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कोरोना: आखिर इस वायरस के आगे इतनी असहाय क्यों है दुनिया, कैसे खत्म होगा आठ अरब लोगों पर संकट?

Mon, 03 May 2021 09:27 PM IST
सुरेंद्र जोशी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, जिनेवा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, जिनेवा Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Mon, 03 May 2021 09:27 PM IST
सार

बढ़ते मामलों के कारण तुर्की को पिछले हफ्ते पहली बार लॉकडाउन लगाना पड़ा। बीते हफ्ते ही ईरान में एक दिन में सबसे ज्यादा मामले सामने आने का रिकॉर्ड बना। ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने कहा है कि देश कोविड-19 महामारी की चौथी लहर झेल रहा है।

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Corona: Why is the world so helpless in front of this virus, how will eight billion people save their lives
new Corona strain - फोटो : iStock

विस्तार

कोरोना महामारी की नई लहर से भारत के अलावा कई अन्य देश भी परेशान हैं। ऐसे में सवाल यह है कि आखिर पूरी दुनिया इस वायरस के आगे इतनी लाचार क्यों है? दुनिया के आठ अरब लोगों पर मंडराता यह संकट कैसे खत्म होगा? यदि टीकाकरण ही है इसका समाधान तो इतनी बड़ी मात्रा में वैक्सीन कैसे लग पाएंगे?

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ईरान झेल रहा चौथी लहर
बढ़ते मामलों के कारण तुर्की को पिछले हफ्ते पहली बार लॉकडाउन लगाना पड़ा। बीते हफ्ते ही ईरान में एक दिन में सबसे ज्यादा मामले सामने आने का रिकॉर्ड बना। ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने कहा है कि देश कोविड-19 महामारी की चौथी लहर झेल रहा है। उधर लैटिन अमेरिकी देश ब्राजील में बड़ी संख्या में नए संक्रमण और मौतों पर काबू पाना मुश्किल बना हुआ है।
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पश्चिम देशों में नई लहर की आशंका
अमेरिका की जॉन हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के मुताबिक प्रति 10 लाख आबादी के अनुपात में सबसे ज्यादा मौतें अब भी ब्राजील में ही हो रही हैं। इससे पश्चिमी देशों में भी नई लहर की आशंका गहरा रही है, जो कुछ दिन पहले तक आम जिंदगी शुरू करने की योजना बना रहे थे।
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वैक्सीन के पेटेंट खत्म करने की संभावना
गहराते संकट के कारण जिनेवा स्थित विश्व व्यापार संगठन (डब्लूटीओ) में कोरोना वैक्सीन पर से पेटेंट हटाने या स्थगित का मामला गरमाता जा रहा है। अगर पेटेंट (बौद्धिक संपदा अधिकार) को हटाया गया, तो जिस फॉर्मूले से कंपनियों ने वैक्सीन तैयार किए हैं, उसकी तकनीक और उन वैक्सीन को बनाने का ज्ञान उन्हें अलग-अलग देशों की वैक्सीन निर्माता कंपनियों से साझा करना होगा। उससे इन वैक्सीन के डोज ज्यादा बड़ी संख्या में तैयार किए जा सकेंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना वायरस पर काबू पाने का एकमात्र उपाय पूरी दुनिया में सबका टीकाकरण ही है। 

टीकों पर धनी देशों का कब्जा

दुनिया में इस समय वैक्सीन डोज की बेहद कमी है। जो डोज फाइजर-बायोएनटेक, मॉडर्ना, जॉनसन एंड जॉनसन और एस्ट्राजेनेका कंपनियों ने बनाए हैं, उनके ज्यादातर हिस्से पर धनी देशों ने कब्जा कर लिया है। इसलिए ज्यादातर विकासशील देशों को चीन और रूस के वैक्सीन पर निर्भर करना पड़ रहा है। 

चीन के वैक्सीन को जल्द मंजूरी
ऐसी खबर है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन जल्द ही चीन में बने वैक्सीन को अपनी मंजूरी देने वाला है। एस्ट्राजेनेका, जॉनसन एंड जॉनसन और दोनों चीनी कंपनियों के वैक्सीन की खासियत यह है कि इन्हें सामान्य रेफ्रिजरेटर के तापमान पर रखा जा सकता है। इसलिए विकासशील देशों में इन्हें लाना-ले जाना आसान है। फाइजर और मॉडर्ना के वैक्सीन के साथ ये सुविधा नहीं है।

गरीब देशों को चीन देगा एक करोड़ डोज
विकासशील और गरीब देशों को वैक्सीन सप्लाई करने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन की देखरेख में चलाए जा रहे कार्यक्रम कॉवैक्स को चीन ने एक करोड़ डोज देने का वादा किया है। इसके अलावा अलग-अलग देशों से द्विपक्षीय समझौतों के तहत वह उन्हें दस करोड़ डोज भेज चुका है। इनमें बड़ी संख्या में वैक्सीन डोज अनुदान के रूप में दिए गए हैं। 

पहली प्राथमिकता लोगों की जान बचाना : थॉमस बोलिकी

अमेरिकी थिंक टैंक काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशन्स में ग्लोबल हेल्थ प्रोग्राम के निदेशक थॉमस बोलिकी ने अमेरिकी टीवी चैनल सीएनएन को बताया कि इस समय पहली प्राथमिकता नए संक्रमणों को रोकना और लोगों को मरने से बचाना है। ऐसे में चीन का वैक्सीन अनुदान देना खुशी की बात है, लेकिन वह ऐसा अपने रणनीतिक हितों के मुताबिक कर रहा है। उसने लगभग 65 देशों को वैक्सीन देने का वादा किया है, जिनमें ज्यादातर वे देश हैं, जो चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव का हिस्सा हैं।

सभी कंपनियां स्थगित करें पेटेंट तो ही सभी को लग पाएंगे टीके
विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक सभी कंपनियां कोरोना वैक्सीन के अपने पेटेंट स्थगित नहीं करतीं, दुनिया की लगभग आठ अरब की पूरी आबादी का टीकाकरण संभव नहीं होगा। हालांकि पेटेंट हटने के बाद भी उत्पादन की समस्या बनी रहेगी। वैक्सीन उत्पादन की क्षमता सीमित देशों के पास ही है। 

विशेषज्ञों ने अनुमान लगाया है कि अगले छह से 12 महीनों तक वैक्सीन सप्लाई में बाधा बनी रहेगी। टर्की के स्वास्थ्य मंत्री फहरतिन कोका ने पिछले हफ्ते कहा कि उनके देश के लिए अगले दो महीने तक वैक्सीन हासिल करना मुश्किल बना रहेगा। टर्की ने रूसी वैक्सीन स्पुतनिक-वी के पांच करोड़ डोज मंगवाने का करार किया है। इसके अलावा वह अपने देश के अंदर भी वैक्सीन तैयार करने की कोशिशों में जुटा हुआ है। क्यूबा में पांच वैक्सीन तैयार करने पर काम चल रहा है, जिनमें दो तीसरे चरण के परीक्षण में हैं। 

 

पहले पांच महीनों के बराबर मामले एक हफ्ते में आए

लेकिन अभी कुल सूरत यह है कि वैक्सीन की सप्लाई छिटपुट बनी हुई है, जबकि कोरोना वायरस के नए रूप और संक्रमण की नई लहर ने दुनिया को फिर से ऐसा लगता है कि वहीं पहुंचा दिया है, जहां ये एक साल पहले थी। बल्कि स्थिति उससे भी काफी बुरी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने ध्यान दिलाया है कि पिछले हफ्ते दुनिया में नए संक्रमण के उतने मामले सामने आए, जितने महामारी आने के बाद पहले पांच महीनों में आए थे। 

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