Defence: प्रधानमंत्री मोदी और रक्षा मंत्री के 'मेक इन इंडिया' के सपने को कौन करना चाहता है कमजोर?
Defence: सूत्र बताते हैं कि आपात योजना के तहत तोप की खरीद को तोपखाना यूनिट की अपरिहार्य आवश्यकता बताकर आरएफपी (रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल) निकालने की तैयारी चल रही है। बताते हैं विदेशी तोपों में सेना के कुछ अफसर इस्राइल के एल्बिट सिस्टम को लेने के पक्ष में हैं...
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रक्षा क्षेत्र में प्रधानमंत्री मोदी के आत्मनिर्भर भारत की सोच के तहत मेक इन इंडिया के सपने को साकार करने के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह प्रतिबद्ध हैं। मेक इन इंडिया को मजबूती देने के लिए रक्षा मंत्रालय ने तोपों की खरीद प्रक्रिया को आयात की सूची से बाहर कर दिया था। लेकिन सेना मुख्यालय और रक्षा मंत्रालय की विदेशी हथियारों की लॉबी ने इसे कमजोर करने की तैयारी कर ली है। प्राप्त जानकारी के अनुसार सेना मुख्यालय के कुछ जनरल भी चाहते हैं कि आपात खरीद योजना के तहत 20 तोपों की खरीद प्रक्रिया को आरंभ करके मेक इंडिया के तहत लगे प्रतिबंध से बचा जा सकता है।
इस्राइल के एल्बिट सिस्टम को लेने के पक्ष में
सूत्र बताते हैं कि आपात योजना के तहत तोप की खरीद को तोपखाना यूनिट की अपरिहार्य आवश्यकता बताकर आरएफपी (रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल) निकालने की तैयारी चल रही है। बताते हैं विदेशी तोपों में सेना के कुछ अफसर इस्राइल के एल्बिट सिस्टम को लेने के पक्ष में हैं। इस तरह से ग्लोबल टेंडर के जरिए पिछले दरवाजे से सेना में विदेशी तोप की इंट्री हो जाएगी और धीरे-धीरे विदेशी हथियारों की लॉबी अपनी तोप खरीद प्रक्रिया का दरवाजा खोलने के अभियान में सफल हो जाएगी। हालांकि सेना मुख्यालय की यह योजना डीआरडीओ के वैज्ञानिकों को हजम नहीं हो रही है। डीआरडीओ के एक पूर्व वैज्ञानिक ने कहा कि सैन्य बलों में विदेशी हथियारों की एक मजबूत लॉबी है। यह लॉबी 2014 में प्रधानमंत्री मोदी के सत्ता में आने के बाद काफी कमजोर पड़ गई थी, लेकिन लग रहा है कि धीरे-धीरे इसने भी अपना रास्ता खोजना शुरू कर दिया है।
वहीं एक अन्य वैज्ञानिक का कहना है कि अब भारत के पास तोप की तकनीक भी है और एडवांस आर्टिलरी टोड गन (एटीएजी) के रूप में शानदार विकसित तोप भी है। सेना ने इसका परीक्षण किया है और इसके नतीजे बहुत अच्छे रहे हैं। सूत्र का कहना है कि सेना डीआरडीओ को बताए कि उसे किस तरह की तोप चाहिए। डीआरडीओ अगले चार-पांच साल में उसे इससे भी अधिक उन्नत तकनीक देने में सक्षम हैं।
प्राइवेट पार्टनर के साथ मिलकर भारत में बनाई गई है एटीएजी
डीआरडीओ के वैज्ञानिकों से प्राप्त जानकारी के अनुसार रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन द्वारा विकसित एटीएजी 7वें जोन में फायर करने वाली 155एमएम और 52 कैलिबर की एक मात्र तोप है। डीआरडीओ के वैज्ञानिकों ने इसे विकसित किया है और इसका निर्माण देश की रक्षा क्षेत्र की अग्रणी कंपनी टाटा डिफेंस और भारत फोर्ज (कल्याणी समूह) के साथ मिलकर तैयार किया गया है। बताते हैं करीब 19 टन के वजन वाली इस तोप के परीक्षण के दौरान नतीजे भी शानदार आए हैं। वहीं सेना मुख्यालय के सैन्य अफसर अभी इस मामले में कुछ भी कहने से बच रहे हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि सेना मेक इन इंडिया कार्यक्रम का आदर करती है। जहां तक उन्हें पता चला है कि डीआरडीओ द्वारा विकसित की गई तोप के तैयार होकर सेना को मिलने में अभी समय लग रहा है। जबकि इसके सामानांतर आर्टिलरी यूनिट चुनौतियों का सामना कर रही है।
15 दिन में आएगा ग्लोबल टेंडर
सेना मुख्यालय इसी महीने के अंत तक 20 तोप लेने की तैयारी कर रहा है। बताते हैं जल्द ही इसके लिए ग्लोबल टेंडर निकाले जाने की योजना है। सूत्र बताते हैं कि डीआरडीओ की 18-19 टन वजनी तोप के मुकाबले सेना अपने टेंडर में कम वजन के तोप के मानक को रख सकती है। ताकि इसकी खरीद प्रक्रिया से डीआरडीओ द्वारा विकसित तोप बाहर हो सके। डीआरडीओ के एक पूर्व प्रवक्ता नाम न छापने की शर्त पर कहते हैं कि एटीएजी को भी मुख्य युद्धक टैंक अर्जुन ही बना देने की तैयारी है। देखना है कि रक्षा मंत्री और प्रधानमंत्री मेक इन इंडिया के सपने को साकार करने के लिए आगे क्या कदम उठाते हैं। सूत्र का कहना है उनके पास भी इसकी भनक है। सेना के कुछ अफसर इस्राइल की तोप को सेना में शामिल करना चाहते हैं। देश का एक प्रमुख औद्योगिक घराना इस तोप के देश में विनिर्माण का इच्छुक है। बहुत हद संभव है कि इस तरह के दबाव में मेक इन इंडिया को झटका देने की कोशिश हो रही हो।