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Coronavirus: फिर आ सकती है कोविड जैसी महामारी, रिपोर्ट में दावा- हर दिन हो सकती है 15 हजार की मौत!

Fri, 14 Apr 2023 01:41 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नितिन गौतम Updated Fri, 14 Apr 2023 01:41 PM IST
सार

कंपनी का कहना है कि अगर हालात बिगड़ते हैं और काबू से बाहर हो जाते हैं तो बर्ड फ्लू जैसे वायरस के संक्रमण से अकेले ब्रिटेन में ही हर दिन 15 हजार लोगों की मौत हो सकती है। 

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Coronavirus like pandemic risk in next decade expert tells reason
डब्ल्यूएचओ का कहना है कि यूरोप कोरोना महामारी का नया केंद्र बन गया है। - फोटो : Social Media

विस्तार

करीब तीन साल बीत जाने के बाद भी दुनिया कोरोना महामारी के साए से पूरी तरह मुक्त नहीं हो पाई है। अब एक नई रिपोर्ट ने चिंता को और बढ़ा दिया है। दरअसल एक स्वास्थ्य विश्लेषक फर्म ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि 27.5 प्रतिशत आशंका है कि अगले दशक में कोरोना जैसी एक और खतरनाक महामारी दुनिया में दस्तक दे सकती है। हालांकि रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि समय से महामारी की वैक्सीन बनाकर उसके खतरे को कम किया जा सकता है। 

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क्या है रिपोर्ट में
लंदन की Airfinity Ltd. नामक फर्म का दावा है कि जलवायु परिवर्तन, अंतरराष्ट्रीय यात्राओं में बढ़ोतरी, बढ़ती जनसंख्या और जानवरों से इंसानों में फैलने वाली बीमारियों के चलते महामारी फैलने की आशंका बनी हुई है। हालांकि कंपनी ने ये भी कहा है कि अगर नई संक्रामक बीमारी का पता चलने के बाद 100 दिनों के भीतर ही उसकी वैक्सीन बना ली जाएगी तो महामारी का खतरा कम होकर 8 प्रतिशत तक रह जाएगा। 
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कंपनी का कहना है कि अगर हालात बिगड़ते हैं और काबू से बाहर हो जाते हैं तो बर्ड फ्लू जैसे वायरस के संक्रमण से अकेले ब्रिटेन में ही हर दिन 15 हजार लोगों की मौत हो सकती है। बीते  दो दशकों में दुनिया ने तीन बड़ी महामारी देखी हैं, जिनमें कोरोना महामारी, सार्स, MERS और स्वाइन फ्लू जैसी महामारी शामिल है। 
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H5N1 बर्ड फ्लू का संक्रमण भी चिंता बढ़ा रहा है। हालांकि अभी इससे संक्रमित लोग की संख्या कम है और इसके इंसानों से इंसानों में फैलने के भी संकेत नहीं मिले हैं। हालांकि पक्षियों और स्तनधारी जीवों में फैलने की दर तेज है, जिससे चिंता बनी हुई है। कई खतरनाक बीमारियों जैसे जीका, मर्स आदि का वैक्सीन भी अभी तक नहीं मिल सकी है। ऐसे में स्वास्थ्य वैज्ञानिकों को तुरंत ऐसे कदम उठाने होंगे, जिससे भविष्य में आने वाली महामारी से निपटा जा सके। 

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