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Hindi News ›   World ›   Coronavirus: Reason behind the low number of recorded COVID-19 cases in Africa?

आखिर अफ्रीका में क्यों नहीं फैल पा रहा कोरोना वायरस, इन देशों ने उठाए कौन से जरूरी कदम?

Tue, 24 Mar 2020 04:14 PM IST
Anshul Talmale अंशुल तलमले
Updated Tue, 24 Mar 2020 04:14 PM IST
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Coronavirus: Reason behind the low number of recorded COVID-19 cases in Africa?
अफ्रीकी देशों के हालात - फोटो : पीटीआई

तमाम एहतियातों और कोशिशों के बावजूद दुनियाभर में कोरोना का कहर बढ़ता ही जा रहा है। संक्रमितों की संख्या थमने का नाम नहीं ले रही। मगर हैरान करने वाली बात यह है कि विश्व के 193 से ज्यादा देशों में पैर पसार लेने वाला कोरोनावायरस अपेक्षाकृत गरीब और कम संपन्न माने जाने वाले अफ्रीकी देशों में उस तरह तांडव नहीं मचा पाया। दिसंबर 2019 में चीन से शुरू हुई यह अनजान बीमारी एशिया, मध्य एशिया, यूरोप और यूएस में पूरी तरह फैलने के बाद महामारी बन चुकी है, लेकिन अफ्रीकी महाद्वीप में पहला कोरोना पॉजिटिव केस 14 फरवरी 2020 को मिस्त्र (इजिप्ट) में सामने आया। वहीं, कोविड-19 सब सहारा अफ्रीका तक नौ मार्च तक पहुंचा। यह पहला मामला बुर्किना फासो में सामने आया। इसके बाद से ही मामलों में तेजी आई। 19 मार्च तक अफ्रीका के 54 में से 36 देशों में COVID-19 के 733 मामले ही सामने आए थे, जिसमें 16 लोगों की जान गई। मगर WHO की ताजा रिपोर्ट के अनुसार अब 43 देशों के 1400 लोग इसकी जद में आ चुके हैं, जबकि मृतकों की संख्या भी बढ़कर 40+ हो चुकी है। बावजूद इसके यह आंकड़े अन्य महाद्वीपों की तुलना में थोड़ी राहत देते हैं। ऐसे में यह समझना जरूरी हो जाता है कि अफ्रीका में कोरोना वायरस अपना पैर क्यों नहीं पसार पाया?

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तमाम एहतियातों और कोशिशों के बावजूद दुनियाभर में कोरोना का कहर बढ़ता ही जा रहा है। संक्रमितों की संख्या थमने का नाम नहीं ले रही। मगर हैरान करने वाली बात यह है कि विश्व के 193 से ज्यादा देशों में पैर पसार लेने वाला कोरोनावायरस अपेक्षाकृत गरीब और कम संपन्न माने जाने वाले अफ्रीकी देशों में उस तरह तांडव नहीं मचा पाया। दिसंबर 2019 में चीन से शुरू हुई यह अनजान बीमारी एशिया, मध्य एशिया, यूरोप और यूएस में पूरी तरह फैलने के बाद महामारी बन चुकी है, लेकिन अफ्रीकी महाद्वीप में पहला कोरोना पॉजिटिव केस 14 फरवरी 2020 को मिस्त्र (इजिप्ट) में सामने आया। वहीं, कोविड-19 सब सहारा अफ्रीका तक नौ मार्च तक पहुंचा। यह पहला मामला बुर्किना फासो में सामने आया। इसके बाद से ही मामलों में तेजी आई। 19 मार्च तक अफ्रीका के 54 में से 36 देशों में COVID-19 के 733 मामले ही सामने आए थे, जिसमें 16 लोगों की जान गई। मगर WHO की ताजा रिपोर्ट के अनुसार अब 43 देशों के 1400 लोग इसकी जद में आ चुके हैं, जबकि मृतकों की संख्या भी बढ़कर 40+ हो चुकी है। बावजूद इसके यह आंकड़े अन्य महाद्वीपों की तुलना में थोड़ी राहत देते हैं। ऐसे में यह समझना जरूरी हो जाता है कि अफ्रीका में कोरोना वायरस अपना पैर क्यों नहीं पसार पाया?

