स्पेस वॉर का खतरा: अमेरिका और चीन में अब छिड़ेगी चांद से हिलियम-3 गैस लाने की होड़
हिलियम-3 गैस परमाणु ऊर्जा के उत्पादन के लिए एक महत्त्वपूर्ण संसाधन है। इसके उपयोग से फ्यूजन विधि से परमाणु ऊर्जा का उत्पादन होता है। इस प्रक्रिया में खतरनाक परमाणु कचरा पैदा नहीं होता। दूसरी तरह का प्रदूषण भी बहुत कम होता है...
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चांद पर और अंतरिक्ष में मौजूद संसाधनों पर कब्जा जमाने के लिए अमेरिका, चीन और रूस के बीच होड़ शुरू होने की स्थिति बन रही है। विशेषज्ञों ने चेतावनी है कि अब मानव जाति को धरती पर हथियारों की होड़ के साथ-साथ अंतरिक्ष में तीखी होड़ भी देखने को मिल सकती है। अमेरिका, रूस, और चीन के बीच इस बात की इस होड़ शुरू हो चुकी है कि उनमें से कौऩ सबसे पहले चंद्रमा पर मौजूद हिलियम-3 गैस पर कब्जा जमाएगा।
हिलियम-3 गैस परमाणु ऊर्जा के उत्पादन के लिए एक महत्त्वपूर्ण संसाधन है। इसके उपयोग से फ्यूजन विधि से परमाणु ऊर्जा का उत्पादन होता है। इस प्रक्रिया में खतरनाक परमाणु कचरा पैदा नहीं होता। दूसरी तरह का प्रदूषण भी बहुत कम होता है।
अंतरिक्ष में है कच्चे माल का स्रोत
अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के पूर्व अंतरिक्ष विश्लेषक टिम क्रिसमैन ने वेबसाइट एशिया टाइम्स को बताया- ‘अंतरिक्ष की बाहरी कक्षा में असीमित मात्रा में ऊर्जा और कच्चे माल हैं। चांद पर हिलियम-3 गैस है, जिसके उपयोग से फ्यूजन रिएक्टरों से स्वच्छ ऊर्जा बनाई जा सकती है। क्षुद्रग्रहों (एस्टिरॉयड्स) पर भारी धातु और ऐसी गैसें मौजूद हैं, जिनका धरती पर उपयोग किया जा सकता है।’ क्रिसमैन ने कहा- ‘चीन जिस किसी संसाधन तक पहुंचेगा, उसका इस्तेमाल वह जरूर करेगा। इसका नुकसान उसके विरोधियों और प्रतिस्पर्धियों को होगा।’
बताया जाता है कि चीन अंतरिक्ष में मौजूद ऊर्जा का धरती पर उपयोग करने के प्रयोगों में गंभीरता से जुटा हुआ है। क्रिसमैन ने आशंका जताई कि चीन इस मामले में अमेरिका से आगे निकल सकता है। अमेरिका के सामने चुनौती यह है कि उसे अपनी ऊर्जा से संबंधित विभिन्न एजेंसियों को एकजुट करना होगा। जबकि चीन में सरकार ऐसे फैसले तेजी से ले लेती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर अमेरिका 40 टन हिलियम-3 गैस अंतरिक्ष से धरती पर लाने में सफल हो जाए, तो उसके साल भर की ऊर्जा की जरूरत उससे पूरी हो सकती है।
दस हजार साल तक मिलेगी ऊर्जा
चीन में चंद्रमा अभियान के प्रमुख वैज्ञानिक प्रोफेसर उयांग जियुआन ने हाल में कहा था कि चांद पर इतनी बड़ी मात्रा में हिलियम-3 गैस है कि उससे पूरी दुनिया की दस हजार साल तक की ऊर्जा की जरूरत पूरी हो सकती है। अब चीन में कई संस्थाएं चांद से लाए गए चट्टानों के अध्ययन में जुटी हुई हैं। इस दौरान यह भी मालूम करने की कोशिश हो रही है कि क्या उन चट्टानों में मौजूद सामग्रियों का इस्तेमाल फ्यूजन विधि से परमाणु ऊर्जा बनाने में हो सकता है।
चीन का चंद्रमा पर गया यान पिछले दिसंबर वहां से 1.73 किलोग्राम धरती की सामग्री वापस ले आया था। उस सामग्री का वहां गंभीरता से अध्ययन हो रहा है। बीजिंग स्थित रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ यूरेनियम जियोलॉजी के अनुसंधानकर्ता हुआंग झिनशिन ने बीते अगस्त में चीन के टीवी चैनल सीसीटीवी को दिए एक इंटरव्यू में कहा था- ‘अध्ययन का मुख्य उद्देश्य यह जानना है कि चंद्रमा की मिट्टी में हिलियम-3 की कितनी मात्रा मौजूद है, उसे मिट्टी के कैसे अलग किया जा सकता है और इसके लिए कितने तापमान की जरूरत होगी। यह भी पता किया जा रहा है कि हिलियम-3 गैस किस तरह से वहां की मिट्टी में समाहित हो जाती है।’