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Hindi News ›   World ›   Coronavirus Delta variant mutation discovered know why is COVID19 developing into dangerous forms and why it is worrying scientists explained

खतरनाक हुआ कोरोना: भारत में मिले डेल्टा वैरिएंट से कितना अलग है ब्रिटेन में मिला नया स्वरूप? वैज्ञानिकों की चिंता क्यों बढ़ी?

Fri, 22 Oct 2021 03:45 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन/न्यूयॉर्क/नई दिल्ली
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन/न्यूयॉर्क/नई दिल्ली Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Fri, 22 Oct 2021 03:45 PM IST
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सार
ब्रिटेन में कोरोनावायरस संक्रमितों की संख्या बीते तीन दिनों से 50 हजार के करीब है। वैज्ञानिकों का कहना है कि कोरोना के डेल्टा वैरिएंट के विकसित रूप की वजह से ऐसा हो रहा है। उनका कहना है कि अगर कोविड-19 का यह रूप जल्द नहीं रोका गया, तो ब्रिटेन में जल्द ही चौथी लहर आ सकती है।
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Coronavirus Delta variant mutation discovered know why is COVID19 developing into dangerous forms and why it is worrying scientists explained
कोरोनावायरस के खतरनाक स्वरूप। - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

कोरोना का असर पूरी दुनिया पर एक बार फिर दिखने लगा है। ब्रिटेन में करीब एक हफ्ते से हर दिन 40 हजार से ज्यादा केस देखे जा रहे हैं। बीते तीन दिन की ही बात कर लें, तो यहां प्रतिदिन 50 हजार के करीब संक्रमित मिल रहे हैं। इतना ही नहीं, कोरोना के नए केस अमेरिका और रूस जैसे देशों में भी हैं। ये आंकड़े चौंकाने वाले इसलिए भी हैं, क्योंकि ब्रिटेन की लगभग 70 फीसदी, अमेरिका की करीब 60 फीसदी और रूस की 35 फीसदी आबादी को कोरोना वैक्सीन की दोनों डोज मिल चुकी हैं।

इस बीच, वैज्ञानिकों ने चिंता जताई है कि इन देशों में अचानक से कोरोना केस बढ़ने की वजह डेल्टा वैरिएंट का विकसित रूप हो सकता है। ब्रिटिश और अमेरिकी रिसर्चरों ने कोरोना के नए विकसित रूप पर निगरानी रखना भी शुरू कर दिया है और इस पर ज्यादा जानकारी सामने आना जारी है। 

कैसे पनपा कोरोना का ये नया सबवैरिएंट? पिछली रूपों से कितना अलग?

चीन में कोरोनावायरस के शुरुआती कुछ केस मिलने के बाद यह वायरस लगातार विकसित होता रहा है। इसक एक नया रूप ब्रिटेन में पहचाना गया, जिसे अल्फा वर्जन कहा गया। यह स्ट्रेन तब वुहान में मिले कोरोना से 50 फीसदी ज्यादा संक्रामक पाया गया था। यह कुल 172 देशों तक फैला था। इसके बाद दक्षिण अफ्रीका में गामा वर्जन की पहचान हुई, जिसने 120 देशों में कहर मचाया। डेल्टा वर्जन को पहली बार भारत में पाया गया। यह ब्रिटेन में पाए गए अल्फा वैरिएंट से भी 55 फीसदी ज्यादा संक्रामक मिला। 

पिछले छह महीनों में कोरोनावायरस की जो स्ट्रेन सबसे ज्यादा खतरनाक साबित हुई है, वह है डेल्टा स्ट्रेन। इसके चलते भारत को दूसरी लहर और अमेरिका, ब्रिटेन, इजराइल समेत कई अन्य देशों को तीसरी लहर का सामना करना पड़ा है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, कोरोना के यह सभी स्वरूप लगातार विकसित हुए हैं। और हर एक रूप पिछले से ज्यादा संक्रामक और जानलेवा साबित हुआ है। 

ब्रिटेन में कैसे कहर ढा रहा है नया सबवैरिएंट?

ब्रिटेन में कोरोना के केस बढ़ने के साथ ही वैज्ञानिकों ने डेल्टा वैरिएंट का विकसित रूप ढूंढ निकाला। यहां अब तक जितने केसों की जीनोम सीक्ववेंसिंग हुई है, उनमें करीब 10 फीसदी कोरोना के नए स्वरूप के केस थे। इस नए सबवैरिएंट को A.Y.4.2 नाम दिया गया है। यूके की स्वास्थ्य मामलों से जुड़ी संस्था के मुताबिक, डेल्टा वैरिएंट के इस रूप की निगरानी की जा रही है। इसमें स्पाइक प्रोटीन के दो म्यूटेशन (A222V and Y145H) मिले हैं। कोई भी कोरोनावायरस इन्हीं स्पाइक प्रोटीन के जरिए हमारी कोशिकाओं में पहुंचता है। ब्रिटेन की इस खोज के बाद अमेरिका और रूस भी तेजी से अपने नए केसों की जीनोम सीक्वेंसिंग करा रहे हैं। ताजा जानकारी के मुताबिक, जांच शुरू होते ही इन दोनों ही देशों में डेल्टा के नए सबवैरिएंट के कुछ केस पाए गए हैं।

