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क्यूबा ने वैक्सीन तो बना ली, लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से लगाने के लिए नहीं है सिरिंज
Thu, 03 Jun 2021 03:43 PM IST
Harendra Chaudhary
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, हवाना
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, हवाना
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Thu, 03 Jun 2021 03:43 PM IST
सार
दुनिया में आज सिरिंज का जितना उत्पादन होता है, उनमें से ज्यादातर का उत्पादन तीन अमेरिकी और पांच अन्य देशों की कंपनियां करती हैं। पांचों बाहरी कंपनियों का अमेरिकी कंपनियों से करार है। इसलिए वे अपने सिरिंज क्यूबा को नहीं दे सकतीं...
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- फोटो : PTI (फाइल फोटो)
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विस्तार
कोरोना वायरस संक्रमण रोकने का वैक्सीन बना लेने के बावजूद क्यूबा अपने तमाम लोगों का टीकाकरण नहीं कर पा रहा है। ये हालत इसलिए पैदा हुए हैं, क्योंकि अमेरिका ने क्यूबा को तमाम तरह के निर्यात पर रोक लगा रखी है। इसका असर सिरिंज की उपलब्धता पर पड़ा है। फिलहाल, दुनिया के बहुत से देशों में सिरिंज की कमी महसूस की जा रही है। क्यूबा भी उनमें एक है। अब विदेशों में स्थित क्यूबा के कई समर्थक संगठनों ने क्यूबा को सहायता के रूप में सिरिंज मुहैया कराने की मुहिम छेड़ी है।
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एक अमेरिकी अखबार के अनुमान के मुताबिक इस वक्त दुनिया में सिर्फ कोरोना वैक्सीन लगाने के लिए आठ से दस अरब सिरिंज की जरूरत है। इसे देखते हुए कंपनियां सिरिंज उत्पादन की अपनी क्षमता बढ़ा रही हैं। लेकिन अधिक उत्पादन होने पर भी क्यूबा को उसका लाभ नहीं मिलेगा, क्योंकि अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण ज्यादातर देश क्यूबा को किसी प्रकार का निर्यात नहीं करते।
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गैर-सरकारी संस्था ग्लोबल हेल्थ पार्टनर्स के मुताबिक क्यूबा को कोरोना टीकाकरण के लिए लगभग तीन करोड़ सिरिंज की जरूरत है। जबकि उसके पास सिर्फ एक करोड़ सिरिंज उपलब्ध हैं। अमेरिका ने लगभग छह दशकों से क्यूबा पर प्रतिबंध लगा रखे हैं। इस मामले में महामारी के दौरान भी उसने कोई उदारता नहीं दिखाई है। अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण क्यूबा को अक्सर बुनियादी जरूरत की चीजों का अभाव झेलना पड़ता है। कोरोना महामारी के दौरान वहां खाद्य पदार्थों का अभाव भी पैदा हुआ है।
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इन हालात के बावजूद क्यूबा ने पांच प्रकार की वैक्सीन विकसित की हैं। लेकिन सिरिंज और वेंटीलेटर जैसी चीजें बनाने के लिए जो कच्चा माल चाहिए, उसकी उसके पास कमी है। पहले स्विट्जरलैंड की एक कंपनी क्यूबा को वेंटीलेटर की सप्लाई करती थी। लेकिन एक अमेरिकी कंपनी ने जब से उस स्विस कंपनी को खरीद लिया, वो सप्लाई भी रुक गई।
दुनिया में आज सिरिंज का जितना उत्पादन होता है, उनमें से ज्यादातर का उत्पादन तीन अमेरिकी और पांच अन्य देशों की कंपनियां करती हैं। पांचों बाहरी कंपनियों का अमेरिकी कंपनियों से करार है। इसलिए वे अपने सिरिंज क्यूबा को नहीं दे सकतीं। वेबसाइट पीपुल्सवर्ल्ड.ओआरजी में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक जर्मनी कंपनी बी ब्राउन मेलसुनजेन, जापानी कंपनियों टेरुमो कॉरपोरेशन और निप्रो, भारत की हिंदुस्तान सिरिंज्स और मेडिकल डिवाइसेज किसी ना किसी रूप में अमेरिकी कंपनियों से जुड़ी हुई हैं।
अमेरिका ने 1960 के बाद से वहां बनाए गए कई कानूनों के तहत क्यूबा पर कई प्रकार के प्रतिबंध लगा रखे हैं। पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अपने कार्यकाल में पाबंदियों में कुछ छूट दी थी। लेकिन डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रपति बनने के बाद पहले से जारी तमाम प्रतिबंधों को बहाल कर दिया। राष्ट्रपति जो बाइडन की इस बारे में कोई नीति सामने नहीं आई है। लेकिन उनके प्रशासन ने अब तक मानवीय आधार पर भी प्रतिबंधों में कोई ढील देने से इनकार किया है।
इस बीच पिछले फरवरी में डेमोक्रेटिक पार्टी के सीनेटर रॉन वाइडेन ने प्रतिबंध खत्म करने के लिए एक बिल सीनेट में पेश किया। उसे चार और डेमोक्रेटिक सीनेटरों ने अपना समर्थन दिया है। लेकिन ये बिल अभी लटका हुआ है। पिछले मार्च में अमेरिकी कांग्रेस (संसद) के 80 सदस्यों ने राष्ट्रपति बाइडेन को पत्र लिख कर प्रतिबंधों में ढील देने की मांग की थी। लेकिन बाइडेन प्रशासन ने उस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। इस बीच क्यूबा में सिरिंज की कमी कोरोना महामारी से युद्ध में एक बड़ी रुकावट बन गई है।