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US: राष्ट्रमंडल महासचिव ने सदस्य देशों के साथ यूपीआई तकनीक पर भारत की तारीफ, जानिए वजह
Fri, 28 Oct 2022 10:02 PM IST
वीरेंद्र शर्मा
वर्ल्ड न्यूज, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड न्यूज, अमर उजाला, वाशिंगटन
Published by: वीरेंद्र शर्मा
Updated Fri, 28 Oct 2022 10:02 PM IST
सार
यूपीआई एक तत्काल रीयल-टाइम भुगतान प्रणाली है जो इंटर-बैंक पीयर-टू-पीयर लेनदेन की सुविधा प्रदान करती है। मोबाइल के माध्यम से की जाने वाली पेमेंट कोई अतिरिक्त शुल्क भी लागू नहीं होता है। स्कॉटलैंड ने कहा कि, इस माध्यम ने कैशलेस अर्थव्यवस्था में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
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विस्तार
एकीकृत भुगतान इंटरफेस (यूपीआई) पेमेंट के प्रस्ताव वाले कदम पर भारत की सराहना की गई है। राष्ट्रमंडल महासचिव पेट्रीसिया स्कॉटलैंड ने इस कदम को परिवर्तनकारी बताते हुए अन्य सदस्य देशों के साथ यूपीआई तकनीक साझा करने के भारत के प्रस्ताव का स्वागत किया है। दरअसल, भारत ने 12 अक्तूबर को कॉमनवेल्थ बैंक ऑफ गवर्नर्स की बैठक के दौरान यह प्रस्ताव दिया था।
पेट्रीसिया स्कॉटलैंड ने कहा कि अपनी तकनीक को दूसरों के साथ साझा करने की भारत की इच्छा इसे अन्य देशों से अलग बनाती है। भारत का यह अच्छा कदम है। उन्होंने संकेत दिया है कि यूपीआई तकनीक को अन्य सदस्य देश साझा करने के लिए तैयार हैं। 56 देशों के समूह के महासचिव ने कहा कि इस खुलेपन और उदारता का बहुत स्वागत है। उन्होंने कहा कि भारत ने यूपीआई के जरिए पेमेंट के ऑप्शन पर अन्य देशों को एक राह दिखाई हैं। भारत ने न केवल इस तकनीक को विकसित किया है, बल्कि जनता की भलाई के लिए दूसरों के साथ साझा करने के लिए तैयार है। यह संभावित रूप से परिवर्तनकारी रहा है, क्योंकि भारत ने इसमें एक उज्जवल भविष्य देखा है।
मॉरीशस में राष्ट्रमंडल के कानून मंत्रियों की बैठक होगी। उन्होंने कहा कि बैठक के दौरान इस तकनीक को रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रमंडल के सदस्य देश डिजिटल भुगतान प्रणाली को अपनाने के लिए उत्सुक हैं, क्योंकि तथ्य यह है कि अब भारत ने अपने लाखों लोगों को गरीबी से बाहर निकाला है। इन प्रत्यक्ष भुगतानों को उनके हाथ में देकर आप तत्काल धन प्राप्त करने में सक्षम हैं, इससे महिलाओं को बहुत लाभ हुआ है।
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यूपीआई एक तत्काल रीयल-टाइम भुगतान प्रणाली है जो इंटर-बैंक पीयर-टू-पीयर लेनदेन की सुविधा प्रदान करती है। मोबाइल के माध्यम से की जाने वाली पेमेंट करने पर कोई अतिरिक्त शुल्क लागू नहीं होता है। इस माध्यम ने कैशलेस अर्थव्यवस्था को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, सितंबर में यूपीआई के इस्तेमाल से देश में 11 लाख करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ है।
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पेट्रीसिया स्कॉटलैंड ने कहा कि अपनी तकनीक को दूसरों के साथ साझा करने की भारत की इच्छा इसे अन्य देशों से अलग बनाती है। भारत का यह अच्छा कदम है। उन्होंने संकेत दिया है कि यूपीआई तकनीक को अन्य सदस्य देश साझा करने के लिए तैयार हैं। 56 देशों के समूह के महासचिव ने कहा कि इस खुलेपन और उदारता का बहुत स्वागत है। उन्होंने कहा कि भारत ने यूपीआई के जरिए पेमेंट के ऑप्शन पर अन्य देशों को एक राह दिखाई हैं। भारत ने न केवल इस तकनीक को विकसित किया है, बल्कि जनता की भलाई के लिए दूसरों के साथ साझा करने के लिए तैयार है। यह संभावित रूप से परिवर्तनकारी रहा है, क्योंकि भारत ने इसमें एक उज्जवल भविष्य देखा है।
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मॉरीशस में राष्ट्रमंडल के कानून मंत्रियों की बैठक होगी। उन्होंने कहा कि बैठक के दौरान इस तकनीक को रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रमंडल के सदस्य देश डिजिटल भुगतान प्रणाली को अपनाने के लिए उत्सुक हैं, क्योंकि तथ्य यह है कि अब भारत ने अपने लाखों लोगों को गरीबी से बाहर निकाला है। इन प्रत्यक्ष भुगतानों को उनके हाथ में देकर आप तत्काल धन प्राप्त करने में सक्षम हैं, इससे महिलाओं को बहुत लाभ हुआ है।
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यूपीआई एक तत्काल रीयल-टाइम भुगतान प्रणाली है जो इंटर-बैंक पीयर-टू-पीयर लेनदेन की सुविधा प्रदान करती है। मोबाइल के माध्यम से की जाने वाली पेमेंट करने पर कोई अतिरिक्त शुल्क लागू नहीं होता है। इस माध्यम ने कैशलेस अर्थव्यवस्था को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, सितंबर में यूपीआई के इस्तेमाल से देश में 11 लाख करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ है।