बिगड़ रहे रिश्ते: टीटीपी को लेकर पाकिस्तान और अफगान तालिबान के बीच लगातार बढ़ रहा है टकराव
विश्लेषकों का कहना है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने काबुल पर तालिबान के कब्जे का रास्ता तैयार करने में अहम भूमिका निभाई। इससे पाकिस्तान में यह अपेक्षा बढ़ी कि तालिबान टीटीपी पर काबू पाने में उसे सहायता देगा। लेकिन अब ये अंदाजा गलत साबित हो रहा है...
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तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के मसले पर पाकिस्तान और अफगान तालिबान के बीच टकराव बढ़ रहा है। एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक अफगान तालिबान ने ये संकेत दे दिया है कि वह अफगानिस्तान स्थित टीटीपी उग्रवादियों को पाकिस्तान के हाथों सौंपने को तैयार नहीं है। अफगान तालिबान ने टीटीपी के अड्डों को नष्ट करने की पाकिस्तान की मांग भी ठुकरा दी है।
बताया जाता है कि टीटीपी के अल-कायदा और दूसरे इस्लामी गुटों के साथ गहरे रिश्ते हैं। अफगान तालिबान को अंदेशा है कि टीटीपी पर कार्रवाई का मतलब उन तमाम गुटों के खिलाफ भी मोर्चा खोलना होगा। फिलहाल ऐसा करना तालिबान अपने हित में नहीं मानता। इसलिए तालिबान यह चाहता है कि पाकिस्तान सरकार टीटीपी के साथ फिर बातचीत शुरू करे और किसी समझौते पर पहुंचने की कोशिश करे। तालिबान की मध्यस्थता के कारण नवंबर में पाकिस्तान सरकार और टीटीपी में युद्धविराम समझौता हुआ था, लेकिन दिसंबर में वह टूट गया।
तालिबान की आलोचना
अफगानिस्तान से मिले संदेश के बाद पाकिस्तान के राजनेताओं ने तालिबान की आलोचना तेज कर दी है। पाकिस्तान की अवामी नेशनल पार्टी के प्रवक्ता जाहिद खान ने वेबसाइट एशिया टाइम्स से कहा- ‘समझौते दो संप्रभु देशों, और कानून सम्मत संगठनों के बीच होते हैं। एक प्रतिबंधित और घोषित अपराधी गुट के साथ कोई समझौता नहीं हो सकता।’ अवामी नेशनल पार्टी का बलूचिस्तान में मुख्य आधार है, जहां टीटीपी का सक्रिय रहा है।
जाहिद खान ने कहा- ‘पाकिस्तान सरकार पहले दिन से गलत अफगान नीति पर चल रही है। काबुल पर तालिबान के कब्जे के साथ सरकार ने एलान कर दिया कि तालिबान ने गुलामी की जंजीरें तोड़ दी हैं। लेकिन अब वही तालिबान पाकिस्तान को आंखे दिखा रहा है।’
विश्लेषकों का कहना है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने काबुल पर तालिबान के कब्जे का रास्ता तैयार करने में अहम भूमिका निभाई। इससे पाकिस्तान में यह अपेक्षा बढ़ी कि तालिबान टीटीपी पर काबू पाने में उसे सहायता देगा। लेकिन अब ये अंदाजा गलत साबित हो रहा है। युद्धविराम समझौते के बाद की बातचीत में टीटीपी ने जैसा सख्त रुख अपनाया, उससे साफ संकेत मिला कि अफगान तालिबान का उस पर कोई दबाव नहीं है।
टीटीपी पर तेज होगी कार्रवाई
बीते पांच जनवरी को आईएसआई के महानिदेशक बाबर इफ्तिखार ने रावलपिंडी में एक प्रेस कांफ्रेंस में एलान किया कि अब पाकिस्तानी बल टीटीपी पर अपनी कार्रवाई तेज करेंगे। इफ्तिखार ने कहा कि टीटीपी को संगठित समूह नहीं है और उसके भीतर गहरे मतभेद हैं। इस पर टीटीपी ने तुरंत अपनी प्रतिक्रिया दी। उसने एक बयान में कहा- ‘हम पाकिस्तान के लोगों को यह साफ बता देना चाहते हैं कि हम युद्ध और वार्ता दोनों के लिए तैयार हैं। आज हमारी राजनीतिक और सैनिक ताकत अतीत के किसी समय की तुलना में ज्यादा है। हम दुश्मन के प्रचार से बिखरने वाले नहीं हैं।’
इसी बीच टीटीपी ने एक इंफोग्राफिक्स जारी कर दावा किया है कि बीते दस दिसंबर को युद्धविराम टूटने के बाद से उसने पाकिस्तानी सेना के ठिकानों पर 45 हमले किए हैं, जिनमें कम से कम 50 लोग मारे गए हैं और 65 से ज्यादा सुरक्षाकर्मी घायल हुए हैं। इनमें से ज्यादातर हमले कबीलाई इलाकों में हुए। टीटीपी ने इन बयानों ने पाकिस्तान में नाराजगी बढ़ा दी है। इसी कारण अफगान तालिबान के प्रति भी पाकिस्तान सरकार का रुख सख्त हो गया है।