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कोरोना वैक्सीन बनने में लग सकता है समय, परीक्षण के लिए बंदरों की कमी से जूझ रहे वैज्ञानिक
Thu, 03 Sep 2020 03:00 PM IST
अनवर अंसारी
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
Published by: अनवर अंसारी
Updated Thu, 03 Sep 2020 03:00 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Amar Ujala
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दुनियाभर में कोरोना का टीका बनाने की जद्दोजहद जारी है। वैज्ञानिक दिन-रात कड़ी मेहनत कर रहे हैं, ताकि दुनिया को वायरस के दंश से बचाया जा सके। कोरोना टीकों का परीक्षण बंदरों पर किया जाता है, लेकिन बंदरों की कमी के चलते दुनियाभर में टीका परीक्षण अटक गया है।
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अमेरिका में वैज्ञानिक कोरोना वायरस का टीका तेजी से विकसित कर रहे हैं, लेकिन बंदरों की कमी के चलते वे खासा परेशान हैं। उन्होंने चेताया है कि अगर टीकों के परीक्षण के लिए समय पर बंदर उपलब्ध नहीं हुए तो इसके विकास में देरी का सामना करना पड़ सकता है।
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दरअसल, कोरोना वायरस महामारी के दौर में टीकों के परीक्षण को लेकर जानवरों की मांग बढ़ गई है। सभी वैज्ञानिक अपने-अपने टीकों का परीक्षण ʿरीससʾ बंदरों पर करना चाहते हैं। इस कारण मांग बढ़ने और आपूर्ति में कमी होने से कई टीकों के परीक्षण अटक गए हैं।
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जानवरों की लागत और उनको लेकर हो रहे विवादों के कारण भी टीकों को लेकर हो रहे गहन शोध पर असर पड़ रहा है।ʿद नेशनल प्राइमेट रिसर्च सेंटर्सʾ के अनुसार ʿरीससʾ बंदर का इस्तेमाल आमतौर पर बायोमेडिकल रिसर्च में किया जाता है।
कैलिफोर्निया नेशनल प्राइमेट रिसर्च सेंटर के कोएन वान रोमपे ने कहा कि पूरे अमेरिका में इन बंदरों की बहुत कमी हो गई है। वहीं, कॉन्ट्रैक्ट रिसर्च फर्म बायोकल के सीईओ मार्क लुईस ने कहा कि हमें अब कोई भी ʿरीससʾ बंदर नहीं मिल रहा, वे पूरी तरह से गायब हो गए हैं।
चीन ने बंदरों का निर्यात किया बंद
महामारी के दौरान चीन से ʿरीससʾ बंदरों के निर्यात में भी काफी कमी आई है। ऐसे में अमेरिका समेत कई यूरोपीय देश टीकों के परीक्षण को लेकर बंदरों की कमी का सामना कर रहे हैं। अमेरिका ने पिछले साल कुल 35000 बंदरों का आयात किया था, जिसमें चीन की भागिदारी 30 फीसदी के आसपास थी।
अब चीन ने कोरोना वायरस का डर दिखाकर इन बंदरों की अपूर्ति करने से मना कर दिया है। अमेरिकी शोधकर्ताओं का कहना है कि ये बंदर कोरोना वायरस टीकों का परीक्षण करने में उपयोगी होते हैं। इनकी प्रतिरक्षा प्रणाली लगभग मानव के समान होती है। इन पर परीक्षण करने के बाद ही टीके का इंसानों पर परीक्षण शुरू किया जाता है।