फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   covid 19: European country Sweden approach to fighting coronavirus

स्वीडन में मजे से घूम रहे लोग, स्कूल-जिम और रेस्त्रां तक खुले, फिर भी कोरोना से मौत कम क्यों?

Sun, 29 Mar 2020 08:14 PM IST
Anshul Talmale अंशुल तलमले
Updated Sun, 29 Mar 2020 08:14 PM IST
विज्ञापन
covid 19: European country Sweden approach to fighting coronavirus
स्वीडन - फोटो : पीटीआई

विज्ञापन

एक ओर जहां कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया में हाहाकार मचा रखा है। इटली, स्पेन समेत यूरोपीय देशों में मौत का आंकड़ा लगातार बढ़ता ही जा रहा है, इस बीच एक देश ऐसा भी है जो अपने ही अंदाज में इस महामारी से निपट रहा है। न तो यहां लॉकडाउन है और न ही किसी तरह की कोई पाबंदी। लोग जिम में जाकर वर्जिश कर रहे हैं तो प्राथमिक स्कूल भी अब तक बंद नहीं किए गए हैं। यह देश है स्वीडन, जहां कोरोना वायरस से मरने वालों की संख्या दूसरे यूरोपीय देशों के मुकाबले काफी कम है। एक करोड़ की आबादी वाले स्वीडन में खबर लिखे जाने तक 3700 मामले सामने आ चुके हैं। 110 लोगों की मौत हो चुकी है, जो इटली (10.023) और स्पेन (6,528) से बेहद कम हैं।


सड़कों पर घूम रहे लोग

स्वीडन में इस वक्त जाती हुई सर्दियां है। भारत समेत एक चौथाई दुनिया जहां घरों में कैद है तो यहां की राजधानी स्टॉकहोम में लोग सड़कों पर घूमते नजर आ रहे हैं। मौसम का आनंद लेने के लिए खुले में बैठ रहे हैं। उद्यानों की कुर्सियों में दोस्तों और परिवार के साथ समय बीता रहे हैं। लोग खुले कैफे में बैठे हुए देखे जा सकते हैं।

विज्ञापन


25 मार्च से लागू नए नियमों के मुताबिक रेस्त्रां में खाने खाने वालों को टेबल पर ही बैठने को कहा गया है। बार काउंटर में खाना-पीना नहीं परोसा जा रहा। हाईस्कूल और विश्वविद्यालय बंद जरूर है, लेकिन प्राथमिक शालाओं में कक्षाएं लगना बदस्तूर जारी है।
विज्ञापन
विज्ञापन


दुनियाभर में कोरोना वायरस के चलते फैली गहमा-गहमी यहां दिखाई नहीं दे रही है। भारत समेत अन्य देशों में जहां लोगों का सड़कों पर निकलना तक मना है। वहीं स्वीडन में 500 लोगों को एकसाथ बाहर इकट्ठे रहने की मंजूरी है। इस नियम के पीछे तर्क दिया जा रहा है कि यह लोगों का मौलिक अधिकार है। हालांकि स्वीडन के अधिकारियों ने एहतियातन लोगों से सामाजिक मेलजोल न करने और घरों से काम करने की सलाह दी है।

कोरोनोवायरस ने दुनिया के अधिकांश खेल आयोजनों को रद्द कर दिया है, जिसमें टोक्यो ओलंपिक 2020 भी शामिल है। मगर खेल और व्यायाम को रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाला मानते हुए जिम को खोले रखने की भी अनुमति दे दी गई है।

तो क्या स्वीडन कोरोना को लेकर गंभीर नहीं है?

covid 19: European country Sweden approach to fighting coronavirus
कोरोना वायरस(सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : pixabay

स्वीडन में स्वास्थ्य मामलों की देखरेख करने वाली PHA की वेबसाइट पर नजर डालें तो समझ आता है कि यह देश, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के निर्देशों को गंभीरता से नहीं लेता। नहीं मानता कि कोरोना का वायरस बूंदों के माध्यम से फैल सकता है। या किसी वस्तु को छूने से भी फैल सकता है। जबकि WHO की माने तो कोरोना वायरस इंसानी लार की बूंदों से भी फैलता है।

