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डब्ल्यूएचओ ने बजाई खतरे की घंटी: फिर कोरोना महामारी का एपिसेंटर क्यों बन गया है यूरोप?

Fri, 05 Nov 2021 07:44 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ब्रसेल्स
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ब्रसेल्स Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 05 Nov 2021 07:44 PM IST
सार

डब्ल्यूएचओ ने चेतावनी दी है कि यूरोप और मध्य एशिया के के 53 में 43 देशों में स्थिति बिगड़ रही है। अगर यही रफ्तार जारी रही, तो वहां अस्पतालों के बिस्तर के लिए मारामारी मच सकती है। डब्ल्यूएचओ ने इन देशों में मौतों की संख्या बढ़ने की आशंका भी जताई है...

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Coronavirus: WHO warned that the situation is worsening in 43 of the 53 countries in Europe and Central Asia
कोरोना वायरस - फोटो : पीटीआई (फाइल)

विस्तार

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने ये चेतावनी अब दी है, लेकिन अनेक विशेषज्ञ यह अंदेशा पहले से जता रहे थे कि यूरोप में कोरोना महामारी का नया कहर टूटने वाला है। डब्ल्यूएचओ ने गुरुवार को इस बारे में खतरे की घंटी बजाई। उसने ध्यान दिलाया कि यूरोप के ज्यादातर हिस्सों में कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं। जर्मनी में तो गुरुवार को नए मामले सामने आने का रिकॉर्ड बन गया। डब्ल्यूएचओ के यूरोप के क्षेत्रीय निदेशक हैन्स क्लज ने मौजूदा स्थिति को गंभीर रूप से चिंताजनक बताया है। उन्होंने कहा- ‘हम एक बार फिर से एपिसेंटर (केंद्र) बन गए हैं।’

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डब्ल्यूएचओ ने चेतावनी दी है कि यूरोप और मध्य एशिया के के 53 में 43 देशों में स्थिति बिगड़ रही है। अगर यही रफ्तार जारी रही, तो वहां अस्पतालों के बिस्तर के लिए मारामारी मच सकती है। डब्ल्यूएचओ ने इन देशों में मौतों की संख्या बढ़ने की आशंका भी जताई है।
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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यूरोप के ज्यादातर हिस्सों में भी संक्रमण के मामलों में बढ़ोतरी कोरोना वायरस के डेल्टा वैरिएंट के कारण हुई है। इस ट्रेंड के कारण कई यूरोपीय देशों में प्रतिबंध हटाने की गति धीमी कर दी गई है। कुछ जगहों पर नए सिरे से प्रतिबंध लागू किए जा रहे हैं। खासकर पूर्वी यूरोप पर नई लहर की अधिक मार पड़ रही है। पहले रूस में संक्रमण के नए मामले सामने आने का रिकॉर्ड बना। उसके बाद बीते सोमवार को यूक्रेन की राजधानी कीव में नए सिरे से प्रतिबंध लागू कर दिए गए।
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डब्ल्यूएचओ के आंकड़ों के मुताबिक यूरोप में बीते एक हफ्ते में नए संक्रमण के मामलों में छह फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। दुनिया के किसी अन्य क्षेत्र की तुलना में यह ज्यादा है। फिलहाल यूरोप के अलावा दुनिया के लगभग हर इलाके में ट्रेंड नए संक्रमण में गिरावट का है। डब्ल्यूएचओ ने यूरोप में दिए रहे रूझान के लिए कई कारणों को जिम्मेदार ठहराया है। इनमें कोविड-19 प्रतिबंधों में ढिलाई और पूर्वी यूरोप में टीकाकरण की धीमी रफ्तार शामिल हैं।

जर्मनी के स्वास्थ्य मंत्री जेन्स स्पाहन ने बुधवार को चेतावनी दी थी कि अगर जरूरत पड़ी देशों में फिर से सख्त प्रतिबंध लागू कर दिए जाएंगे। गुरुवार को उन्होंने बताया कि देश में 33,949 नए मामले सामने आए। दिसंबर 2020 के बाद इतनी संख्या में नए लोग एक दिन में कोरोना वायरस से कभी संक्रमित नहीं हुए थे। हालांकि स्पाहन ने बताया कि इस दौर में लोगों को अस्पताल में भर्ती होने की कम जरूरत पड़ रही है और मृत्यु दर भी कम है।


ब्रिटेन में भी बीते एक हफ्ते में कोरोना संक्रमण के मामले बढ़े हैं। लेकिन ब्रिटिश सरकार अभी भी प्रतिबंध लगाने के मूड में नहीं है। ब्रिटेन में बीते जुलाई में ही कोरोना संबंधी प्रतिबंधों को खत्म कर दिया गया था। बीते सोमवार को दुनिया में कोरोना वायरस से मरने वालों की आधिकारिक संख्या 50 लाख को पार कर गई थी। विशेषज्ञों का कहना है कि हालांकि हाल में मृत्यु दर में कमी आई है, लेकिन यूरोप में दिख रहे ट्रेंड से लगता है कि अभी हजारों और लोगों को अपने प्रियजनों को खोना पड़ सकता है।

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