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कोरोना वायरस: 1918 में फैले स्पैनिश फ्लू महामारी से लड़ने के तरीके को अमेरिका ने कोरोना के इलाज में अपनाया
Sun, 29 Mar 2020 03:49 PM IST
देव कश्यप
पीटीआई, ह्यूस्टन
पीटीआई, ह्यूस्टन
Published by: देव कश्यप
Updated Sun, 29 Mar 2020 03:49 PM IST
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Donald Trump
- फोटो : PTI
वैश्विक महामारी कोरोना वायरस से दुनिया में सबसे ज्यादा प्रभावित अमेरिका इसके इलाज के लिए तरह-तरह के प्रयोग कर रहा है। अमेरिका में कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या एक लाख के पार कर गई है जबकि 2000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।
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इसी को देखते हुए महामारी से निपटने के लिए अमेरिका के ह्यूस्टन के एक प्रमुख अस्पताल ने कोविड-19 से ठीक हुए एक मरीज का रक्त इस बीमारी से गंभीर रूप से पीड़ित एक रोगी को चढ़ाया है और यह प्रायोगिक इलाज आजमाने वाला देश का ऐसा पहला चिकित्सालय बन गया है। घातक कोरोना वायरस से पीड़ित होने के बाद दो सप्ताह से अधिक समय तक अच्छी सेहत में रहे एक व्यक्ति ने ब्लड प्लाज्मा दान किया है। इस व्यक्ति ने यह ब्लड प्लाज्मा ह्यूस्टन मेथोडिस्ट हॉस्पीटल में कोनवालेस्सेंट सीरम थेरेपी के लिए दिया है।
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इलाज का यह तरीका 1918 के स्पैनिश फ्लू महामारी के समय का है। मेथोडिस्ट्स रिसर्च इंस्टीट्यूट के एक चिकित्सक वैज्ञानिक डा. एरिक सलाजार ने एक बयान में कहा कि कोनवालेस्सेंट सीरम थेरेपी एक महत्वपूर्ण उपचार का तरीका हो सकता है क्योंकि सहायक देखभाल के अलावा कई रोगियों को मुहैया कराने के लिए और कुछ बहुत कम है और चल रहे नैदानिक परीक्षणों में थोड़ा समय लगेगा। सालजार ने कहा कि हमारे पास इतना समय नहीं है।
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उपचार को सप्ताहांत में तेजी से इस्तेमाल में लिया गया क्योंकि कोरोना वायरस महामारी की वजह से संयुक्त राज्य अमेरिका में 2,000 से अधिक लोगों की मौत हो गई है जिसमें टेक्सास में 34 लोगों की मौत शामिल है।
मेथोडिस्ट ने शुक्रवार को 250 मरीजों से ब्लड प्लाज्मा लेना शुरू किया जिनकी इस वायरस से पीड़ित होने की जानकारी जांच से सामने आई है। ह्यूस्टन मेथोडिस्ट के अध्यक्ष और सीईओ मार्क बूम ने कहा कि उन्हें कोशिश करने के लिए बाध्य होना पड़ा।
उन्होंने एक बयान में कहा कि इस बीमारी के प्रकोप के दौरान इसके बारे में जानने के लिए बहुत कुछ है। यदि कोनवालेस्सेंट सीरम थेरेपी से गंभीर रूप से बीमार किसी रोगी के जीवन को बचाने में मदद मिलती है तो हमारे द्वारा हमारे ब्लड बैंक, हमारे विशेषज्ञ संकाय और हमारे शैक्षणिक चिकित्सा के पूर्ण संसाधनों को इस्तेमाल में लेना अविश्वसनीय रूप से सार्थक और महत्वपूर्ण होगा।
कोविड-19 से ठीक हुए किसी व्यक्ति के प्लाज्मा में एंटीबॉडी होते हैं जो प्रतिरोधक प्रणाली द्वारा वायरस पर हमला करने के लिए बनाए जाते हैं। आशा है कि इस तरह के प्लाज्मा को एक रोगी में स्थानांतरित करने के बाद उसमें इस वायरस से लड़ने के लिए एंटीबॉडी की शक्ति स्थानांतरित की जा सकेगी।