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कोरोना वैक्सीन को लेकर दुनिया भर के मुस्लिम धर्मगुरुओं में छिड़ी 'बड़ी' बहस, यह है वजह

Sun, 20 Dec 2020 06:05 PM IST
दीप्ति मिश्रा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, जकार्ता
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, जकार्ता Published by: दीप्ति मिश्रा Updated Sun, 20 Dec 2020 06:05 PM IST
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COVID-19 : Concern among Muslims religious leaders over halal status of corona vaccine
कोरोना वैक्सीन - फोटो : social media

दुनिया भर में कोरोना वायरस का कहर जारी है। अधिकतर देशों में वायरस की दूसरी लहर चल रही है। दुनिया भर में कोरोना वैक्सीन पर काम तेजी से चल रहा है। रूस, ब्रिटेन, अमेरिका समेत कई देशों में कोरोना वायरस से बचाव के लिए टीकाकरण अभियान भी शुरू हो गया है। जबकि कई देश वैक्सीनेशन की तैयारियों में जुटे हैं। वहीं दुनियाभर के इस्लामिक धर्मगुरुओं के बीच इस बात को लेकर असमंजस है कि सुअर के मांस का इस्तेमाल कर बनाए गए कोविड-19 टीके इस्लामिक कानून के तहत जायज हैं या नहीं। इसे लगवाया जाए या नहीं।

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एक ओर कई कंपनियां कोविड-19 टीका तैयार करने में जुटी हैं और कई देश टीकों की खुराक हासिल करने की तैयारियां कर रहे हैं। वहीं, दूसरी ओर कुछ धार्मिक समूहों द्वारा प्रतिबंधित सुअर के मांस से बने उत्पादों को लेकर सवाल उठ रहे हैं, जिसके चलते टीकाकरण अभियान के बाधित होने की आशंका जताई जा रही है।

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धार्मिक रूप से अपवित्र है कोरोना टीका!

ब्रिटिश इस्लामिक मेडिकल एसोसिएशन के महासचिव सलमान वकार का कहना है कि ‘ऑर्थोडॉक्स’ यहूदियों और मुसलमानों समेत विभिन्न धार्मिक समुदायों के बीच टीके के इस्तेमाल को लेकर असमंजस की स्थिति है, जो सुअर के मांस से बने उत्पादों के इस्तेमाल को धार्मिक रूप से अपवित्र मानते हैं।

इस्लामी कानून में स्वीकार्य !
सिडनी विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर डॉक्टर हरनूर राशिद कहते हैं कि टीके में पोर्क जिलेटिन के उपयोग पर अब तक हुई विभिन्न परिचर्चा में आम सहमति यह बनी है कि यह इस्लामी कानून के तहत स्वीकार्य है, क्योंकि यदि टीकों का उपयोग नहीं किया गया तो बहुत नुकसान होगा।

इंजेक्शन के तौर पर जायज 
इजराइल की रब्बानी संगठन जोहर के अध्यक्ष रब्बी डेविड स्टेव ने कहा, 'यहूदी कानूनों के अनुसार सुअर का मांस खाना या इसका इस्तेमाल करना तभी जायज है, जब इसके बिना काम न चले। उन्होंने कहा कि अगर इसे इंजेक्शन के तौर पर लिया जाए और खाया नहीं जाए, तो यह जायज है और इससे कोई दिक्कत नहीं है। बीमारी की हालत में इसका इस्तेमाल विशेष रूप से जायज है।

इन कंपनियों ने बिना मांस के टीके पर काम किया

टीकों के भंडारण और ढुलाई के दौरान उनकी सुरक्षा और प्रभाव बनाए रखने के लिए सुअर के मांस (पोर्क) से बने जिलेटिन का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है। कुछ कंपनियां सुअर के मांस के बिना टीका विकसित करने पर कई साल तक काम कर चुकी हैं। स्विटजरलैंड की दवा कंपनी 'नोवारटिस' ने सुअर का मांस इस्तेमाल किए बिना मैनिंजाइटिस टीका तैयार किया था। जबकि सऊदी और मलेशिया स्थित कंपनी एजे फार्मा भी ऐसा ही टीका बनाने का प्रयास कर रही हैं। 







हालांकि फाइजर, मॉडर्न, और एस्ट्राजेनेका के प्रवक्ताओं ने कहा है कि उनके कोविड-19 टीकों में सुअर के मांस से बने उत्पादों का इस्तेमाल नहीं किया गया है, लेकिन कई कंपनियां ऐसी हैं, जिन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया है कि उनके टीकों में सुअर के मांस से बने उत्पादों का इस्तेमाल किया गया है या नहीं। ऐसे में इंडोनेशिया जैसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाले देशों में चिंता पसर गई है।

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