फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Coronavirus North Korea report coronavirus cases, pyongyang Kim Jong un, China Wuhan Hubei

चीन के हर पड़ोसी देश में कोरोनावायरस के संक्रमित मरीज, लेकिन उत्तर कोरिया में अब तक कैसे नहीं पुष्टि

Sat, 08 Feb 2020 07:05 PM IST
अनवर अंसारी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: अनवर अंसारी Updated Sat, 08 Feb 2020 07:05 PM IST
विज्ञापन
Coronavirus North Korea report coronavirus cases, pyongyang Kim Jong un, China Wuhan Hubei
उत्तर कोरिया - फोटो : Pixabay

चीन के वुहान शहर से फैले जानलेवा कोरोनावायरस को अब तक दो महीने हो चुके हैं। यह वायरस दक्षिण-पूर्वी एशिया के लगभग हर देश और प्रांत में फैल चुका है, साथ ही पूरी दुनिया कोरोनावायरस का दंश झेल रही है। लेकिन यहां चौंकाने वाली बात यह है कि लगभग दक्षिण एशिया के हर देश ने अपने यहां वायरस से संक्रमित मरीजों की पुष्टि की है पर चीन का पड़ोसी उत्तर कोरिया एक मात्र ऐसा देश है, जहां ना तो वायरस से संक्रमित लोगों की पुष्टि हुई, ना ही किसी की मौत की खबर है। 

विज्ञापन


दुनिया के सबसे गरीब देशों में से एक उत्तर कोरिया इस तथ्य के बावजूद वायरस से बचने में कामयाब रहा कि पड़ोसी चीन में अब तक 600 से अधिक लोगों की मौत हो गई है और 35,000 से अधिक लोगों को संक्रमित कर चुका हैं।
विज्ञापन


दुनिया भर की 25 जगहों में 300 से अधिक लोग कोरोनावायरस टेस्ट में पॉजीटिव पाए गए हैं, जिनमें उत्तर कोरिया से सीमा साझा करने वाले दो देश रूस और दक्षिण कोरिया भी शामिल है। असल में, उत्तर कोरिया के 1500 मील की परिधि में स्थित हर देश और प्रांत ने कोरोनावायरस से संक्रमित लोगों को पुष्टि की है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


यह अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है कि उत्तर कोरिया ने अब तक खुद को इस वायरस से कैसे बचाया हुआ है। प्योंगयांग या तो बहुत भाग्यशाली रहा है, या वह इस मामले में कुछ साझा नहीं करना चाहता है। वहीं, कुछ लोगों का मानना है कि उत्तर कोरिया एकांतवासी देश होने का फायदा भी उठा रहा है। 

उत्तर कोरिया के सीमा बंद करने से पहले गुजरे कई चीनी ट्रक

उत्तर कोरिया ने अभी तक कोरोनावायरस से संक्रमित लोगों की पुष्टि नहीं है, लेकिन दक्षिण कोरिया की खुफिया जांच एजेंसी 'नेशनल इंटेलिजेंस सर्विस' (एनआईएस) द्वारा संचालित थिंक टैंक के प्रमुख के रूप में कार्य कर चुके और वर्तमान में कोरिया विश्वविद्यालय में प्रोफेसर नाम सुंग-वुक ने कहा कि 2.5 करोड़ आबादी वाले उत्तर कोरिया में यह बहुत संभव है कि कोई ना कोई कोरोनावायरस से संक्रमित हुआ हो। 

शोधकर्ता अभी तक निर्धारित नहीं कर पाए है कि यह वायरस कैसे फैला, लेकिन उन्हें विश्वास है कि यह हवा के माध्यम से तो नहीं फैला है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि वायरस मल के माध्यम से फैल सकता है या इसके लक्षणों के बिना संक्रमित रोगी इसे दूसरों को दे सकता हैं। लेकिन नाम को संदेह है कि किसी चीनी मरीज ने उत्तर कोरिया के किसी व्यक्ति को अपनी साझा सीमा के पार कोरोनावायरस से संक्रमित किया होगा। 

