एक हफ्ते में जीत सकते हैं अफगान युद्ध, बस एक करोड़ लोगों को मारना नहीं चाहते: डोनाल्ड ट्रंप
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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को अफगानिस्तान में शांति वार्ता को आगे बढ़ाने में पाकिस्तान के सहयोग की सराहना की। अमेरिका पिछले 18 साल से चल रहे अफगान युद्ध को खत्म करने के लिए तालिबान के साथ समझौता चाहता है।
ट्रंप ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान से बातचीत में कहा कि वह सैनिकों की सहायता से इस संघर्ष को कुछ ही दिनों में खत्म कर सकते हैं और अफगानिस्तान धरती से मिट सकता है लेकिन बातचीत ज्यादा ठीक है। पाकिस्तान 1990 के दशक से ही तालिबान को मदद पहुंचाने वाला रहा है।
अफगानिस्तान में अभी भी ये युद्ध जारी है। साल 2001 की तुलना में एक बड़ा हिस्सा आज भी तालिबान के ही नियंत्रण में है। विद्रोहियों के साथ लगातार बने हुए गतिरोध को देखते हुए, ट्रंप अब युद्ध विराम के इच्छुक नजर आ रहे हैं। इसके लिए अमेरिका सालाना 45 अरब पाउंड खर्च करता है। यहां आज भी अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। नेटो मिशन के तहत अफगान सिक्योरिटी फोर्सेज को प्रशिक्षण देने के लिए अफगानिस्तान में करीब हजार ब्रिटिश सैनिक भी मौजूद हैं।
ट्रंप ने खान से कहा, "हमने बीते कुछ हफ्तों में काफी प्रगति की है, जिसमें पाकिस्तान ने हमारा साथ दिया है। अमेरिका के लिए बहुत सी चीजें हो रही हैं, और मुझे लगता है कि आपके नेतृत्व में पाकिस्तान के लिए भी बहुत सी बड़ी चीजें होने वाली हैं।"
हालांकि ट्रंप ने ही बीते साल पाकिस्तान को दोगला बताते हुए उसे मिलने वाली तीन करोड़ डॉलर की सुरक्षा सहायता पर रोक लगा दी थी।
'एक करोड़ लोगों को नहीं मारना चाहते'
अमेरिका चाहता है कि सितंबर के आखिर में अफगानिस्तान में होने जा रहे चुनावों से पहले ही तालिबान के साथ राजनीतिक समझौता हो जाए। इससे अमेरिका के सैनिकों के लिए अफगानिस्तान से वापस अपने देश आने का रास्ता खुल जाएगा और अमेरिका के सबसे बड़े युद्ध का भी अंत होगा।
ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा, "अगर हम अफगानिस्तान में युद्ध लड़ना चाहते हैं और जीतते हैं, तो मैं उस युद्ध को एक हफ्ते में जीत सकता हूं। मैं नहीं चाहता कि एक करोड़ लोगों की मौत हो।" अमेरिका और पाकिस्तान के बीच अमेरिका में हुए 9/11 हमले के बाद से ही रिश्ते खराब हैं। इस हमले में पाकिस्तानी आतंकी ओसामा बिन लादेन का हाथ था, जिसे अमेरिका ने 2011 में मार दिया था।
आईएमएफ ने पाकिस्तान की लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था को सही करने में मदद के लिए महज 6 बिलियन डॉलर के ऋण को मंजूरी दी है। यही वजह है कि पाकिस्तान के लिए अमेरिका का साथ काफी महत्वपूर्ण है। खान को पाकिस्तानी सेना का बेहद करीबी माना जाता है, जो सभी विदेशी मामलों में फैसला लेती है।