{"_id":"5fc83e3838158619302b5a3d","slug":"corona-vaccine-becomes-a-reality-only-in-ten-months","type":"story","status":"publish","title_hn":"कामयाबी: महज 10 महीने में हकीकत बना कोरोना वायरस का टीका","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
कामयाबी: महज 10 महीने में हकीकत बना कोरोना वायरस का टीका
Thu, 03 Dec 2020 07:12 AM IST
Kuldeep Singh
न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस
न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस
Published by: Kuldeep Singh
Updated Thu, 03 Dec 2020 07:12 AM IST
विज्ञापन
Pfizer Coronavirus Vaccine
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
किसी भी टीके पर शोध से लेकर उसको तैयार करने और मंजूरी तक की प्रक्रिया में कई साल लग जाते हैं, लेकिन फाइजर द्वारा विकसित कोरोना का टीका पहला ऐसा टीका होगा जो महज 10 महीने में संकल्पना से हकीकत तक पहुंचेगा। फाइजर ने अमेरिका में भी मंजूरी के लिए एफडीए में आवेदन किया है। अब तक फाइजर, बायोएनटेक, मॉडर्ना, रूस के स्पुतनिक और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की एस्ट्राजेनेका के टीकों के ही तीन चरण के नतीजे सामने आए हैं।
विज्ञापन
टीके के इस साल 5 करोड़ डोज तैयार होंगे, आधे अमेरिका को
फाइजर ने कहा है कि इस साल टीके के 5 करोड़ डोज तैयार होंगे। इसमें से आधे अमेरिका को दिए जाएंगे। एक व्यक्ति को महीने में दो डोज लगेंगे। दुनिया भर में वर्ष 2021 से पहले 2.5 करोड़ लोगों को टीका लग जाएगा। कंपनी ने बताया कि अमेरिका पहले ही वैक्सीन के 10 करोड़ डोज खरीद चुका है।
विज्ञापन
कुछ इस तरह से तैयार हुई वैक्सीन
फाइजर का टीका एम-आरएनए (मैसेंजर) तकनीक पर आधारित है। इसमें कोरोना वायरस के जेनेटिक मैटेरियल के बहुत सूक्ष्म कणों का प्रयोग हुआ है। अभी तक मनुष्य पर परीक्षण की अनुमति नहीं मिली थी। हां, मनुष्यों पर परीक्षण के दौरान इसका प्रयोग बहुत सावधानी से किया गया था।
विज्ञापन
अमेरिकी अधिकारियों पर दबाव बढ़ा
ब्रिटेन ने टीकाकरण की तैयारियां भी पूरी कर ली है। अमेरिकी कंपनी द्वारा तैयार टीके को ब्रिटेन से मंजूरी के बाद अमेरिकी अधिकारियों पर दबाव और बढ़ गया है। पहले ही व्हाइट हाउस से ऐसे अधिकारियों को निकाला जा रहा है जो टीके को लेकर राष्ट्रपति ट्रंप की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाए हैं। अमेरिका के सामने टीकाकरण के साथ लोगों को यह बताना कि टीका पूरी तरह सुरक्षित है, यह दोहरी चुनौती है।
डीप फ्रीज सूटकेस में होगी वैक्सीन की आपूर्ति, जीपीएस ट्रैकर से निगरानी
फाइजर कंपनी द्वारा तैयार इन टीकों की आपूर्ति की प्रक्रिया शुरू हो गई है। फाइजर की वैक्सीन की आपूर्ति माइनस 70 डिग्री सेल्सियस के तापमान में होनी है। तापमान का ध्यान रखते हुए फाइजर ने डीप फ्रीज सूटकेस भी तैयार किया है।
इसमें वैक्सीन इतनी टाइट सील रहेगी कि अगर बिना रेफ्रिजरेटेड ट्रक में भी उसका वितरण हो तो वैक्सीन पर असर नहीं पड़ेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि अब तक इस ऐसी कोई दवा नहीं थी जिसे इतना कम तापमान चाहिए था।
वैक्सीन की सुरक्षित आपूर्ति के लिए डीप फ्रीज को ड्राई आइस से पैक किया गया है। इसके साथ ही इसमें जीपीएस ट्रैकर लगाया गया है जिससे कंपनी वैक्सीन की लोकेशन और उसकी शीशियों के तापमान पर नजर रख सकेगी। एक डीप फ्रीज बॉक्स में वैक्सीन के 5 हजार डोज को 10 दिन तक रखा जा सकता है।
दिन में सिर्फ दो बार खुलेगा वैक्सीन बॉक्स
फाइजर ने यह भी स्पष्ट किया है जिस डीप फ्रीज बॉक्स में वैक्सीन का वितरण होगा। वह दिन भर में सिर्फ दो बार खोला जा सकता है वह भी 3 मिनट से कम समय के लिए ताकि तापमान का संतुलन बना रहे। कंपनी का कहना है कि एक बार वितरण केंद्र पर पहुंचने के बाद व्यक्ति को फ्रिज के दो से 8 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर 5 दिन तक रखा जा सकता है।
जिन देशों से वैक्सीन के लिए ऑर्डर मिला है। उसकी आपूर्ति करने के लिए रोजाना करीब 20 विमान उड़ान भरेंगे। तभी वैक्सीन की रोज वितरण केंद्र तक पहुंचेगी। एक बार वैक्सीन वितरण केंद्र पर पहुंचेगी तो उसकी क्वालिटी चेक की जाएगी इसके बाद ही आगे की प्रक्रिया पूरी होगी।