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US: हूतियों पर हमले की योजना लीक मामले की जांच एफबीआई से कराने की मांग, ट्रंप बोले- उनके पास और भी बहुत काम

Thu, 27 Mar 2025 11:18 AM IST
बशु जैन वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: बशु जैन Updated Thu, 27 Mar 2025 11:18 AM IST
सार

यमन में हूतियों पर हमले की योजना की जानकारी लीक होने के बाद अमेरिका में सियासत तेज हो गई है। सांसदों ने इस मामले की जांच एफबीआई से कराने की मांग की है। वहीं राष्ट्रपति ट्रंप ने मामले की जांच एफबीआई से कराने से इनकार कर दिया है। 

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Demand for FBI to investigate the leaked plan of attack on Houthis, Trump said - he has a lot more work
डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी राष्ट्रपति - फोटो : वीडियो ग्रैब/एएनआई

विस्तार

यमन स्थित हूती विद्रोहियों पर हमले की सूचना लीक होने के मामले में ट्रंप सरकार घिर गई है। डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसदों ने इस मामले की जांच देश की सबसे बड़ी कानून प्रवर्तन एजेंसी एफबीआई से कराने की मांग की है। इसे लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि यह एफबीआई से जुड़ा मामला नहीं है। जांच एजेंसी के पास और भी बड़े काम हैं। 
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यमन स्थित हूती विद्रोहियों के ठिकानों पर हमले के लिए अमेरिकी अधिकारियों ने मैसेजिंग एप सिग्नल पर एक ग्रुप बनाया था। वाल्ट्ज ने इस ग्रुप को बनाने के बाद इसमें ट्रंप प्रशासन के 18 शीर्ष अधिकारियों को जोड़ा। इनमें उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विदेश मंत्री मार्को रूबियो, राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गबार्ड व केंद्रीय खुफिया एजेंसी निदेशक जॉन रैटक्लिफ शामिल थे। इस ग्रुप में द अटलांटिक मैग्जीन के संपादक जेफ्री गोल्डबर्ग भी जुड़े हुए थे। उन्होंने यमन में हूतियों पर हमले की अमेरिकी योजना का पूरा खुलासा कर दिया। इसके बाद डेमोक्रेटिक सांसद मामले की जांच की मांग कर रहे हैं। 
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सीनेट और सदन में डेमोक्रेटिक सांसदों ने एफबीआई के निदेशक काश पटेल को घेरा। सांसदों ने सवाल उठाया कि क्या कानून प्रवर्तन एजेंसी इसकी जांच करेगी? हालांकि इसका काश पटेल ने कोई जवाब नहीं दिया। उन्होंने कहा कि वह इस चैट का हिस्सा नहीं थे। मामले में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जोर देकर कहा कि यह एफबीआई का मामला नहीं है। एफबीआई के पास और भी कई मामलों की जांच पहले से है। 

अमेरिका के जासूसी अधिनियम के मुताबिक एफबीआई और न्याय विभाग दशकों से राष्ट्रीय रक्षा जानकारी के दुरुपयोग को नियंत्रित करने के मामलों की जांच करते रहे हैं। सांसदों का कहना है कि न्याय विभाग भी इस मामले की जांच कर सकता है। मगर इसे लेकर भी न्याय विभाग ने अपना रुख साफ नहीं किया है। 

न्याय विभाग के पूर्व अभियोजक माइकल ज्वेइबैक ने कहा कि हाल के वर्षों में कई हाई-प्रोफाइल हस्तियों को ऐसे मामले में जांच के दायरे में लाया गया है। लेकिन सार्वजनिक अधिकारियों के लिए आपराधिक आरोपों से बचने या  सजा से बचने के भी उदाहरण सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व जांच के मामलों में कई निर्धारित मानक थे। इसमे देखा जाता था कि वे किस प्रकार के खुलासे करने जा रहे हैं।

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इनके खिलाफ भी हुए ऐसे मामले
हिलेरी क्लिंटन:
2016 में जब हिलेरी क्लिंटन जब डेमोक्रेटिक राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार थीं। उन के खिलाफ ओबामा प्रशासन में विदेश मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान सुविधा के लिए निजी ईमेल सर्वर का उपयोग करने का मामला सामने आया था। मामले की जांच 2015 में शुरू की गई तो सामने आया कि क्लिंटन जानकारी को संभालने में बेहद लापरवाह थीं लेकिन जांच में उन पर कोई आरोप नहीं लगा। ऐसा इसलिए क्योंकि अधिकारी साबित नहीं कर सके कि क्लिंटन का इरादा कानून तोड़ने का था। उन्हें पता था कि वह और उनके सहयोगी जिस जानकारी के बारे में संवाद कर रहे थे वह वर्गीकृत थी। इस फैसले का रिपब्लिकन ने मजाक उड़ाया था।

डेविड पेट्रायस: इसके बाद पूर्व सीआईए निदेशक डेविड पेट्रायस को वर्गीकृत जानकारी का खुलासा करने के लिए 2015 में दो साल की परिवीक्षा पर सजा सुनाई गई थी। उन्होंने कहा था कि एक किताब में उन्होंने गुप्त गुर्गों के नाम, गठबंधन युद्ध की रणनीति और राष्ट्रपति बराक ओबामा और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के साथ पेट्रायस की चर्चाओं के बारे में नोट्स दिए थे। 

जेफरी स्टर्लिंग: सीआईए के पूर्व अधिकारी जेफरी स्टर्लिंग को एक रूसी मध्यस्थ के माध्यम से ईरानियों को परमाणु ब्लूप्रिंट देकर ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को विफल करने के लिए एक गुप्त मिशन के विवरण एक रिपोर्टर को लीक करने का दोषी ठहराया गया था। उन्हें 2015 में 3 1/2 साल जेल की सजा सुनाई गई थी। विवरण को पत्रकार जेम्स राइजन ने अपनी 2006 की पुस्तक स्टेट ऑफ वॉर में प्रकाशित किया था। स्टर्लिंग पर 2010 में आरोप लगाया गया था, लेकिन मुकदमे में सालों तक देरी हुई। क्योंकि राइजन को गवाही देने के लिए मजबूर करने को लेकर कानूनी पेंच फंस गया था।

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