कोरोना वायरसः चीन में बाजार पर असर, डाउ जोंस गिरा, ट्रंप ने की मदद की पेशकश
- अमेरिका, जापान समेत कई देश मदद को आगे आए
- बांग्लादेश ने किए एहतियात के सारे उपाय
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कोरोना वायरस का आतंक इस कदर छाया है कि चीन में बाजार पर इसका गंभीर असर नजर आने लगा है। डाउ जोन्स में तेजी से गिरावट दर्ज की जा रही है। डाउ जोन्स सोमवार को 424 अंक तक गिर गया। चीन के बाजार तीन फरवरी तक बंद कर दिए गए हैं। कोरोना के खतरे की वजह से चीन ने छुट्टियां बढ़ा दी हैं। उम्मीद की जा रही है कि शंघाई और शेनजेन के बाजारों में सोमवार से कारोबार फिर शुरू हो जाएगा, लेकिन अधिकारियों ने तमाम कंपनियों को एहतियातन नौ फरवरी तक कामकाज बंद ही रखने को कहा है।
सरकार ने चीन के कोरोना वायरस प्रभावित हुबेई प्रांत से बाहरी लोगों को दूर रहने को कहा है और वहां आने जाने वालों से अपील की है कि अगर बहुत जरूरी न हो तो हुबेई न जाएं। जानलेवा कोरोना वायरस ने अमेरिका को भी चीन के करीब ला खड़ा किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनॉल्ड ट्रंप ने चीन को इस वायरस से निपटने के लिए हर संभव मदद देने का भरोसा दिलाया है। हालांकि चीन का दावा है कि वह इस खतरे से निपटने में पूरी तरह सक्षम है।
उधर यूएस सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के दर्जनों वैज्ञानिक दिन-रात मेहनत करके कोरोना वायरस से बचने के लिए एक वैक्सीन बनाने में लगे हैं। जॉन्संस एंड जॉन्संस के चीफ साइंटिफिक ऑफिसर का दावा है कि कुछ महीने में यह वैक्सीन बाजार में आ जाएगी। इसके लिए अगले कुछ हफ्ते की स्थितियों का गंभारता से अध्ययन किया जा रहा है।
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भरोसा जताया है कि चीनी जनता इस वायरस के खतरे से जल्दी ही निजात पा लेगी और इसके खिलाफ चल रही जंग में जीत जनता की ही होगी। शी जिनपिंग चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव भी हैं और उन्होंने पार्टी के स्तर पर इस खतरे को बेहद गंभीरता से और प्राथमिकता के तौर पर लिया है।
उन्होंने पार्टी की बैठक में साफ तौर पर निर्देश दिया है कि यह पार्टी की जिम्मेदारी है कि वह युद्धस्तर पर इसके लिए काम करे। उन्होंने कहा कि पार्टी कार्यकर्ता इसके लिए घरों से बाहर निकलें और बहादुरी के साथ जनता की जीवन रक्षा के लिए पूरे वैज्ञानिक तरीके से जी जान से जुट जाएं। शी जिनपिंग ने कहा कि यह चीन के लिए परीक्षा की घड़ी है।
जाहिर है चीन ने जिस तरह इसे लेकर हर स्तर पर कोशिशें की हैं, उससे साफ है कि इस वायरस ने चीन सरकार और पार्टी को बेहद चिंतित कर रखा है और यह भी माना जा रहा है कि कोरोनावायरस के आतंक की जितनी रिपोर्ट सामने आ रही है, जमीनी हालत इससे भी कहीं बदतर है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि अमेरिकी डॉक्टर और वैज्ञानिक इस वायरस से निपटने के लिए चीन की हर मदद करने को तैयार है। यह वायरस चीन से दूसरे देशों में भी तेजी से फैल रहा है। जापान, दक्षिण कोरिया, थाइलैंड और सिंगापुर में भी इसके मामले पाए जा रहे हैं। वुहान से अमेरिका आने वाले पांच यात्री इस वायरस की चपेट में पाए गए हैं।
सीडीसी ने आशंका जताई है कि आदमी से आदमी में फैलने वाले इस संक्रामक वायरस के शिकार और लोग भी सामने आ सकते हैं और इसमें ताज्जुब नहीं कि यह वायरस कुछ अस्पतालों में भी फैल जाए। सीडीसी वुहान से आने वाले हर यात्री की जांच कर रही है खासकर लॉस एंजेल्स, न्यूयार्क, सैन फ्रांसिस्को, शिकागो और अटलांटा हवाई अड्डों पर।
अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि एक विशेष विमान के जरिये वुहान में मौजूद तमाम अमेरिकी नागरिकों और राजनयिकों को वहां से सुरक्षित वापस लाया जा रहा है। अमेरिका के अलावा जापान और दूसरे देश भी चीन को इस महामारी के संकट से उबारने में मदद कर रहे हैं। सुरक्षा के लिए लाखों की संख्या में मास्क भेजे जा रहे हैं, डॉक्टर्स और वैज्ञानिकों के दल वहां पहुंच रहे हैं और कोशिश हो रही है कि जल्दी से जल्दी इस वायरस के खतरे को खत्म किया जा सके।
उधर, बांग्लादेश में भी चीन और कोरिया से आने वाले सभी यात्रियो पर निगरानी रखी जा रही है। बांग्लादेश के विदेश मंत्री ए के अब्दुल मोमेन ने कहा है कि ऐसे हर यात्री की पूरी जांच की जा रही है, साथ ही उसका पूरा रिकॉर्ड रखा जा रहा है, ताकि ऐसे किसी भी खतरे से बचा जा सके।
बांग्लादेश सीमा पर तैनात सुरक्षाबलों को निर्देश दिया जा चुका है कि वह आने जाने वाले हर नागरिक की निगरानी और मेडिकल जांच कराए ताकि कोरोना वायरस के खतरे को वहीं रोका जा सके। बांग्लादेश ने पहले ही इसके लिए सीमा पर मेडिकल कैंप बना रखे हैं, साथ ही हवाई अड्डों पर सुरक्षा और जांच को और सख्त कर दिया गया है।