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कोरोना की वजह से प्रभावित हुआ एचआईवी मरीजों का इलाज, 3.8 करोड़ लोगों पर मंडराया खतरा
Tue, 07 Jul 2020 08:17 AM IST
अनवर अंसारी
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
Published by: अनवर अंसारी
Updated Tue, 07 Jul 2020 08:17 AM IST
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एचआईवी एड्स
- फोटो : सोशल मीडिया
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दुनियाभर में 2019 के आखिर तक तीन करोड़ 80 लाख लोग एचआईवी (ह्यूमन इम्यूनोडिफिशिएंसी वायरस) संक्रमित थे। सोमवार को संयुक्त राष्ट्र की जारी हुई वार्षिक रिपोर्ट में इस बात की जानकारी दी गई है। रिपोर्ट में कहा गया, दुनियाभर में 71 लाख लोग ऐसे हैं, जिन्हें ये नहीं पता कि वे संक्रमित हैं।
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एचआईवी/एड्स पर संयुक्त राष्ट्र कार्यक्रम (यूएनएड्स) की रिपोर्ट में बताया गया, 2019 में अकेले 17 लाख के करीब लोग एचआईवी से संक्रमित हो गए। इसमें बताया गया है, दुनियाभर में फैली कोरोना वायरस महामारी के चलते एचआईवी रोगियों का इलाज प्रभावित हो रहा है। साल 1998 में एचआईवी/एड्स अपने चरम पर था, तो उस दौरान करीब 28 लाख लोग संक्रमित हुए थे।
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रिपोर्ट में कहा गया, यदि कोविड-19 की वजह से एचआईवी से रोकथाम और इलाज प्रभावित होता रहता है, तो इसे रोकने की प्रक्रिया 10 या उससे अधिक सालों तक पीछे जा सकती है। अब तक, दुनियाभर में सात करोड़ 57 लाख लोग एचआईवी से संक्रमित हुए हैं और तीन करोड़ 27 लाख लोगों ने इसके चलते अपनी जान गंवाई है।
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2019 में, 6,90,000 लोगों की एचआईवी/एड्स बीमारी के चलते मौत हो गई और एक करोड़ 26 लाख संक्रमित लोग एचआईवी/एड्स के इलाज में प्रयोग की जाने वाली 'एंटीरेट्रोवाइरल थेरेपी' से वंचित रहे।
यूएनएड्स की कार्यकारी निदेशक विनी ब्यानयीमा ने कहा, कलंक, भेदभाव और बड़े स्तर पर फैली असमानता एड्स को खत्म करने में सबसे बड़ी बाधाएं हैं, अगले दशक के हर दिन हमें निर्णायक कदम उठाने होंगे, ताकि दुनिया से 2030 तक एड्स महामारी को खत्म किया जा सके।
2019 में सामने नए एचआईवी संक्रमण मामलों में से 62 फीसदी सबसे कमजोर वर्गों और उनके यौन साझेदारों के बीच सामने आए। इनमें वे पुरुष जिन्होंने पुरुषों के साथ संबंध बनाए, यौनकर्मी, ड्रग्स का इंजेक्शन लगाने वाले लोग और जेल में बंद लोग शामिल हैं।
पूर्व स्वास्थ्य सचिव और राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (एनएसीओ) के संस्थापक-निदेशक जेवीआर प्रसाद राव ने कहा, यह पहली बार है जब यूएनएड्स ने 2020 के लक्ष्यों को पूरा करने में विफल देशों और बहुराष्ट्रीय एजेंसियों की सामूहिक विफलता को स्वीकार किया है। उन्होंने बताया, दुनियाभर के देशों ने इस बीमारी को रोकने के लिए ज्यादा ध्यान नहीं दिया।