डब्ल्यूटीओ पहुंचा सीमा शुल्क विवाद, क्या अमेरिका और भारत के बीच बातचीत से निकलेगा रास्ता?
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अपने 28 उत्पादों पर सीमा शुल्क में बढ़ोतरी किए जाने से नाराज अमेरिका ने भारत को विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में घसीटा है। उसने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि भारत का फैसला वैश्विक व्यापार नियमों के खिलाफ है। जिनेवा स्थित डब्ल्यूटीओ के मुताबिक, अमेरिका ने अपनी शिकायत में कहा है कि भारत द्वारा थोपे गए अतिरिक्त शुल्क से उसे नुकसान पहुंचेगा। उसका यह कदम 'जीएटीटी' 1994 के तहत अमेरिका को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष लाभ को कम करने या खत्म करने का प्रतीत होता है।
'जीएटीटी' एक डब्ल्यूटीओ करार है जिस पर सभी सदस्य देशों के हस्ताक्षर हैं। इसका मकसद सीमा उत्पाद शुल्क जैसे व्यापार अवरोधों को खत्म या कम कर व्यापार को बढ़ावा देना है। अमेरिका ने आरोप लगाया कि भारत द्वारा लगाए सीमा शुल्क व्यापार और प्रशुल्क पर सामान्य समझौते (जीएटीटी) को दो नियमों के अनुरूप नहीं है। अमेरिका ने कहा कि भारत डब्ल्यूटीओ के किसी अन्य सदस्य देश के ऐसे उत्पादों पर शुल्क नहीं लगाता है जैसा उसने उसके 28 उत्पादों पर लगाया है।
विवाद के समाधान अमेरिका ने डब्ल्यूटीओ के विवाद निपटान मंत्र के तहत भारत से बातचीत की अपील की है। अमेरिका ने अपने आवेदन में कहा कि हम मौजूदा अनुरोध पर आपके जवाब और बातचीत के लिए आपसी सहमति की कोई तिथि तय किए जाने के इंतजार में हैं।
डब्ल्यूटीओ के विवाद निपटान प्रक्रिया के तहत, बातचीत के लिए अनुरोध करना पहला चरण है। बातचीत दोनों पक्षों को किसी मुद्दे पर चर्चा और कानूनी कार्रवाई किए बिना किसी संतोषजनक समाधान खोजने का मौका देता है। यदि बातचीत से विवाद का हल नहीं निकलता है तो 60 दिन बाद शिकायतकर्ता एक पैनल द्वारा न्यायिक निर्णय का अनुरोध कर सकता है।
अगले हफ्ते भारत आएगा अमेरिकी उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल
दोनों देशों के बीच उत्पाद शुल्क को लेकर उत्पन्न विवाद को देखते हुए एक उच्चस्तरीय अमेरिकी कारोबारी प्रतिनिधिमंडल अगले हफ्ते भारत आएगा। इस दौरे का मकसद दोनों देशों के बीच कारोबार को लेकर उत्पन्न तनाव को सुलझाने के तरीके खोजना है।
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल अगले कुछ हफ्तों में वाशिंगटन के दौरे पर जाएंगे और मतभेदों को दूर करने के लिए बातचीत करेंगे। पिछले महीने अमेरिका ने भारत का तरजीही देश का दर्जा खत्म करने का एलान किया था और इसके बाद भारत ने अमेरिका से आयात होने वाले 28 उत्पादों पर शुल्क बढ़ाने की घोषणा कर दी थी।