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डेल्टा वैरिएंट बना टेंशन: इस्राइल में कोरोना संक्रमण के बढ़े मामलों ने पूरी दुनिया को चिंता में डाला

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेल अवीव Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 26 Jun 2021 04:32 PM IST

सार

जानकारों के मुताबिक इस संक्रमण का कारण मुख्य तौर पर कोरोना वायरस का डेल्टा वैरिएंट है। यह स्कूलों में तेजी से फैला है। इससे कई विशेषज्ञ इस्राइल में 12 से 15 साल के किशोरों को भी वैक्सीन लगाने की वकालत करने लगे हैं...
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इस्राइल में वैक्सीनेशन
इस्राइल में वैक्सीनेशन - फोटो : Agency
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विस्तार

इस्राइल में कोरोना महामारी की नई लहर आ जाने से दुनियाभर के विशेषज्ञ चिंतित हैं। इसकी वजह यह है कि इस्राइल की ज्यादातर आबादी को कोरोना वायरस वैक्सीन के दोनों डोज लगाए जा चुके हैं। इसके बावजूद वहां संक्रमित लोगों की बढ़ रही संख्या से वैक्सीन के असर से हर्ड इम्यूनिटी विकसित होने की परंपरागत समझ पर सवाल खड़े हो गए हैं।
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इस्राइल में पिछले चार दिन में कोरोना वायरस संक्रमण के रोज 100 या उससे ज्यादा नए मामले सामने आए हैं। हालांकि दूसरे देशों की तुलना में ये संख्या बहुत कम है, लेकिन अप्रैल के बाद इस्राइल में पहली बार संक्रमण के मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जानकारों के मुताबिक इस संक्रमण का कारण मुख्य तौर पर कोरोना वायरस का डेल्टा वैरिएंट है। यह स्कूलों में तेजी से फैला है। इससे कई विशेषज्ञ इस्राइल में 12 से 15 साल के किशोरों को भी वैक्सीन लगाने की वकालत करने लगे हैं।


इस्राइल शेबा मेडिकल सेंटर में सेंटर फॉर ट्रेवल मेडिसीन एंड ट्रॉपिकल डिजीजेस के निदेशक इयाल लेशेम ने वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम से कहा- ‘इस्राइल टीकाकरण की अग्रिम प्रयोगशाला है। यहां 50 वर्ष से अधिक उम्र के 90 फीसदी लोगों को टीका लगाया जा चुका है।’ वैसे इस्राइल की 90 लाख आबादी में से 60 फीसदी से ज्यादा लोगों का टीकाकरण हो चुका है। टीकाकरण में इस्राइल की कामयाबी का नतीजा हुआ कि वहां संक्रमण के मामलों में भारी गिरावट आई। पिछले जनवरी में रोज दस हजार से ज्यादा नए मामले सामने आ रहे थे। जबकि मई में रोज ऐसे दस से भी कम मामले सामने आए।

लेकिन अब ट्रेंड पलट गया है। नतीजतन, सरकार ने अब घरों के भीतर भी मास्क लगा रखने की सलाह दी है। इस्राइल सरकार ने पहले जुलाई से देश में पर्यटन की इजाजत देने का फैसला किया था। लेकिन अब उस फैसले को अगस्त तक के लिए टाल दिया गया है। यह आदेश भी जारी किया गया है कि जो लोग संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए हैं, वे 14 दिन के लिए खुद क्वारंटीन कर लें। कोरोना महामारी के प्रबंधन के इंचार्ज नेचमान अश ने इसी हफ्ते कहा कि महामारी लौट आई है या संक्रमण के कुछ स्थानीय मामले हुए हैं, इस बारे में अभी कुछ पक्के तौर पर नहीं कहा जा सकता।

इयाल लेशेम ने कहा- ‘हम संक्रमण के मामलों में ठोस बढ़ोतरी देख रहे हैं। लेकिन मरीजों की अवस्था गंभीर होने या अस्पताल की जरूरत पड़ने वाले मामलों में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हुई है।’ इस्राइल में अभी लगभग 50 लोग कोरोना संक्रमण के कारण अस्पतालों में हैं। उनमें ज्यादातर ऐसे हैं, जिन्होंने टीका नहीं लगवाया था। लेशेम ने कहा कि इस्राइल अब एक टेस्ट केस बन गया है। पूरी दुनिया का ध्यान यह देखने पर लगा है कि संपूर्ण टीकाकरण के बाद जिंदगी सामान्य हो जाएगी या नहीं।

लेशेम ने कहा कि उन्हें ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि ये वायरस कभी खत्म नहीं होगा। उन्होंने कहा- ‘जब तक अंतरराष्ट्रीय यात्राएं होती रहेंगी, ये वायरस दुनियाभर में फैलता रहेगा।’ यानी जिन लोगों ने टीका नहीं लिया है, वे संक्रमित होंगे और उनसे ये बीमारी दूर-दूर तक फैलेगी। इस सूरत के मद्देनजर फ्लू के अनुभव की चर्चा होने लगी है। कहा जा रहा है कि जैसे फ्लू खत्म नहीं हुआ, वैसे ही कोरोना संक्रमण पर भी अंतिम रूप से काबू पाना शायद मुश्किल बना रहेगा।

 
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लिस्बन से पुर्तगाल के अन्य हिस्सों में तेजी से फैल रहा डेल्टा

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