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Coronavirus: चक्रवात ने मचाई तबाही, फिर भी अपनी सीमा खोलने को तैयार नहीं वानूआतू
Wed, 15 Apr 2020 06:21 PM IST
अमित कुमार
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: अमित कुमार
Updated Wed, 15 Apr 2020 06:21 PM IST
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वानुअतु में टूटे घर
- फोटो : World Vision
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कोरोना वायरस के खौफ की वजह से आधी से ज्यादा दुनिया अपने घरों में कैद होने को मजबूर हैं। ऐसे में कोरोना के प्रकोप से बचे छोटे से वानूआतू गणराज्य के सामने नई मुसीबत खड़ी हो गई है। पिछले हफ्ते चक्रवात 'हारोल्ड' की वजह से यह देश काफी हद तक तबाह हो चुका है।
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इसके बावजूद करीब 80 छोटे-छोटे द्वीपों का यह देश अपनी अंतरराष्ट्रीय सीमा खोलने को तैयार नहीं है। इसका बड़ा कारण है कोरोना वायरस का संक्रमण फैलने का डर। आपात स्थितियों में मदद पहुंचाने वाले लोगों के मुताबिक पिछले हफ्ते आए तूफान की वजह से हजारों लोग बेघर हो गए हैं। फसल बर्बाद हो गई हैं।
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यह तूफान इतना शक्तिशाली था कि जल्द ही यह श्रेणी पांच में चला गया और सोलोमन द्वीप, वानूआतू, फिजी और टोंगा में भारी तबाही मचाई। वर्ल्ड विजन के मुताबिक 3 लाख आबादी वाले इस देश की 35 फीसदी आबादी अस्थायी घरों में रहने को मजबूर है। सामाजिक कार्यकर्ताओं की सबसे बड़ी चिंता भी यही है कि लोगों के पास रहने के लिए घर नहीं है।
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कई जगहों पर तो 2015 में आए तूफान 'पाम' से ज्यादा तबाही मची है। कई लोगों की मौत भी हो चुकी है। सोलोमन में 27 लोगों की जान चली गई। फिजी में भी तीन लोगों के मारे जाने की खबर है।
संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों और आपातकालीन राहत विभाग के प्रमुख मार्क लॉकोक ने वानूआतू की मदद के लिए 25 लाख डॉलर की मदद की बात कही है। मगर कोरोना वायरस ने राहत कार्य को थोड़ा मुश्किल बना दिया है। वानूआतू में अभी तक एक भी कोरोना वायरस का मामला सामने नहीं आया है। इसलिए वह अपनी अंतरराष्ट्रीय सीमा को खोलने के लिए हिचकिचा रहा है।
वर्ल्ड विजन का कहना है कि कुछ क्षेत्रों में राहत कार्य काफी धीमा है, लेकिन सरकार संक्रमण को यहां तक आने का जोखिम नहीं उठाना चाहती। ऐसे में काफी मुश्किल हो रही है। ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड ने राहत सामग्री को एयरलिफ्ट कर यहां पहुंचाया है। चीन ने भी दवाएं भेजी हैं। मगर इन सभी चीजों को लोगों तक पहुंचने से पहले क्वारंटीन के सख्त दिशानिर्देशों का पालन किया गया।