नाम ने सीएनएन को कहा कि हम जानते हैं कि चीन क्षेत्र उत्तर कोरिया सीमा से सटा हुआ है। चीन के डांडोंग और शेनयांग शहर जो उत्तर कोरिया की सीमा के पास बसे हुए हैं, वहां भी कोरोनावायरस से संक्रमित लोगों की पुष्टि हुई है। 

उन्होंने कहा कि उत्तर कोरियाई व्यापार का लगभग 90 फीसदी चीन के साथ है और हम जानते हैं कि देश में वायरस को रोकने के लिए उत्तर कोरिया द्वारा हाल के नियमों को लागू करने से पहले ट्रक और ट्रेन दोनों देशों के बीच सीमा से गुजरे थे। 

उत्तर कोरिया वायरस को रोकने के लिए उठाएं ये कदम

सार्वजनिक रूप से किसी भी पुष्टि या यहां तक कि संदिग्ध मामलों को स्वीकार नहीं करने के बावजूद, उत्तर कोरिया वायरस का मुकाबला करने के अपने प्रयासों के बारे में स्पष्ट रूप से पारदर्शी नहीं रहा है। देश की सरकारी न्यूज एजेंसी केसीएनए की रिपोर्टों के अनुसार उत्तर कोरिया महामारी को बेदह ही गंभीरता से ले रहा है। 

उत्तर कोरिया की एक ट्रैवल एजेंसी के अनुसार, प्योंगयांग ने सभी विदेशी नागरिकों के सीमा के भीतर प्रवेश पर पांबदी लगा दी है, जिनमें से ज्यादातर चीनी नागरिक थे, जो व्यापार के लिए यहां आते थे। एजेंसी ने बताया कि उत्तर कोरिया ने साल 2014 में इबोला वायरस के प्रसार को रोकने के लिए भी ऐसा ही कदम उठाया था। 

सरकारी न्यूज एजेंसी केसीएनए ने 30 जनवरी को खबर दी कि उत्तर कोरिया ने राज्य आपातकाल की घोषणा की है और कोरोनावायरस के रोकथाम के लिए एक मुख्यालय की स्थापना की गई है। सोमवार को केसीएनए ने कहा कि 13 जनवरी के बाद देश में आने वाले सभी लोगों को चिकित्सा निगरानी में रखा गया है। 

केसीएनए ने बताया कि उत्तर कोरियाई स्वास्थ्य अधिकारियों ने देश भर में सैंपलों की जांच के लिए परिवहन व्यवस्था को तैयार किया और कहा कि कोरोनावायरस के संदिग्ध मामलों का तुरंत निदान करने की क्षमता है।

हालांकि, सीएनएन से बात करने वाले कई विशेषज्ञों को प्योंगयांग के कोरोनावायरस के परीक्षण की क्षमता पर संदेह हैं और देश की गहन गोपनीयता को देखते हुए यह संभावना नहीं है कि दुनिया कभी भी जान पाएगी कि उत्तर कोरिया ने वास्तव में क्या उपाय किए हैं।

सूचना छिपाने का उत्तर कोरिया पर आरोप लगता रहा है

उत्तर कोरिया को दुनिया के सबसे अधिक समावेशी और गुप्त राज्यों में से एक माना जाता है। किम जोंग उन के नेतृत्व में प्योंगयांग के बारे में जानकारी प्राप्त करना कठिन है। ऐतिहासिक रूप से देश का स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र इससे अलग नहीं है। 1990 के विनाशकारी अकाल के दौरान उत्तर कोरिया ने कभी औपचारिक रूप से स्वीकार नहीं किया कि कितने लोग इससे मारे गए। 

विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस दौरान लगभग 20 लाख लोगों की मौत हुई थी और जो लोग उस दौरान उत्तर कोरिया से भागने में कामयाब हुए, वह वहां से बद से बदतर हालात का भयावह कहानियां साझा करते थे। 

हुंडई मोटर-कोरिया फाउंडेशन के निदेशक जीन ली ने कहा कि उत्तर कोरिया के पास बुनियादी चिकित्सा की इतनी सीमित आपूर्ति है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारियों को निवारक दवा पर ध्यान देने की आवश्यकता होती है। वे किसी भी तरह की महामारी से निपटने के लिए तैयार नहीं होंगे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed