने उसका स्वागत किया था।
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विश्लेषकों के मुताबिक तब से पाकिस्तान यह सफाई देने में जुटा हुआ है कि उसने ये फैसला चीन या किसी दूसरे देश के दबाव में आकर नहीं लिया था। इसी कोशिश में पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने एक सार्वजनिक बयान जारी किया, जिसमें कहा गया- पाकिस्तान अमेरिका से अपने संबंधों को बहुत महत्त्व देता है और वह उन संबंधों का और विस्तार करना चाहता है।
अब ये सामने आया है कि पाकिस्तान सरकार सिर्फ ऐसा बयान जारी कर चिंता मुक्त नहीं हुई। बल्कि इसे बेहतर समझा गया कि विदेश मंत्री खुद अमेरिकी अधिकारियों से बात करेँ। इसलिए कुरैशी ने अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन से बात करने की कोशिश की। मगर उनका समय ना मिलने के कारण उन्होंने उप विदेश मंत्री से बात की।
पाकिस्तान सरकार के अधिकारियों ने एक्सप्रेस ट्रिब्यून को बताया कि फोन पर हुई बातचीत के दौरान कुरैशी ने डेमोक्रेसी समिट में पाकिस्तान के भाग ना लेने के कारणों का जिक्र किया। उन्होंने अमेरिका को भरोसा दिया कि पाकिस्तान बड़े देशों के टकराव में किसी का पक्ष नहीं लेगा। इस्लामाबाद में कुरैशी ने पत्रकारों से कहा कि अमेरिका से हुई बातचीत से वे संतुष्ट हैं।
कुरैशी ने कहा- ‘पाकिस्तान ने अमेरिका से अनुरोध किया है कि वह उसे कठिन स्थिति में ना डाले। पाकिस्तान भू-राजनीति से हट कर भू-आर्थिकी की तरफ जाने का इच्छुक है। अमेरिका इस बदलाव में पाकिस्तान की मदद कर सकता है।’ विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका और चीन के बीच बढ़ता तनाव पाकिस्तान के लिए गहरी चिंता का विषय बन गया है। वह दोनों में से किसी एक देश से अपने संबंध बिगाड़ना नहीं चाहता। लेकिन ऐसा करना लगातार मुश्किल होता जा रहा है।