ब्रिटेन में जीनोमिक्स के दो एक्सपर्ट्स के मुताबिक, A.Y.4.2 डेल्टा स्ट्रेन के मुकाबले 10 से 15 फीसदी तक ज्यादा संक्रामक है। यानी अगर कोरोना के इस स्वरूप के बारे में मिली शुरुआती जानकारी को ठीक माना जाए तो यह सबसे खतरनाक स्ट्रेन साबित हो सकता है। अगर A.Y.4.2 के और ज्यादा केस मिलते हैं तो यह वैरिएंट अंडर इन्वेस्टिगेशन (जांच के दायरे में आने वाला कोरोना स्वरूप) बन जाएगा और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) इसे नई पहचान (ग्रीक शब्द से जुड़ा नंबर) देगा। 

कब तक जारी रहेगा कोरोनावायरस का विकसित रहना?

माना जा रहा है कि कोरोनावायरस का विकसित होना और लगातार खतरनाक रूप में उभरना जारी रहेगा। चूंकि, कोरोना टीके दुनिया की लगभग 60 फीसदी आबादी की पहुंच से दूर हैं, इसलिए यह वायरस कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को संक्रमित करना जारी रखेगा। इसके अलग-अलग बीमारियों से पीड़ित लोगों के शरीर में प्राकृतिक तौर पर म्यूटेट होकर और ताकतवर बनने का खतरा भी बरकरार रहेगा। 

भारत में भी मिल चुका है डेल्टा का सबवैरिएंट, पर ब्रिटेन से अलग क्यों रही लड़ाई?

भारत में कोरोना के डेल्टा वैरिएंट ने जमकर कहर बरपाया। इसका एक और सबवैरिएंट- डेल्टा प्लस भी भारत समेत कई देशों में पाया गया। हालांकि, जहां भारत में यह वैरिएंट कुछ खास घातक साबित नहीं हुआ, वहीं अमेरिका और ब्रिटेन में डेल्टा प्लस को तीसरी लहर में डेल्टा वैरिएंट का सहयोगी करार दिया गया। 

दरअसल, भारत में डेल्टा वैरिएंट के जो दो नए म्यूटेशन मिले थे, वे थे A.Y.1 और A.Y.2 (डेल्टा प्लस)। भारत में कुछ केस A.Y.4 के भी मिले, लेकिन ब्रिटेन में अब A.Y.4.2 के मिले हैं, जो कि डेल्टा प्लस से भी ज्यादा विकसित है। वैज्ञानिकों का कहना है कि भारत में जो डेल्टा प्लस मिला था, उसमें अपनी कोई खासियत नहीं थी। वे सिर्फ डेल्टा वैरिएंट की तरह ही संक्रामक रहे। इसके चलते जब तक यह वैरिएंट भारत में फैला, तब तक लोगों में डेल्टा वैरिएंट के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो चुकी थी। इसकी वजह से डेल्टा प्लस भारत में निष्क्रिय रहा। 

आखिरी बार इस बारे में आईसीएमआर के महानिदेशक बलराम भार्गव की तरफ से 2 सितंबर को जानकारी मिली थी। उनके मुताबिक, डेल्टा प्लस भारत में 11 जून को पाया गया। लेकिन तब से दो सितंबर तक भारत में इस सबवैरिएंट के सिर्फ 300 मामले ही दर्ज किए जा सके। भारत में चलाए गए टीकाकरण अभियान ने भी डेल्टा प्लस वैरिएंट के प्रसार को काफी हद तक रोका। इसका असर यह रहा कि भारत में कोरोना के मामले अब 15 हजार के करीब आकर ठहर गए हैं। 

उधर, ब्रिटेन में तेजी से चलाए जा रहे टीकाकरण अभियान के बीच पिछले सितंबर तक कोरोना के मामले 26 हजार प्रतिदिन पर आ गए थे। लेकिन इसके बाद संक्रमितों की संख्या तेजी से बढ़ी है। वैज्ञानिकों ने जीनोम सीक्वेंसिंग में इसके पीछे A.Y.4.2 को शुरुआती वजह बताया है। ऐसे में यह लगभग तय है कि जहां भारत में डेल्टा प्लस की वजह से कोरोना केसों में कोई खास बढ़ोतरी देखने को नहीं मिली, वहीं ब्रिटेन में नए सबवैरिएंट से संक्रमितों का आंकड़ा एक हफ्ते में ही 16 फीसदी तक बढ़ गया। ब्रिटेन में अब आगे की स्थिति इस वायरस की प्रसार क्षमता और संक्रामकता पर निर्भर करती है, जिसका अंदाजा वैज्ञानिक अगले एक हफ्ते के अंदर लगा लेंगे।
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