खांसने या छींकने से भी इसके विषाणु संचरित होते हैं। ऐसे में सार्वजनिक जगहों पर घूमने से किसी से मिलने से आप पर खतरा बढ़ सकता है। कई रिसर्च से ये भी पता लगा है कि ये वायरस ग्लास और प्लास्टिक पर नौ दिन तक जीवित रह सकते हैं। कम तापमान में कुछ वायरस 28 दिन तक टिके रह सकते हैं। कोरोना वायरस को खासतौर पर इस बात के लिए जाना जाता है कि यह अपने अनुकूल माहौल में मजबूती से जमा रहता है।

कुछ वैज्ञानिकों ने दुनिया भर में महामारी के दौरान स्वीडिश सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसी के गैर-जिम्मेदाराना रवैये की आलोचना की है। लगभग 2,000 शिक्षाविदों ने सरकार को लिखे एक खुले पत्र में उसकी संक्रमण निवारण रणनीति में अधिक पारदर्शिता लाने की अपील की है।

स्वीडन में एक प्रतिष्ठित मेडिकल यूनिवर्सिटी कैरोलिंस्का इंस्टीट्यूट में प्रोफेसर स्टेन लिनारेसन वायरस से निपटने के सरकार के रवैये की तुलना रसोई में आग जलने देने से की, जिसे बाद में बुझा लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसका कोई मतलब नहीं है। डर इस बात का है कि कहीं ये आग पूरे घर को चपेट में न ले ले।

लेकिन स्वीडन की राय जुदा है

covid 19: European country Sweden approach to fighting coronavirus
स्वीडन - फोटो : ट्विटर

देशवासियों को गाइडलाइन जारी करते हुए यहां कि सरकार कहती है कि, 'बार-बार चेहरा न छूएं, साथ-साथ बीमार लोगों से भी संपर्क न बनाए। देश के पूर्व महामारी विशेषज्ञ और अब सरकारी निकाय स्वीडिश स्वास्थ्य एजेंसी के सलाहकार जोहान गीसेस्के ने कहा, 'स्वीडन की तस्वीर यूरोपीय देशों से अलग है और कम से कम यह अच्छी बात है।'

सरकार ने साफ किया है कि वे वायरस को शांत और नियंत्रित तरीके से रोकना चाहते हैं। यहां बड़े इवेंट्स पर रोक लगा दी गई है और यूनिवर्सिटीज बंद हैं। स्वीडन ने लोगों से घर से ही काम करने और लोगों से बिना वजह ट्रेवल नहीं करने के लिए कहा है। स्टॉकहोम में काफी लोग अकेले रहते हैं और अगर पाबंदियां लागू रहीं तो उनके लिए अकेलापन एक बड़ी समस्या हो सकती है।

सरकार घर बैठे इनकी जरूरतों को पूरा करने के लिए तमाम उपाय कर रही है। इस बीच कुछ ऐसे लोग भी सामने आ रहे हैं जो कि व्यक्तिगत तौर पर जरूरतमंदों की मदद कर रहे हैं, जबकि कुछ लोगों ने समूह बनाकर मदद पहुंचाने का काम तेज कर दिया है ताकि लोगों को घर में रहने पर कम से कम दिक्कत का सामना करना पड़े।

फेसबुक, व्हाट्सएप जैसे सोशल नेटवर्किंग साइट्स के सहारे कई ऐसे लोगों के समूह बन गए हैं, जो जरूरतमंदों की मदद करना चाहते हैं। कुछ ऐसे एप्प भी हैं जिनसे अपने आस-पड़ोस की तमाम छोटी बड़ी जानकारी ली जा सकती है।

एक करोड़ की आबादी वाले स्वीडन में रविवार तक कोरोना वायरस से संक्रमण के 3700 मामले सामने आ चुके हैं। 110 लोगों की मौत हो चुकी है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार जांच की दर सीमित है। यहां के लोगों को विश्वास है कि स्वीडन के अनुभव इटली की तरह खतरनाक नहीं होंगे, जहां 10 हजार लोगों की मौत हो चुकी है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed