आखिर अफ्रीका में क्यों नहीं फैल पा रहा कोरोना वायरस, इन देशों ने उठाए कौन से जरूरी कदम?
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तमाम एहतियातों और कोशिशों के बावजूद दुनियाभर में कोरोना का कहर बढ़ता ही जा रहा है। संक्रमितों की संख्या थमने का नाम नहीं ले रही। मगर हैरान करने वाली बात यह है कि विश्व के 193 से ज्यादा देशों में पैर पसार लेने वाला कोरोनावायरस अपेक्षाकृत गरीब और कम संपन्न माने जाने वाले अफ्रीकी देशों में उस तरह तांडव नहीं मचा पाया। दिसंबर 2019 में चीन से शुरू हुई यह अनजान बीमारी एशिया, मध्य एशिया, यूरोप और यूएस में पूरी तरह फैलने के बाद महामारी बन चुकी है, लेकिन अफ्रीकी महाद्वीप में पहला कोरोना पॉजिटिव केस 14 फरवरी 2020 को मिस्त्र (इजिप्ट) में सामने आया। वहीं, कोविड-19 सब सहारा अफ्रीका तक नौ मार्च तक पहुंचा। यह पहला मामला बुर्किना फासो में सामने आया। इसके बाद से ही मामलों में तेजी आई। 19 मार्च तक अफ्रीका के 54 में से 36 देशों में COVID-19 के 733 मामले ही सामने आए थे, जिसमें 16 लोगों की जान गई। मगर WHO की ताजा रिपोर्ट के अनुसार अब 43 देशों के 1400 लोग इसकी जद में आ चुके हैं, जबकि मृतकों की संख्या भी बढ़कर 40+ हो चुकी है। बावजूद इसके यह आंकड़े अन्य महाद्वीपों की तुलना में थोड़ी राहत देते हैं। ऐसे में यह समझना जरूरी हो जाता है कि अफ्रीका में कोरोना वायरस अपना पैर क्यों नहीं पसार पाया?
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तमाम एहतियातों और कोशिशों के बावजूद दुनियाभर में कोरोना का कहर बढ़ता ही जा रहा है। संक्रमितों की संख्या थमने का नाम नहीं ले रही। मगर हैरान करने वाली बात यह है कि विश्व के 193 से ज्यादा देशों में पैर पसार लेने वाला कोरोनावायरस अपेक्षाकृत गरीब और कम संपन्न माने जाने वाले अफ्रीकी देशों में उस तरह तांडव नहीं मचा पाया। दिसंबर 2019 में चीन से शुरू हुई यह अनजान बीमारी एशिया, मध्य एशिया, यूरोप और यूएस में पूरी तरह फैलने के बाद महामारी बन चुकी है, लेकिन अफ्रीकी महाद्वीप में पहला कोरोना पॉजिटिव केस 14 फरवरी 2020 को मिस्त्र (इजिप्ट) में सामने आया। वहीं, कोविड-19 सब सहारा अफ्रीका तक नौ मार्च तक पहुंचा। यह पहला मामला बुर्किना फासो में सामने आया। इसके बाद से ही मामलों में तेजी आई। 19 मार्च तक अफ्रीका के 54 में से 36 देशों में COVID-19 के 733 मामले ही सामने आए थे, जिसमें 16 लोगों की जान गई। मगर WHO की ताजा रिपोर्ट के अनुसार अब 43 देशों के 1400 लोग इसकी जद में आ चुके हैं, जबकि मृतकों की संख्या भी बढ़कर 40+ हो चुकी है। बावजूद इसके यह आंकड़े अन्य महाद्वीपों की तुलना में थोड़ी राहत देते हैं। ऐसे में यह समझना जरूरी हो जाता है कि अफ्रीका में कोरोना वायरस अपना पैर क्यों नहीं पसार पाया?
अफ्रीका ने कौन से जरूरी कदम उठाए?
नाइजीरिया ने अपने ही नागरिकों का वीजा रद्द किया
सेनेगल बना रहा कोरोना की दवाई
अफ्रीका में यूरोप से ज्यादा युवा आबादी
यह वायरस ज्यादातर बुजुर्गों को अपनी चपेट में लेता है, लेकिन अफ्रीका में यूरोप की तुलना में युवा आबादी है। एक कारण यह भी है कि उच्च मृत्यु दर के बावजूद अफ्रीका इस प्रकोप का कम नुकसान हुआ है। हालांकि इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि अफ्रीका में आईसीयू सुविधाओं का अभाव है। वेंटिलेटर्स नहीं हैं। माली मेंप्रति दस लाख लोगों पर एक वेंटिलेटर है। सब सहारा अफ्रीका के कई देशों में आइसोलेशन वार्ड नहीं हैं। डॉक्टर्स नहीं हैं। इन सबके बीच चीन के सबसे रईस आदमी जैक मा ने सभी अफ्रीकी देशों के बीच साझा करने के लिए 1.1 मिलियन परीक्षण किट, 6 मिलियन मास्क और 60,000 सुरक्षात्मक सूट और फेस शील्ड दान करने का संकल्प लिया है।