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कोरोना की वजह से 1.6 अरब छात्र प्रभावित, 2.38 करोड़ बच्चे छोड़ सकते हैं पढ़ाई
Wed, 05 Aug 2020 08:51 AM IST
संजीव कुमार झा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Wed, 05 Aug 2020 08:51 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : पीटीआई
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कोरोना महामारी से पूरी दुनिया जूझ रही है। भारत समेत अधिकतर देशों में स्कूल और कालेज बंद हैं। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटरेस ने कहा कि कोविड-19 ने इतिहास में शिक्षा के क्षेत्र में अब तक का सबसे लंबा अवरोध पैदा किया है। इस बीमारी से दुनियाभर के सभी देशों और महाद्वीपों के करीब 1.6 अरब छात्र प्रभावित हुए है।
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गुटरेस ने कहा कि कोरोना के चलते अतिरिक्त 2.38 करोड़ बच्चे अगले साल स्कूल की पढ़ाई बीच में छोड़ सकते हैं। शिक्षा व्यक्तिगत विकास और समाज के भविष्य की कुंजी है। यह असमानता को दूर करती है। यह ज्ञानवान, सहिष्णु समाज के सतत विकास का प्राथमिक संचालक होती है।
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कहा कि जुलाई के मध्य में 160 से अधिक देशों में स्कूल बंद कर दिए गए, जिससे एक अरब से अधिक छात्र प्रभावित हुए और दुनियाभर में कम से कम चार करोड़ बच्चे अपने स्कूल के शुरुआती महत्वपूर्ण समय में शिक्षा प्राप्त नहीं कर सके। महामारी ने शिक्षा में असमानता को बढ़ाया। लंबे समय तक स्कूलों के बंद रहने से पढ़ाई को नुकसान से पिछले कुछ दशकों में हुई प्रगति के पिछड़ने का खतरा है।
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यूएन ने कहा, गरीब बच्चों के पिछड़ने का खतरा
गुटरेस ने कहा, दुनिया के सामने असमानता का अस्थायी स्तर है और ऐसे में शिक्षा की हमेशा से अधिक जरूरत है। भविष्य के लिहाज से समावेशी, लचीली और अच्छी शिक्षा प्रणाली के लिए साहसिक कदम उठाने होंगे। शारीरिक रूप से अक्षम, अल्पसंख्यक, वंचित तबकों, विस्थापित और शरणार्थी छात्रों व दूरदराज के इलाकों में रहने वाले छात्रों के पिछड़ने का जोखिम अधिक है।