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अफगानिस्तान: बरादर गुट और हक्कानी के बीच बढ़ी तकरार, एनआरएफ का दावा- आपसी गोलीबारी में बरादर घायल
Sun, 05 Sep 2021 07:36 AM IST
Jeet Kumar
एजेंसी, काबुल।
एजेंसी, काबुल।
Published by: Jeet Kumar
Updated Sun, 05 Sep 2021 07:36 AM IST
सार
अफगानिस्तान पर कब्जे के 18 दिन बाद भी सरकार का खाका तैयार करने के लिए जूझ रहे तालिबान के भीतर प्रमुख पद पाने के लिए संगठन के मुख्य राजनीतिक वार्ताकार रहे और प्रशासन के मुखिया बनाए जा रहे मुल्ला अब्दुल गनी बरादर गुट और हक्कानी नेटवर्क के बीच घमासान छिड़ गया है।
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मुल्ला अब्दुल गनी बरादर (मध्य) के साथ
- फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
अफगानिस्तान में नई सरकार में प्रमुख पद पाने के लिए बरादर गुट और हक्कानी नेटवर्क के बीच घमासान छिड़ गया है। इसी वजह से तालिबान को सरकार का गठन तीन-चार दिन टालना पड़ा। इसी घमासान को शांत कराने के लिए पाकिस्तान को खुफिया एजेंसी प्रमुख जनरल फैज हमीद को काबुल भेजना पड़ा है।
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दावा किया जा रहा है कि हक्कानी नेटवर्क के नेता अनस हक्कानी और खलील हक्कानी की मुल्ला बरादर और मुल्ला याकूब के साथ झड़प भी हुई है। हक्कानी नेटवर्क सरकार में बड़ी हिस्सेदारी और रक्षामंत्री का पद मांग रहा है, जबकि तालिबान इतना कुछ देने को तैयार नहीं है। इसी वजह से तालिबान सरकार का एलान नहीं कर सका है।
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सैन्य आयोग के पद पर भी पेच
बरादर और हक्कानी नेटवर्क के बीच विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। मुल्ला उमर के बेटे मुल्ला याकूब शक्तिशाली तालिबान सैन्य आयोग के प्रमुख की भूमिका निभाना चाहता है। उसका काम तालिबान के फील्ड कमांडरों के एक विशाल नेटवर्क की देखरेख करना होगा। तालिबान सरकार में यह पद बेहद शक्तिशाली और सम्मानित माना जाता है।
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चंदे की राशि पर भी झगड़ा
तालिबान ने कबायली सरदारों से चंदे के रूप में बड़ी रकम एकत्रित की है। राशि का उपयोग अफगानिस्तान फतह के बाद होना था। अब काबुल पर भी तालिबान का कब्जा हो चुका है तो इस पैसे में हक्कानी नेटवर्क हिस्सा मांग रहा है। वहीं, याकूब एक पैसा भी हक्कानी को नहीं देना चाहता।
दोहा दफ्तर की टीम से भी मुल्ला याकूब खफा
तालिबान के राजनीतिक नेतृत्व ने हक्कानी नेटवर्क को सरकार में कुछ अहम पद देने की हामी भी भरी थी। अनस हक्कानी को काबुल पर कब्जे के तुरंत बाद राजधानी की सुरक्षा का प्रभार भी सौंपा गया था। इस फैसले से मुल्ला याकूब काफी नाराज है। याकूब ने कहा है कि दोहा में विलासिता का जीवन जीने वाले नेता जमीन पर लड़ने में शामिल लोगों पर शर्तें नहीं थोप सकते हैं।
एनआरएफ का दावा, आपसी गोलीबारी में बरादर घायल
एनआरएप ने दावा किया कि काबुल में तालिबान सरगनाओं के बीच फूट इतनी बढ़ गई कि गोलीबारी तक होने लगी है। एनआरएफ ने दावा किया कि तालिबानी मुखिया मुल्ला बरादर घायल है और उसका पाकिस्तान में इलाज किया जा रहा है। संगठन के मुताबिक, यही वजह है कि अफगानिस्तान में नई सरकार की घोषणा नहीं हो पाई।
पंजशीर में लड़ाई तेज
तालिबान नेताओं में आपसी विवाद के बीच पंजशीर की लड़ाई जोरों पर है। जानकारी के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों से जारी लड़ाई में दोनों पक्षों के 300 से ज्यादा लड़ाके अपनी जान गंवा चुके हैं। इससे पहले तालिबान ने पंजशीर को जीतने का दावा किया था। हालांकि, उत्तरी प्रतिरोधी मोर्चे ने तालिबान के दावे का खंडन किया है। इस घटना के बाद तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने ट्विटर पर सख्त नसीहत दी है कि लड़ाके जश्न के लिए हवाई फायरिंग के बजाय खुदा का शुक्रिया अदा करें।
तालिबान का दावा है कि उसने पंजशीर प्रांत को अपने कब्जे में ले लिया है, जबकि रेजिस्टेंस फोर्सेज (विद्रोही गुटों) ने तालिबान के दावे को खारिज किया है। साथ ही यह भी दावा किया है कि उन्होंने तालिबान को भारी नुकसान पहुंचाया है। पंजशीर घाटी में विद्रोहियों का नेतृत्व कर रहे अहमद मसूद ने तालिबान के दावे का खंडन करते हुए कहा, पाकिस्तान में पंजशीर जीतने की जो खबरें प्रसारित हो रही हैं, वे फर्जी हैं।
तालिबान ने दावा किया कि पंजशीर पर चढ़ाई के बाद अफगानिस्तान के उपराष्ट्रपति और पंजशीर से तालिबान को चुनौती दे रहे अमरुल्लाह सालेह खुद देश छोड़कर फरार हैं, हालांकि, इस बीच अमरुल्लाह सालेह ने एक वीडियो पोस्ट कर तालिबान के दावे को खारिज करते हुए कहा कि वह देश छोड़कर भागे नहीं हैं। उन्होंने कहा है कि वह पंजशीर घाटी में ही हैं और रेसिस्टेंस फोर्स के कमांडरों और राजनीतिक हस्तियों के साथ हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि तालिबान के पीछे पाकिस्तान है। तालिबान का साथ अल कायदा सहित देश-विदेश के कई आतंकी संगठन दे रहे हैं।