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कॉप-26 सम्मेलन: रिपोर्ट में दावा, पर्यावरण के लिए असल खतरा हैं दुनिया के रईस, जेफ बेजोस भी निशाने पर

Sat, 06 Nov 2021 06:49 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ग्लासगो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ग्लासगो Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 06 Nov 2021 06:49 PM IST
सार

ताजा रिपोर्ट गैर-सरकारी संस्था ऑक्सफेम ने जारी की है। इस संस्था की जलवायु नीति प्रमुख नफकोते दाबी ने ब्रिटिश अखबार द गार्जियन से कहा- ‘ऐसा लगता है कि एक मुट्ठी भर धनी तबके को धरती को प्रदूषित करने का फ्री पास मिला हुआ है। उनके उत्सर्जन के कारण दुनिया को असामान्य मौसम का सामना करना पड़ रहा है और उसकी वजह से ग्लोबल वॉर्मिंग को रोकने का लक्ष्य खतरे में पड़ गया है।’

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Cop-26 conference: A report claims, world richs are the real threat to climate, Jeff Bezos is also on target
जेफ बेजोस - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र के यहां चल रहे सम्मेलन (कॉप-26) के बीच ये बात सामने आई है कि धरती के जलवायु को असल नुकसान दुनिया के सबसे धनी लोग पहुंचा रहे हैं। एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया के सबसे धनी एक फीसदी लोग आम इंसान की तुलना में 30 गुना ज्यादा कार्बन उत्सर्जन कर रहे हैं। इसके पहले कई वैज्ञानिक भी सरकारों से ‘विलासितापूर्ण कार्बन उपभोग’ को सीमित करने की मांग कर चुके हैं। जानकारों का कहना है कि प्राइवेट जेट और मेगायाच (बड़ी क्रूज नौकाएं) रखने, और व्यक्तिगत अंतरिक्ष यात्रा जैसे धनी लोगों के शौक से ग्लोबल वॉर्मिंग को सीमित रखने का लक्ष्य खतरे में पड़ रहा है।

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'धरती प्रदूषित करने का मिला हुआ है फ्री पास'

ताजा रिपोर्ट गैर-सरकारी संस्था ऑक्सफेम ने जारी की है। इस संस्था की जलवायु नीति प्रमुख नफकोते दाबी ने ब्रिटिश अखबार द गार्जियन से कहा- ‘ऐसा लगता है कि एक मुट्ठी भर धनी तबके को धरती को प्रदूषित करने का फ्री पास मिला हुआ है। उनके उत्सर्जन के कारण दुनिया को असामान्य मौसम का सामना करना पड़ रहा है और उसकी वजह से ग्लोबल वॉर्मिंग को रोकने का लक्ष्य खतरे में पड़ गया है।’

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ऑक्सफेम की तरफ से ये अध्ययन इंस्टीट्यूट फॉर इनवायरमेंटल पॉलिसी और स्टॉकहोम इनवायरमेंट इंस्टीट्यूट ने किया। यहां चल रहे कॉप-26 (जलवायु संधि से संबंधित पक्षों की 26वीं बैठक) में उन उपायों पर विचार किया जा रहा है, जिनसे धरती के तापमान को 1.5 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा न बढ़ने दिया जाए। लेकिन यहां अनेक नेता और पूंजीपति अपने निजी विमान से आए। उनमें ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन भी हैं, जो इस सम्मेलन के मेजबान हैं। उनके साथ मोटर गाड़ियों का लंबा काफिला चला। इसकी सिविल सोसायटी संगठनों ने कड़ी निंदा की है।

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जेफ बेजोस की अंतरिक्ष यात्रा की कड़ी निंदा

ऑक्सफेम ने कहा है कि इन शख्सियतों को अपने निजी उपभोग में कमी लाकर ग्लोबल वॉर्मिंग रोकने की मुहिम का नेतृत्व करना चाहिए। ऑक्सफेम की स्कॉटलैंड शाखा के प्रमुख जेमी लिविंगस्टोन ने कहा- ‘विश्व नेताओं को अत्यधिक उत्सर्जन को नियंत्रित करने पर सहमत होना पड़ेगा। उन्हें इस बारे में प्रमाण यहीं ग्लासगो में देना होगा।’ सिविल सोसायटी कार्यकर्ताओं का कहना है कि अमेजन कंपनी के मालिक जेफ बेजोस ने इस साल अंतरिक्ष की निजी यात्रा करके एक बहुत खराब मिसाल कायम की है। उनकी 11 मिनट की अंतरिक्ष यात्रा के दौरान कम से कम 75 टन कार्बन का उत्सर्जन हुआ।


ग्लासगो सम्मेलन में चर्चा के औपचारिक रूप ले लेने से कार्यकर्ताओं की ये उम्मीद टूट रही है कि यहां कुछ ठोस हासिल हो सकेगा। शुक्रवार को ग्लासगो में हजारों ने नौजवानों ने इस मुद्दे पर प्रदर्शन किया। उसे संबोधित करते हुए युवा पर्यावरणवादी कार्यकर्ता ग्रेटा टनबर्ग ने ग्लासगो बैठक को नाकाम ठहरा दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि यहां आए नेता अपने देशों के उत्सर्जन पर हरा परदा डालने की कोशिश कर रहे हैँ। वे ऐसी यहां बनने वाली सहमति में ऐसी खामियां छोड़ रहे हैं, जिससे वे जलवायु संधि का उल्लंघन कर सकेँ।


ऑक्सफेम की रिपोर्ट में कहा गया है कि जलवायु को खतरा दुनिया के ज्यादातर लोगों के उपभोग से नहीं है। बल्कि सबसे धनी दस फीसदी लोग ही इतना उत्सर्जन कर रहे हैं, जिसके जारी रहते ग्लोबल वॉर्मिंग को 1.5 डिग्री सेल्सियश तक रोकना मुश्किल है।

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