अफ्रीका ने कौन से जरूरी कदम उठाए?

अफ्रीकी नक्शा
अफ्रीकी नक्शा - फोटो : ट्विटर
अफ्रीका ने वो गलती नहीं दोहराई जो यूएस और इटली जैसे अमीर राष्ट्र कर चुके थे। दुनिया में बढ़ते त्राहिमाम के मद्देनजर अधिकतकर अफ्रीकी देशों ने काफी पहले ही अपने बॉर्डर सील कर लिए थे। यानी कोई बाहरी नागरिक न तो देश के भीतर आ सकता था और न ही कोई बाहर जा सकता था। सेनेगल जैसे देश ने गुरुवार को ही किसी भी प्रकार के विमान की आवाजाही पर रोक लगा दी थी। अंगोला और कैमरून ने भी अपने समुद्री, हवाई और जमीनी सीमा बंद कर दिए। रवांडा ने तो एक माह के लिए सभी कमर्शियल फ्लाइट्स की आवाजाही पर रोक लगा दी। 

नाइजीरिया ने अपने ही नागरिकों का वीजा रद्द किया

पर्यटकों पर टिके सुंदर देश मॉरिशस ने भी पहले मामले की पुष्टि के साथ ही अपने बॉर्डर सील कर लिए। दक्षिण अफ्रीका के बाद उत्तरी अफ्रीका के अल्जीरिया (201), मिस्त्र (294), मोरक्को (109) ही सर्वाधिक प्रभावित देश हैं। सर्वाधिक आबादी वाले अफ्रीका देश नाइजीरिया ने तो चीन और अमेरिका समेत 13 देशों के नागरिकों की अपनी सीमा में ही एंट्री बैन कर दी। यहां तक कि विदेश से स्वदेश लौटन वाले नागरिकों के वीजा तक रद्द कर दिए गए। हालांकि पिछले चार दिन में यहां पॉजिटिव मरीजों की संख्या 8 से 30 जरूर हो गई।

सेनेगल बना रहा कोरोना की दवाई

सोमालिया में पहला मामला सामने आते ही सरकार चेत गई और तुरंत सभी स्कूल-कॉलेज अगले दो हफ्ते के लिए बंद कर दिए गए। नागरिकों को एक जगह इकट्ठे होने पर FIR तक की चेतावनी दी जा चुकी है। सभी इंटरनेशनल फ्लाइट तो पहले ही बंद किए जा चुके थे। 14 मार्च को केन्या में कोरोना से मरने वालों को श्रद्धांजलि देने के बाद एहतियात रखने और लापरवाही न करने की कसम खाई गई। सेनेगल तो COVID-19 से लड़ने के लिए वैक्सिन बनाने में जुटा है। 

अफ्रीका में यूरोप से ज्यादा युवा आबादी

यह वायरस ज्यादातर बुजुर्गों को अपनी चपेट में लेता है, लेकिन अफ्रीका में यूरोप की तुलना में युवा आबादी है। एक कारण यह भी है कि उच्च मृत्यु दर के बावजूद अफ्रीका इस प्रकोप का कम नुकसान हुआ है। हालांकि इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि अफ्रीका में आईसीयू सुविधाओं का अभाव है। वेंटिलेटर्स नहीं हैं। माली मेंप्रति दस लाख लोगों पर एक वेंटिलेटर है। सब सहारा अफ्रीका के कई देशों में आइसोलेशन वार्ड नहीं हैं। डॉक्टर्स नहीं हैं। इन सबके बीच चीन के सबसे रईस आदमी जैक मा ने सभी अफ्रीकी देशों के बीच साझा करने के लिए 1.1 मिलियन परीक्षण किट, 6 मिलियन मास्क और 60,000 सुरक्षात्मक सूट और फेस शील्ड दान करने का संकल्प लिया है।

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