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कोरोना वायरसः अमेरिका ने किया वैक्सीन का पहला परीक्षण, बदले में दे रहा 100 डॉलर

Tue, 17 Mar 2020 09:25 AM IST
आसिम खान वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: आसिम खान Updated Tue, 17 Mar 2020 09:25 AM IST
सार

  • 4 लोगों पर शुरुआती परीक्षण, 45 अन्य लोगों पर होगा प्रयोग
  • पहला परीक्षण सीएटल की 46 वर्षीय जेनिफर हॉलर पर
  • ट्रंप को उम्मीद, जुलाई तक जीत लेंगे कोरोना के खिलाफ जंग

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Coronavirus Vaccine: Coronavirus may end in US by July says Donald Trump
jennifer haller - फोटो : Social Media

विस्तार

अमेरिका ने कोरोना वायरस के लिए तैयार की जा रही वैक्सीन का पहला परीक्षण वाशिंगटन के सीएटल शहर में यहां की एक स्थानीय महिला 43 साल की जेनिफर हॉलर पर किया है। यहां के पी वाशिंगटन रिसर्च इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बेहद सावधानी के साथ चार ऐसे मजबूत इच्छाशक्ति वाले सेहतमंद लोगों को इस परीक्षण के लिए चुना है।
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इनमें से पहली हैं जेनिफर हॉलर जिनके दो बच्चे हैं। वैक्सीन के परीक्षण का पहला इंजेक्शन लगवाने के बाद जेनिफर ने बेहद खुशी जताते हुए कहा कि उन्हें बहुत अच्छा लग रहा है। इस अध्ययन और प्रयोग की टीम लीडर डॉ लीजा जैक्सन हैं। लीजा मानती हैं कि वैक्सीन के पहले चरण में परीक्षण के लिए तैयार इन चार लोगों के साथ अब हम टीम कोरोना वायरस हो गए हैं।
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ऐसे मौके पर हर कोई यही चाहता है कि इस आपात स्थिति से निपटने के लिए वह क्या और कैसे करे। जेनिफर सीएटल में ही एक टेक कंपनी में ऑपरेशन मैनेजर हैं। इनके अलावा तीन और लोगों को इस परीक्षण का इंजेक्शन लगाया जाना है। इसके अलावा 45 अन्य लोगों को भी इसका हिस्सा बनाया जाएगा और इन्हें एक महीने के बाद दो और डोज दिए जाएंगे।
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ब्रॉथल के रहने वाले 46 साल के ही नील ब्राउनिंग भी एक माइक्रोसॉफ्ट नेटवर्क इंजीनियर हैं, जो इस परीक्षण टीम के सदस्य हैं। उनका कहना है कि उनकी बेटियां इस तरह के सामाजिक काम के लिए उन्हें बेहद प्रोत्साहित करती हैं और गर्व महसूस करती हैं।

उनकी बेटियां मानती हैं कि ये दुनिया के उन तमाम लोगों को बचाने के लिए बेहद जरूरी है कि कोई न कोई तो यह जोखिम उठाए।
 
यूएस नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के डॉ एंथनी फॉसी का कहना है कि अगर यह परीक्षण कामयाब रहा, तो अगले 12 से 18 महीनों के बाद ही यह वैक्सीन दुनिया भर में इस्तेमाल की जा सकेगी।

गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस परीक्षण से उम्मीद जताते हुए दावा किया है कि जुलाई तक अमेरिका कोरोना से मुक्त हो जाएगा। उन्होंने यह श्रेय लेने की भी कोशिश की अमेरिका में ही इस खतरनाक वायरस का पहला वैक्सीन इतने कम वक्त में बन कर तैयार होने की उम्मीद है।

चीनी वैज्ञानिकों ने 65 दिन पहले इसके बारे में जानकारियां दी थीं और यह वैक्सीन परीक्षण के लिए इतनी जल्दी तैयार कर लिया गया। इसे मॉडर्ना इंक नाम की कंपनी विकसित कर रही है।

इस समय दुनिया के तमाम देशों में कोरोना वैक्सीन पर काम हो रहा है। दर्जनों रिसर्च इंस्टीट्यूट इस पर काम कर रहे हैं। अमेरिका, चीन और दक्षिण कोरिया में भी अगले महीने तक ऐसे ही वैक्सीन पर काम होने की संभावना है जिसे इनोवियो फार्मास्युटिकल्स बना रही है।


सीएटल में हुए इस परीक्षण की तैयारी उस दिन के बाद से ही तेजी के साथ शुरू हो गई थी, जिस दिन विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना को एक महामारी घोषित किया था।
इस परीक्षण के लिए 18 से 55 साल के बीच के ऐसे लोगों को चुना जा रहा है जो भीतर से मजबूत हों और जो वैक्सीन के कड़ी डोज को भी बर्दाश्त कर सकें।

इस परीक्षण के लिए चुने गए लोगों को प्रयोग के लिए जितनी बार क्लिनिक बुलाया जाएगा, इसके लिए उन्हें 100 डॉलर भी दिए जाएंगे।
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