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COP29: जलवायु वित्त के प्रस्ताव पर नागरिक समाज की नाराजगी, कहा- बुरी डील होने से अच्छा, कोई समझौता ही न हो

Sat, 23 Nov 2024 12:55 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बाकू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बाकू Published by: नितिन गौतम Updated Sat, 23 Nov 2024 12:55 PM IST
सार

विकसित देशों ने साल 2035 तक जलवायु वित्त में 250 अरब डॉलर का फंड देने की बात कही है। नागरिक समाज के लोगों ने इस प्रस्ताव को अपमान और अन्यायपूर्ण समझौता करार दिया है। 

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COP29 Civil society protests climate finance proposal calls for no deal over bad deal
बाकू में जारी है जलवायु सम्मेलन - फोटो : यूएन

विस्तार

बाकू में आयोजित हो रहे जलवायु सम्मेलन के दौरान नागरिक समाज ने विरोध प्रदर्शन किया। दरअसल नागरिक समाज (सिविल सोसाइटी) के लोग विकसित देशों के उस प्रस्ताव का विरोध कर रहे हैं, जिसमें विकसित देशों ने साल 2035 तक जलवायु वित्त में 250 अरब डॉलर का फंड देने की बात कही है। नागरिक समाज के लोगों ने इस प्रस्ताव को अपमान और अन्यायपूर्ण समझौता करार दिया है। 
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नागरिक समाज के लोगों ने सम्मेलन स्थल पर निकाला विरोध मार्च
नागरिक समाज के लोगों ने अपने हाथों में बैनर लेकर सम्मेलन स्थल पर शांतिपूर्ण विरोध मार्च निकाला। 1900 नागरिक समाज संगठनों के वैश्विक गठबंधन क्लाइमेट एक्शन नेटवर्क ने विकासशील देशों के सबसे बड़े समूह जी77 और चीन को लिखे पत्र में अपील करते हुए लिखा कि 'वैश्विक दक्षिण का समर्थन करें और हम अपील करते हैं कि बाकू में कोई बेकार समझौता होने से अच्छा है कि कोई समझौता ही न हो।'
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'खरबों के नुकसान पर इतना जलवायु वित्तपोषण देना अपमानजनक'
CAN (Cliamte Action Network) साउथ एशिया के वरिष्ठ सलाहकार शैलेंद्र यशवंत ने प्रस्ताव की निंदा करते हुए कहा, 'नवीनतम मंत्रिस्तरीय पाठ में 250 अरब अमरीकी डॉलर का जलवायु वित्त पर नया सामूहिक परिमाणित लक्ष्य कोई मजाक है, यह वैश्विक दक्षिण के लोगों का अपमान है जो बाढ़, हीटवेव, चक्रवात, भूस्खलन या जंगल की आग और अन्य जलवायु परिवर्तन-प्रेरित आपदाओं से अपने सामान को बचाने और अपने जीवन को फिर से बनाने की कोशिश कर रहे हैं।' जीवाश्म ईंधन अप्रसार संधि पहल के लिए वैश्विक जुड़ाव निदेशक हरजीत सिंह ने प्रस्ताव को 'अपमानजनक' कहा। उन्होंने कहा, 'विकसित देश जलवायु कार्रवाई की लागत से पूरी तरह वाकिफ हैं, जो सालाना खरबों डॉलर में है। फिर भी उनमें इतनी कम राशि देने की हिम्मत थी।'
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विकासशील देश 1.3 खरब डॉलर की कर रहे मांग
प्रसिद्ध जलवायु कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग ने भी जलवायु वित्त पर तैयार किए गए मसौदे की आलोचना की और इसे जलवायु संकट के प्रति पहले से ही संवेदनशील लाखों लोगों के लिए 'मृत्युदंड' कहा। बाकू में संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन में, देशों को विकासशील देशों को ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कटौती करने और गर्म होती दुनिया के अनुकूल होने में मदद करने के लिए एक नए जलवायु वित्त पैकेज पर मंथन हो रहा है। शिखर सम्मेलन शुक्रवार को समाप्त होने वाला था, लेकिन विकसित देशों द्वारा 250 अरब अमेरिकी डॉलर की राशि की पेशकश की है, लेकिन यह बढ़ती जलवायु आपात स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक खरबों डॉलर से बहुत कम है। विकासशील देश अपनी बढ़ती जलवायु चुनौतियों से निपटने के लिए 2025 से शुरू होने वाले वार्षिक बजट में कम से कम 1.3 खरब अमेरिकी डॉलर की मांग कर रहे हैं - जो 2009 में दिए गए 100 अरब अमेरिकी डॉलर के वादे से 13 गुना ज़्यादा है।
 
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