इमरान के इस्तीफे की मांग तेज, ‘आजादी मार्च’ पर वार्ता बेनतीजा
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पाकिस्तान में प्रधानमंत्री इमरान खान के खिलाफ विरोध के सुर तेज होते जा रहे हैं। राजधानी इस्लामाबाद में 31 अक्तूबर को प्रस्तावित सरकार विरोधी ‘आजादी मार्च’ ने इमरान सरकार को मुश्किल में डाल दिया है। इमरान के इस्तीफे की मांग को लेकर मौलाना फजलुर्रहमान की पार्टी जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (जेयूआई-एफ) की प्रस्तावित आजादी मार्च के मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच महत्वपूर्ण वार्ता शुक्रवार को बिना किसी निष्कर्ष के खत्म हो गई। विपक्ष इमरान के इस्तीफे की मांग पर अड़ा हुआ है।
सरकार की ओर रक्षा मंत्री परवेज खट्टक ने इस बैठक में हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि पहले चरण की वार्ता लगभग दो घंटे चली। बहुत चर्चा के बाद भी कोई महत्वपूर्ण निष्कर्ष आज के बारे में नहीं निकल सका, लेकिन यह बातचीत जारी रहेगी। विपक्षी खेमे से जेयूआई-एफ के नेता अकरम खान दुर्रानी बैठक में शामिल हुए।
उन्होंने कहा कि बातचीत में कोई निष्कर्ष नहीं निकल सका। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों पक्षों के बीच यह बातचीत दुर्रानी के घर पर रात लगभग 10.30 बजे दो चरणों में हुई। विपक्ष सरकार से बात करने के लिए इमरान की बुधवार को उस घोषणा के बाद सहमत हो गया था कि वे कानून के दायरे में किए जाने वाले मार्च की अनुमति देंगे।
इमरान की पार्टी पर धांधली का आरोप
जेयूआई-एफ प्रमुख मौलाना फजलुर्रहमान का आरोप है कि जुलाई, 2018 में हुए आम चुनाव में इमरान खान के नेतृत्व वाली पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) की मदद करने के लिए धांधली की गई थी। उन्होंने संवाददाताओं से बात करते हुए इमरान खान से इस्तीफे की मांग दोहराई। उन्होंने सरकार के खिलाफ 31 अक्तूबर को राजधानी इस्लामाबाद में आजादी मार्च निकालने का आह्वान किया है। इस विरोध मार्च को नवाज शरीफ की पीएमएल (एन) समेत तमाम विपक्षी दलों का समर्थन हासिल है।